मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर विशेष पैकेज, विशेषज्ञ समिति, अवैध कॉलोनियों पर पूर्ण रोक और ‘ग्रीन लखनऊ मिशन–2035’ की माँग

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प्रदेश जनहित खबर उत्तर प्रदेश

सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर लखनऊ के लिए एक व्यापक विशेष आर्थिक, नगरीय नियोजन एवं प्रशासनिक पैकेज आगामी राज्य बजट में शामिल करने का अनुरोध किया। उन्होंने जलभराव निस्तारण तथा किला मोहम्मदी नाले के पुनर्निर्माण के लिए लगभग ₹175 करोड़ की स्वीकृति देने पर मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मेट्रो, आउटर रिंग रोड, गोमती रिवरफ्रंट, एक्सप्रेसवे और बेहतर कानून-व्यवस्था ने राजधानी को नई गति एवं पहचान दी है।

डॉ. सिंह ने कहा कि लखनऊ की आबादी वर्ष 1991 के 16.7 लाख से बढ़कर आज लगभग 42–43 लाख हो गई है, जबकि इसका निर्मित क्षेत्र 48 वर्ग किलोमीटर से बढ़कर 310 वर्ग किलोमीटर से अधिक हो चुका है। अब लखनऊ, हरदोई, सीतापुर, उन्नाव, रायबरेली और बाराबंकी को मिलाकर बने 27,826 वर्ग किलोमीटर के उत्तर प्रदेश राज्य राजधानी क्षेत्र (SCR) के समन्वित विकास की चुनौती भी सामने है। इसलिए राजधानी का नियोजन नगर सीमा तक सीमित नहीं रह सकता; इसके लिए वर्ष 2050 तक का एकीकृत क्षेत्रीय रोडमैप आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि जलभराव, यातायात दबाव, सीवर की अपर्याप्तता, 500 से अधिक अनधिकृत कॉलोनियां, प्रतिदिन लगभग 2,000 मीट्रिक टन ठोस कचरा और करीब 18.5 लाख टन लिगेसी वेस्ट लखनऊ के तीव्र विस्तार से उत्पन्न “सफलता की समस्याएं” हैं। भूजल दोहन प्राकृतिक पुनर्भरण से लगभग 17 गुना तक पहुंच चुका है; वर्ष 2031 तक जलस्तर में 20–25 मीटर की अतिरिक्त गिरावट और कुछ क्षेत्रों में लगभग चार सेंटीमीटर वार्षिक भू-धंसाव की आशंका भी गंभीर चेतावनी है।

डॉ. सिंह ने शहरी नियोजकों, भूजल विशेषज्ञों, पर्यावरणविदों, अभियंताओं, परिवहन योजनाकारों और वित्त विशेषज्ञों की एक उच्चाधिकार प्राप्त बहुवर्षीय विशेषज्ञ समिति गठित करने का प्रस्ताव रखा। इसमें एलडीए, नगर निगम, जल निगम, भूगर्भ जल विभाग, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा आवास एवं शहरी नियोजन विभाग का समन्वय हो और इसकी अध्यक्षता पर्याप्त वरिष्ठ अधिकारी करें। उन्होंने SCR प्राधिकरण की बैठक शीघ्र बुलाने की भी मांग की।

उन्होंने कहा, “एलडीए, नगर निगम और अन्य विभागों की नौकरशाही नीतियों एवं योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक है; लेकिन लखनऊ और SCR की दीर्घकालीन नीतियां तथा विकास योजनाएं वरिष्ठ स्तर पर विषय-विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में तैयार की जानी चाहिए। प्रशासन का दायित्व उनका समयबद्ध, उत्तरदायी और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना है।”

डॉ. सिंह ने कहा, “माननीय महापौर अथवा हममें से किसी भी जनप्रतिनिधि से टाउन प्लानिंग का विशेषज्ञ होने की अपेक्षा नहीं की जा सकती। राजनेता स्वभावतः सामान्यज्ञ होता है—मैं यह बात जितनी दूसरों के लिए कहता हूं, उतनी ही अपने लिए भी।”

उन्होंने नई अवैध कॉलोनियों और अनधिकृत निर्माणों पर पूर्ण रोक लगाने की मांग करते हुए सैटेलाइट एवं ड्रोन निगरानी, ले-आउट स्तर पर ही कार्रवाई, तहसील तथा उप-निबंधक अभिलेखों को एलडीए के स्वीकृत ले-आउट डेटाबेस से जोड़ने, RERA एवं नियोजन कानूनों के कठोर प्रवर्तन और भू-माफिया के विरुद्ध आपराधिक मुकदमे दर्ज करने का सुझाव दिया।

उन्होंने कहा, “कोई अवैध कॉलोनी रातोंरात नहीं बनती।” एलडीए, नगर निगम और तहसील के मौन रहने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। कॉलोनी बस जाने के बाद वहां के निवासी स्वाभाविक रूप से सड़क, नाली, सीवर, जलापूर्ति और स्ट्रीट लाइट जैसी सुविधाओं के लिए जनप्रतिनिधियों से अपेक्षा करते हैं। इससे जनप्रतिनिधियों, नगरीय संस्थाओं और सार्वजनिक कोष पर अनावश्यक दबाव पड़ता है। अवैध विकास का लाभ कॉलोनाइजर कमाता है, पर उसकी आधारभूत संरचना का खर्च अंततः करदाताओं को उठाना पड़ता है। वर्तमान निवासियों की समस्याओं का समाधान भी पारदर्शी, विधिसम्मत और वित्तीय रूप से टिकाऊ नीति से किया जाना चाहिए।

डॉ. सिंह ने कहा कि नगर निगम का लगभग ₹4,304 करोड़ का वार्षिक बजट लखनऊ की आबादी, विस्तार और महानगरीय दायित्वों की तुलना में अपर्याप्त है। एलडीए और नगर निगम का राजस्व बढ़ाने के लिए उन्होंने प्रत्येक संपत्ति की GIS मैपिंग, सभी संपत्तियों को कर-दायरे में लाने, विकास एवं प्रभाव शुल्क की प्रभावी वसूली, Land-Value Capture, Premium FSI, Betterment Levy और Transferable Development Rights, नियमितीकरण शुल्क, पारदर्शी परिसंपत्ति मुद्रीकरण तथा पार्किंग एवं विज्ञापन राजस्व बढ़ाने का सुझाव दिया।

उन्होंने म्युनिसिपल एवं ग्रीन बॉन्ड, मीटर आधारित जल-सीवर शुल्क, रूफटॉप सोलर, 15 मेगावाट शिवरी Waste-to-Energy परियोजना और पूर्ण डिजिटलीकरण से राजस्व रिसाव रोकने पर भी बल दिया। उन्होंने कहा, “शहरी विस्तार से आर्थिक लाभ अर्जित करने वालों को उस विकास को संभव बनाने वाली आधारभूत संरचना की लागत में भी न्यायसंगत योगदान देना चाहिए।”

डॉ. राजेश्वर सिंह ने ‘ग्रीन लखनऊ मिशन–2035’ प्रारंभ करने का भी प्रस्ताव रखा। वर्ष 2001 से 2021 के बीच लखनऊ का वनस्पति आवरण 71.55% से घटकर 45.33% रह गया और 52% से अधिक जल निकाय समाप्त हो गए। मिशन के अंतर्गत मापनीय हरित लक्ष्य, जलाशयों एवं आर्द्रभूमियों की बहाली, गोमती पारिस्थितिकी का संरक्षण, प्रमुख सड़कों, मेट्रो और आउटर रिंग रोड के किनारे ग्रीन कॉरिडोर, अनिवार्य वर्षाजल संचयन, भूजल पुनर्भरण, Heat-Resilient Planning तथा वार्षिक GIS एवं सैटेलाइट ऑडिट का प्रावधान किया जाना चाहिए।

डॉ. सिंह ने कहा कि लखनऊ को केवल आज की समस्याओं का समाधान नहीं, बल्कि आने वाले 25 वर्षों के लिए वैज्ञानिक, हरित, वित्तीय रूप से सशक्त और जवाबदेह विकास व्यवस्था चाहिए।

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