लखनऊ पीएम मोदी के हनुमान चिराग पासवान की एंट्री से यूपी में बढ़ने वाली है अखिलेश यादव समेत भाजपा के इन सहयोगियों की टेंशन

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यूपी लाइव न्यूज 24 उत्तर प्रदेश

संस्थापक संपादक प्रवीण सैनी लखनऊ

लोजपा अध्यक्ष चिराग पासवान ने पार्टी को विस्तार देने के लिए अब यूपी का रुख किया है

लखनऊ उत्तर प्रदेश की सियासत में आने वाले दिनों में समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव,बहुजन समाज पार्टी के नेशनल कोऑर्डिनेटर आकाश आनद और युवा दलित नेता के तौर पर उभरे नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।यूपी की सियासत में अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हनुमान‌ कहे जाने वाले चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी भी पूरी धमक के साथ एंट्री करने की तैयारी कर रही है।लोजपा मुखिया केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान इसी क्रम में यूपी में प्रभारी नियुक्त किए हैं,जो यूपी में पार्टी के लिए जमीन को मजबूत करेंगे।

चिराग पासवान ने लोजपा सांसद अरुण भारती को झारखंड और यूपी का प्रभारी बनाया है।सांसद शांभवी चौधरी को यूपी का सह प्रभारी नियुक्त बनाया गया है।लोजपा की नजर अब यूपी पर भी टिक गई है।चिराग पासवान पार्टी को बिहार को छोड़कर अन्य राज्यों में भी विस्तार देना चाहते हैं।अरुण भारती को यूपी का प्रभारी बनाए जाने को इसी से जोड़कर देखा जा रहा है।

लोजपा ने एक्स पर इसकी जानकारी दी है,जिसमें लिखा है कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सह केंद्रीय मंत्री आदरणीय श्री चिराग़ पासवान के निर्देशानुसार जमुई लोकसभा क्षेत्र से माननीय सांसद श्री अरुण भारती को झारखंड एवं उत्तर प्रदेश का प्रभारी नियुक्त किया गया है।खगड़िया लोकसभा क्षेत्र से माननीय सांसद श्री राजेश वर्मा एवं राष्ट्रीय सचिव श्री अरविंद सिंह जी को झारखंड का सह प्रभारी एवं समस्तीपुर लोकसभा क्षेत्र से माननीय सांसद शांभवी चौधरी को उत्तर प्रदेश का सह प्रभारी नियुक्त किया गया है।

यूपी में लोजपा की एंट्री से सपा मुखिया अखिलेश यादव के पीडीए को झटका लग सकता है,क्योंकि अखिलेश यादव के पीडीए में पिछड़ा,दलित और अल्पसंख्यक आते हैं।चिराग पासवान भी पिछड़ों,दलितों की राजनीति करते हैं।आकाश आनद,चंद्रशेखर आजाद,ओम प्रकाश राजभर की सुभासपा और संजय निषाद की निषाद पार्टी के लिए चिराग पासवान खतरा बन सकते हैं।लोजपा की यूपी की सियासत में एंट्री से पिछड़ों और दलितों की राजनीति करने वाले सभी दलों को नुकसान होगा।लोजपा अगर यूपी में अपनी सियासी फसल उगाने के लिए काम करती है तो इससे इन दलों को नुक़सान होना तय है।

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