सुप्रीम कोर्ट द्वारा उत्तर प्रदेश पावर कार्पोरेशन से निष्कासित कर्मचारियों को छह साल बाद मिला न्याय

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यूपी लाइव न्यूज 24 उत्तर प्रदेश

संस्थापक संपादक प्रवीण सैनी

याचिकाकर्ता के वकील श्री कृष्णा एम सिंह ने बताया कि माननीय सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड ने उन आवेदकों की सेवाएं समाप्त करके “बड़ी गलती” की, जो उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड में तकनीकी ग्रेड-II (इलेक्ट्रिकल) के रिक्त पद को भरने के लिए जारी किए गए 6 सितंबर 2014 के विज्ञापन में आवश्यक रूप से इंटरव्यू के समय विधिवत चयनित थे और उनके पास कंप्यूटर साक्षरता का सर्टिफिकेट था एवं लगभग तीन साल विभाग की सेवा भी कर चुके थेl
जस्टिस बी.आर. गवई और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की खंडपीठ वर्तमान अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (प्रतिवादी) में तकनीकी ग्रेड-II (इलेक्ट्रिकल) के पद पर आवेदकों की पुनर्नियुक्ति के लिए निर्देश देने की प्रार्थना की गई। इसने पाया कि प्रतिवादी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के एकल जज के फैसले की गलत व्याख्या की थी, जिसने प्रतिवादी को चयन सूची को फिर से तैयार करने का निर्देश दिया, जिसमें केवल उन्हीं उम्मीदवारों को शामिल करने का निर्देश दिया गया, जो इंटरव्यू के समय प्रमाण पत्र लेकर आए थे।
अनुच्छेद 142 के तहत पूर्ण न्याय की असाधारण शक्तियों का प्रयोग करते हुए न्यायालय ने निर्देश दिया कि जिन उम्मीदवारों के पास इंटव्यू के समय CCC सर्टिफिकेट था/प्रस्तुत किया और जो मूल चयन सूची का हिस्सा थे, उन्हें बहाल किया जाए। न्यायालय ने कहा कि उन्हें मूल चयन सूची के अनुसार उनकी स्थिति के अनुसार वरिष्ठता सूची में स्थान पाने का हकदार होना चाहिए।
याचिकाकर्ताओं में मुख्य रूप से मुकेश कुशवाहा,रवि कुमार शर्मा,दीपक शर्मा, देवेन्द्र प्रजापति,शशिकांत शर्मा, अनूप ने न्यायालय का आभार जताया

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