ब्राम्ह अनुभूति अखबार यूपी लाइव न्यूज 24 उत्तर प्रदेश
लखनऊ, संवाददाता
राजधानी लखनऊ में एक आवासीय भूमि को पहले तो कृषि भूमि में रजिस्ट्री कराई गई फिर दाखिल खारिज के लिए सदर तहसील नायब तहसीलदार के कोर्ट में पेश कर दिया गया। आपत्तिकर्ता ने आरोप लगाया तो नायब तहसीलदार अपनी मनमानी करने से पीछे नहीं हुए।
लखनऊ के खरगापुर स्थित एक जमीन को पहले तो कृषि दिखाकर रजिस्ट्री की गई फिर उसका दाखिल खारिज होने के लिए सदर तहसील में नायब तहसीलदार के कोर्ट में फाइल पहुंच गई। हालांकि सहायक स्टांप आयुक्त के यहां से रिकवरी की नोटिस भी जारी हो चुकी है पर संबंधित मामले में नायब तहसीलदार और यहां तक एसडीएम आपत्तिकर्ता की शिकायत और नोटिस को नहीं मानते। उनके मुताबिक क्रेता व विक्रेता सहमत हैं बाकी संबंधित भूमि चाहे जैसी हो उससे फर्क नहीं पड़ता। हालांकि इस मामले में लेखपाल ने भी गौर फ़रमाया होगा, पर उच्च अधिकारियों के नेतृत्व में चल रहे लेखपाल और कानूनगो अपना मुंह खोलने के बजाय बाहर से दिए गए चंद पैसों से अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
हालांकि दाखिल खारिज होने का आदेश नायब तहसीलदार द्वारा दिया जा चुका है और आपत्तिकर्ता के द्वारा कई बार शिकायत करने पर भी उल्टा एसडीएम द्वारा आपत्तिकर्ता को ही समझा दिया गया कि कृपया सरकारी काम में बाधा न डालें।