ब्राम्ह अनुभूति अखबार यूपी लाइव न्यूज 24 उत्तर प्रदेश
उप संपादक संजय मिश्रा
जोधपुर: केंद्र सरकार ने पाकिस्तान के साथ सिंधु नदी समझौता स्थगित कर दिया. यही हालात रहे तो समझौता खत्म भी हो सकता है. ऐसे में सिंधु व अन्य नदियों के पानी का मरु प्रदेश में उपयोग की परिकल्पना होने लगी है. खासकर पश्चिमी राजस्थान, जहां खेती के लिए पानी की कमी व जलस्तर लगातार नीचे जा रहा है. इस इलाके में पूर्वी राजस्थान के लिए बनाई पीकेसी-ईआरसीपी की तर्ज पर ही पश्चिमी राजस्थान केनाल प्रोजेक्ट की चर्चा है. विधानसभा में इसकी मांग हुई. सरकार ने डीपीआर बनाने की बात कही. इस बीच ओसियां विधायक भैराराम सियोल ने सिंधु समेत अन्य नदियों के पाक जाने वाले पानी को रोकने व इसका उपयोग पश्चिमी राजस्थान और डब्ल्यूसीआरपी प्रोजेक्ट स्वीकृत करने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी को मांग पत्र भेजा. इसमें साठ विधायक, सांसद और मंत्रियों के हस्ताक्षर करवाए गए हैं.
विधायक भैराराम सियोल का कहना है कि पश्चिमी राजस्थान में बड़े भूभाग पर सिर्फ बारिश के पानी पर खेती निर्भर है. इंदिरा गांधी नहर से थोड़ा पानी मिल रहा है, लेकिन ज्यादातर पेयजल में उपयोग हो रहा है. ऐसे में यहां डब्ल्यूसीआरपी की परिकल्पना साकार हो सकती है. इसके लिए सिंधु सहित अन्य नदियां व घग्गर जैसी बरसाती नदी, जिसका पानी पाक जाता है, उसका उपयोग राजस्थान पहुंचाकर इस केनाल प्रोजेक्ट को साकार किया जा सकता है. इससे पूरा पश्चिमी राजस्थान धान का कटोरा बन जाएगा.
यूं पहुंच सकता डब्ल्यूसीआरपी तक पानी: पश्चिमी राजस्थान के जिलों में सिंचाई के लिए खेत तक नहरी पानी पहुंचाने वाली उत्तर भारतीय नदियां सिंधु, झेलम, चिनाब, रावी, व्यास और सतलुज का पानी पाकिस्तान तक जाता है. घग्गर व यमुना में अत्यधिक वर्षा जल प्रवाह एवं तूफान के कारण स्थानीय पंजाब व हरियाणा आदि में भारी नुकसान पहुंचाती है. उत्तरी भारतीय नदियों में सतलुज, घग्गर व यमुना के अतिरिक्त पानी को डायवर्ट करते पश्चिमी राजस्थान में सिंचाई के लिए काम ला सकते हैं. इसके लिए नवीन डीपीआर से कार्ययोजना बनाकर सिंचाई परियोजना को धरातल पर उतारा जा सकता है.
ओवरफ्लो नदियों से जीवनदान: उत्तरी भारत की ओवरफ्लो नदियां घग्गर, यमुना, जोजरी, लूणी व साबरमती आदि के लिंक से मारवाड़ के किसानों को पानी मिल सकता है. इसके लिए घग्गर, यमुना, जोजरी व लूणी नदियों के संगम की परियोजना बना उसका विस्तार साबरमती लिंक नदी तक हो सकता है. इससे बरसाती व मृत प्राय लूणी, जोजरी सहित अन्य नदियों को जीवनदान मिल सकता है. पहले चरण में घग्गर नहर परियोजना से वर्षा जल को हनुमानगढ़ जिले से कच्ची नहर बनाकर तथा इंदिरा गांधी व राजीव गांधी लिफ्ट केनाल सहित अन्य के जरिए जोधपुर में जोजरी नदी से मिलाया जा सकता है.
दूसरे चरण में पूरा पश्चिमी राजस्थान : दूसरे चरण में यमुना नहर परियोजना के जरिए यमुना से हरियाणा के तेजवाला फीडर से छोड़ा वर्षा जल सोनीपत के नजदीक कच्ची नहर बनाकर मेड़ता के पास जोजरी (मीठडी) नदी में मिलाया जा सकता है. इससे हमारे पश्चिमी राजस्थान में खेती के लिए पर्याप्त नहरी पानी मिल सकेगा. इसके लिए माही को लूणी नदी से जोड़ने की डीपीआर बनाने के लिए बजट का प्रावधान करवाना है. नर्मदा नहर परियोजना का विस्तार करते इसे बाड़मेर-जैसलमेर जोधपुर तक किया जाए. इससे जोधपुर, फलोदी, बाड़मेर-जैसलमेर, बालोतरा, जालौर, सिरोही, पाली, नागौर, डीडवाना-कुचामन, बीकानेर, गंगानगर व हनुमानगढ़ जिले को लाभ होगा.