डॉ. बीएन तिवारी ने लगातार चौथी बार जीता आयरन मैन का खिताब, यूरोपियन चैंपियनशिप में

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लहराया देश का तिरंगा

ब्राम्ह अनुभूति अखबार यूपी लाइव न्यूज 24 उत्तर प्रदेश

वरिष्ठ संपादक

नई दिल्लीः कहते हैं कि हुनर छुपाए नहीं छुपता. बस जरूरत है तो निरंतर अभ्यास की. डॉ. बिश्वनाथ तिवारी (बीएन तिवारी) इसकी जीती जागती मिसाल हैं. यूरोपियन चैंपियनशिप में बीएन तिवारी ने देश का सिर गर्व से ऊंचा किया है. रेलवे के नई दिल्ली स्थित सेंट्रल हास्पिटल में कैंसर सर्जन होने के बावजूद उन्होंने जर्मनी में आयोजित आयरन मैन फ्रैंकफर्ट यूरोपीय चैंपियनशिप 2025 में आयरन मैन का खिताब जीतकर भारत का परचम फहराया. बीएन तिवारी ने चौथी बार लगातार यह खिताब जीता है।आयरन मैन प्रतियोगिता को दुनिया की सबसे कठिन प्रतिस्पर्धाओं में से एक दिवसीय एथलेटिक्स प्रतिस्पर्धा माना जाता है. इसमें प्रतियोगिता में प्रतियोगी को 3.86 किलोमीटर तैराकी, 180.2 किलोमीटर साइकिलिंग और 42 किलोमीटर की फुल मैराथन दौड़ को 15 घंटे के निर्धारित समय में पूरा करना होता है. इस बार बीएन तिवारी ने यह पूरा चैलेंज सिर्फ 14 घंटे 3 मिनट में पूरा कर लिया है.पश्चिमी यूरोप के देश जर्मनी में हुई इस चैंपियनशिप में 60 देशों के करीब 3000 एथलीटों ने भाग लिया था, जिनमें से महज 1900 एथलीट ही यह चुनौती पूरी कर पाए. भारत की ओर से कुल 9 प्रतिभागी उतरे थे, लेकिन सात प्रतिभागी ही निर्धारित समय सीमा में सफल हो पाए और बीएन तिवारी उनमें से प्रमुख रहे.

आयरन मैन बनने की यात्रा आसान नहीं: डॉ. तिवारी ने बताया कि आयरन मैन खिताब के लिए उन्होंने वर्ष 2018 से तैयारी शुरू कर दी थी. वर्ष 2019 में भारत में आयोजित दिल्ली इंटरनेशनल ट्रायथलॉन में अनऑफिशियल फुल डिस्टेंस पूरा किया. वर्ष 2020 और 2021 में कोविड संकट के कारण ऑफिशियल चैंपियनशिप नहीं हुई. वर्ष 2022 में डेनमार्क के कोपेनहेगन में उन्होंने आयरन मैन का पहला खिताब जीता था. फिर 2023 में स्वीडन के कलमार और 2024 में जर्मनी के हैम्बर्ग में लगातार आयरन मैन का खिताब जीता. इस साल 2025 में फ्रैंकफर्ट में उन्होंने चौथी बार आयरन मैन का खिताब अपने नाम किया है.
डॉ. बीएन तिवारी ने बताया कि ये प्रतियोगिता सिर्फ शारीरिक ताकत की ही नहीं, बल्कि मानसिक अनुशासन व आत्मसंयम की भी परीक्षा होती है. इसमें समुद्र में 4 किलोमीटर तक तैरने के बाद 180.4 किलोमीटर साइकिलिंग करना और फिर मैराथन दौड़ को तय समयसीमा में निपटाना होता है. तैराकी व साइकिलिंग को 10 घंटे में पूरा करना होता है. फिर दौड़ के लिए 5 घंटे मिलते हैं. कुल 15 घंटे के अंदर ही यह पूरी ट्रायथलॉन खत्म करनी होती है.
व्यस्त डॉक्टर, कठिन ट्रेनिंग, सब कुछ दिनचर्या का अनुशासन: एक कैंसर सर्जन होने के कारण डॉ. बीएन तिवारी की ड्यूटी बेहद चुनौतीपूर्ण रहती है. कई बार ऑपरेशन 7 घंटे तक चल जाते हैं. लेकिन इन व्यस्तताओं के बावजूद भी वह अपनी ट्रेनिंग में कोई समझौता नहीं करते.

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