यूपी लाइव न्यूज़ 24 उत्तर प्रदेश
सह संपादक कपिल गुप्ता
कोंच रामलीला समिति के तत्वाधान में 174वें रामलीला महोत्सव के दूसरे दिन मंगलवार की रात रामलीला रंगमंच पर राम जन्म लीला का मंचन किया गया। लीला में रावण, कुंभकर्ण और विभीषण की घोर तपस्या कर ब्रह्मा से इच्छित वरदान प्राप्त किए और इसके बाद रावण के बढ़ते अत्याचारों से आहत पृथ्वी ने श्रीहरि विष्णु से प्रार्थना की। भगवान विष्णु ने अपने अंशों सहित अयोध्या में महाराज दशरथ के यहां अवतार धारण किया।
लीला के प्रारंभ में पौलस्त्य रावण अपने अनुजों कुंभकर्ण और विभीषण के साथ भगवान ब्रह्मा की घोर तपस्या करता है। तीनों की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्मा प्रकट होते हैं और उन्हें मनवांछित वरदान प्रदान करते हैं। वरदान प्राप्त करने के बाद रावण का अत्याचार बढ़ जाता है। उसके पापाचार और अधर्म से चारों ओर त्राहि-त्राहि मच जाती है। रावण के अत्याचार से परेशान पृथ्वी गाय के रूप में बैकुंठ पहुंचकर भगवान विष्णु से रक्षा की प्रार्थना करती है। पृथ्वी की पीड़ा सुनकर भगवान विष्णु उसे रावण के अत्याचार से मुक्त कराने का आश्वासन देते हैं। इसके बाद भगवान विष्णु अयोध्या नरेश दशरथ के यहां श्रीराम के रूप में अवतार लेते हैं। उनके अंश से भरत और शत्रुघ्न का भी प्राकट्य होता है जबकि लक्ष्मण के रूप में शेषावतार प्रकट होते हैं। भगवान श्रीराम के जन्म का दृश्य मंच पर आते ही जयकारों से रामलीला परिसर गूंज उठा। कलाकारों ने अपने अभिनय से प्रसंग को प्रभावशाली बना दिया। रामलीला में मनु/दशरथ की भूमिका राघवेंद्र तिवारी चमेंड़, सतरूपा/कौशल्या विनीत मिश्रा, रावण की भूमिका पवन परिहार, कुंभकर्ण हरिश्चंद्र तिवारी, विष्णु विक्की दुबे, कैकेई प्रमोद विदुआ, सुमित्रा आकाश शांडिल्य, वशिष्ठ दुर्गेश शुक्ला, विभीषण प्रशांत चौहान, ब्रह्मा लकी दुबे, मेघनाथ की गौरी शंकर के अलावा अन्य भूमिकाओं में जवाहर अग्रवाल, नीरज अग्रवाल, अभिषेक रिछारिया, शिवकुमार गुप्ता आदि रहे