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450 छात्र-छात्राओं एवं शिक्षक-शिक्षिकाओं को ऋषि के सद्साहित्य का स्वाध्याय करने का अवसर मिलेगा
“ऋषि का सद्साहित्य नैतिक शिक्षा प्रदान करता है।” -उमानन्द शर्मा
गायत्री ज्ञान मंदिर इंदिरा नगर, लखनऊ के विचार क्रान्ति ज्ञान यज्ञ अभियान के अन्तर्गत “गोयल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एण्ड मैनेजमेंट (पालीटेकनिक), अयोध्या रोड, लखनऊ, उ०प्र०” के केन्द्रीय पुस्तकालय में गायत्री परिवार के संस्थापक युगऋषि पं० श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा रचित सम्पूर्ण 79 खण्डों का 474वाँ ऋषि वाङ्मय की स्थापना का कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। श्री सरस कुमार एवं श्रीमती संगीता श्रीवास्तव ने अपने पूज्य दादा-दादी स्व0 श्री बाबू ललित मोहन एवं स्व0 श्रीमती कमला देवी की स्मृति में ज्ञानदान के रुप में उपरोक्त पुस्तकालय में यह सम्पूर्ण युगऋषि वाङ्मय साहित्य भेंट किया साथ-साथ छात्र-छात्राओं को अखण्ड ज्योति (हिन्दी) पत्रिका भेंट की गयी।
इस अवसर पर वाङ्मय स्थापना अभियान के मुख्य संयोजक उमानंद शर्मा ने कहा कि “ऋषि का सद्साहित्य नैतिक शिक्षा प्रदान करता है।” श्री सरस कुमार, श्री वी0 के0 श्रीवास्तव एवं श्री देवेन्द्र सिंह ने भी अपने विचार व्यक्त किये। संस्थान के प्रधानाचार्य श्री जैनेन्द्र वर्मा ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
वाङ्मय साहित्य स्थापना के इस अवसर पर गोयल ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन के चेयरमैन इं0 महेश गोयल, सीईओ इं0 समर्थ गोयल, निदेशक समन्वय एवं नियोजन डा० आलोक जैन, निदेशक संस्थान डा० ऋषि अस्थाना सहित समस्त शिक्षकगण एवं लगभग 450 छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।