यूपी लाइव न्यूज 24 उत्तर प्रदेश
ब्यूरो प्रमुख दुर्गेश अवस्थी
दो युद्ध ने दुनियाभर की मौजूदा तस्वीर को बदलकर रख दिया है. रूस-यू्क्रेन और ईरान जंग ने हथियारों की रेस को बढ़ा दिया है. रूस के साथ ही अमेरिका-इजरायल ने जिस तरह से यूक्रेन और ईरान पर हमला बोला है, उससे अन्य देशों का फिक्रमंद होना स्वाभाविक है. ऐसे में दुनिया के तमाम देशों के रक्षा बजट में वृद्धि देखी जा रही है. भारत की भौगोलिक स्थिति दांतों के पाट में जीभ जैसी है. एक तरफ पाकिस्तान तो दूसरी तरफ चीन स्थित है, ऐसे में भारत के लिए टू-फ्रंट वॉर के लिए खुद को तैयार करना जरूरी हो गया है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इसकी झलक दिखी थी, जब चीन ने पाकिस्तान को अपनी सैटेलाइट से भारत के सैन्य मूवमेंट के बारे में लाइव फीड दी थी. चीन और पाकिस्तान की दोस्ती और भारत के साथ शत्रुतापूर्ण रिश्ता किसी से छुपा नहीं है. इसे देखते हुए कई तरह के सामरिक कदम उठाए जा रहे हैं. डिफेंस सेक्टर पर खास ध्यान दिया जा रहा है. इस बीच, भारत की चिंता बढ़ाने वाली रिपोर्ट सामने आई है. बताया जा रहा है कि चीन ने नया 5th जेनरेशन फाइटर जेट डेवलप किया है, जिसे एक्सपोर्ट वेरिएंट माना जा रहा है. यह एक लो कॉस्ट फाइटर एयरक्राफ्ट है. गंभीर बात यह है कि इसका पहला खरीदार पाकिस्तान हो सकता है. यदि ऐसा होता है तो पाकिस्तान और चीन दोनों के पास पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ कॉम्बैट प्लेटफॉर्म हो जाएगा, जबकि भारत के पास अभी भी 4 या फिर 4.5 जेनरेशन के फाइटर जेट हैं. पर असल सवाल यह है कि चीन का नया स्टील्थ फाइटर जेट कितना ताकतवर है? क्या वह S-400 एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा दे सकता है?
चीन द्वारा अपने एक्सपोर्ट ओरिएंटेड पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट J-35AE की लॉन्चिंग दक्षिण एशिया की सामरिक राजनीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है. पाकिस्तान को इस विमान की संभावित आपूर्ति ने भारत की सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है, क्योंकि भारत का स्वदेशी स्टील्थ फाइटर कार्यक्रम अभी शुरुआती विकास चरण में है. ऐसे में भारतीय वायुसेना को फिलहाल S-400 जैसी एयर डिफेंस सिस्टम्स और एडवांस 4.5 पीढ़ी के लड़ाकू विमानों पर निर्भर रहना पड़ सकता है. चीन की सरकारी एविएशन कंपनी एविएशन इंडस्ट्री कॉरपोरेशन ऑफ चाइना (AVIC) के तहत शेनयांग एयरक्राफ्ट कॉरपोरेशन द्वारा विकसित J-35AE को अमेरिकी F-35 Lightning II का प्रतिद्वंद्वी माना जा रहा है. यह चीन का दूसरा पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान है. इससे पहले चीन J-20 स्टील्थ फाइटर विकसित कर चुका है, लेकिन J-35AE को खास तौर पर विदेशी ग्राहकों के लिए डिजाइन किया गया है.
तेजस और J-35AE की कीमत में कितना अंतर?
तकनीकी रूप से यह विमान अत्याधुनिक स्टील्थ डिजाइन, इंटरनल वेपन बे, एडवांस एवियोनिक्स और एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड ऐरे (AESA) रडार से लैस है. यह रडार एक साथ कई लक्ष्यों को ट्रैक करने में सक्षम बताया जा रहा है. फाइटर जेट की अधिकतम गति लगभग मैक 1.8 (2200 KMPH से ज्यादा) है और यह लंबी दूरी की PL-15 मिसाइलों को इंटरनल वेपन बे से दाग सकता है. इसके अलावा बाहरी हार्डपॉइंट्स पर भी हथियार ले जाने की क्षमता मौजूद है. इसमें आधुनिक इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल टारगेटिंग सिस्टम भी लगाया गया है, जिससे कम रडार पहचान बनाए रखते हुए दुश्मन की निगरानी और हमला संभव हो सके. ‘इंडियन डिफेंस न्यूज’ की रिपोर्ट के मुताबिक चीन इस विमान को ग्ग्लोबल डिफेंस मार्केट में अमेरिकी F-35 के मुकाबले कम कीमत वाले विकल्प के रूप में पेश कर रहा है. इसकी अनुमानित कीमत 3.5 करोड़ डॉलर से 8 करोड़ डॉलर (754 करोड़ रुपया) प्रति यूनिट के बीच बताई जा रही है. दिलचस्प है कि तेजस MK-1A की कीमत 600 से 640 करोड़ प्रति यूनिट बताई जाती है. पाकिस्तान को इसका पहला विदेशी ग्राहक माना जा रहा है. कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि पाकिस्तानी पायलटों का प्रशिक्षण चीन में शुरू भी हो चुका है.
पाकिस्तान की प्लानिंग
सूत्रों के अनुसार इस्लामाबाद करीब 40 J-35AE विमानों की खरीद पर विचार कर रहा है. हालांकि, पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने इन खबरों को मीडिया अटकल करार दिया है, लेकिन चीन-पाकिस्तान रक्षा सहयोग की दिशा को देखते हुए इस सौदे की संभावना मजबूत मानी जा रही है. माना जा रहा है कि पाकिस्तान केवल फाइटर जेट ही नहीं, बल्कि KJ-500 एयरबोर्न अर्ली वार्निंग सिस्टम और HQ-19 मिसाइल डिफेंस सिस्टम भी हासिल कर सकता है, जिससे उसे इंटीग्रेटेड नेटवर्क आधारित युद्ध क्षमता मिल जाएगी. एक्सपर्ट के अनुसार, यदि पाकिस्तान J-35AE को अपनी वायुसेना में शामिल करता है तो यह उसकी हवाई शक्ति में बड़ा बदलाव होगा. पाकिस्तान की मौजूदा वायुसेना अभी F-16 और मिराज जैसे पुराने प्लेटफॉर्म पर काफी हद तक निर्भर है. स्टील्थ फाइटर के आने से उसे कम रडार पहचान, लंबी दूरी से हमला करने और नेटवर्क सेंट्रिक युद्ध क्षमता जैसी आधुनिक ताकत मिलेगी. हालांकि, पांचवीं पीढ़ी के विमानों का ऑपरेशन बेहद महंगा और तकनीकी रूप से जटिल होता है. पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति को देखते हुए पुराने विमानों को हटाने और नए सिस्टम को लंबे समय तक बनाए रखने में चुनौतियां सामने आ सकती हैं.
भारत के लिए इतना अहम क्यों?
भारत के लिए यह घटनाक्रम रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. भारतीय वायुसेना के पास फिलहाल कोई पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर नहीं है. भारत के पास राफेल और Su-30MKI जैसे अत्याधुनिक 4.5 पीढ़ी के लड़ाकू विमान जरूर हैं, लेकिन इनमें पूर्ण स्टील्थ क्षमता नहीं है. भारत का स्वदेशी एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) कार्यक्रम अभी विकास चरण में है और इसके अगले दशक से पहले सेवा में आने की संभावना कम है. रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि इससे भारत के सामने टू-फ्रंट स्टील्थ चैलेंज पैदा हो सकता है, क्योंकि चीन और पाकिस्तान दोनों के पास स्टील्थ प्लेटफॉर्म होंगे. ऐसी स्थिति में पाकिस्तान फर्स्ट-लुक, फर्स्ट-शॉट रणनीति के तहत भारतीय एयरबोर्न वार्निंग सिस्टम और एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग विमान जैसे अहम संसाधनों को निशाना बना सकता है.
S-400 से बचना मुश्किल
चीन द्वारा J-35AE की डिलीवरी को तेज करने की खबरें भी भारत की चिंता बढ़ा रही हैं. रिपोर्टों के अनुसार बीजिंग 2026 के मध्य तक पाकिस्तान को शुरुआती डिलीवरी देने की तैयारी में है. इसे दक्षिण एशिया में हवाई शक्ति संतुलन में सबसे बड़ा बदलाव माना जा रहा है, खासकर भारत द्वारा राफेल शामिल किए जाने के बाद. एक्सपर्ट का कहना है कि भारत को अब अपने स्टील्थ फाइटर कार्यक्रम को तेज करने, एयर डिफेंस नेटवर्क को मजबूत बनाने और भविष्य की वायु युद्ध रणनीति को नए सिरे से तैयार करने की जरूरत होगी. S-400 जैसी प्रणालियां स्टील्थ लक्ष्यों की पहचान और ट्रैकिंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं, लेकिन दीर्घकालिक समाधान स्वदेशी तकनीकी क्षमता और आधुनिक लड़ाकू विमानों के तेजी से विकास में ही निहित है. बता दें S-400 पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट को ट्रैक और इंटरसेप्ट करने में सक्षम है.ईरान ने अमेरिकी नेवी के तीन जहाजों पर किया अटैक, भाग खड़ी हुई ट्रंप की सेना
तेहरान: अमेरिका और ईरान में एक बार फिर जंग की शुरुआत होती दिख रही है. गुरुवार को अमेरिका और ईरान दोनों ने एक दूसरे पर अचानक मिसाइल और ड्रोन से हमला कर दिया. ईरान ने अमेरिका के तीन जहाजों पर जोरदार हमला किया. यह हमला करके ईरान ने अमेरिका को दूसरे विश्वयुद्ध में US के पर्ल हार्बर पर हुए अटैक की याद दिला दी. अमेरिकी नेवी के जहाजों को ईरान ने होर्मुज में फंसा लिया था, जिस कारण हमला होते ही उसे दुम दबाकर भागना पड़ा. बाद में अमेरिका ने भी हमला किया. हालांकि घंटों चली इस झड़प के बाद दोनों देशों ने तनाव कम करने की बात कही और हालात सामान्य होने का दावा किया.
यह पूरा मामला ईरान के एक आरोप से शुरू हुआ. ईरान की टॉप जॉइंट मिलिट्री कमांड ने कहा कि अमेरिका ने सीजफायर का उल्लंघन करते हुए होर्मुज स्ट्रेट में दो जहाजों को निशाना बनाया. ईरान के मुताबिक, इन हमलों के जवाब में उसकी सेना ने होर्मुज के पूर्व और चाबहार पोर्ट के दक्षिण में मौजूद अमेरिकी नौसैनिक जहाजों पर हमला किया. ईरान के खतम अल-अनबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर के प्रवक्ता ने दावा किया कि इस जवाबी हमले में अमेरिकी सेना को ‘काफी नुकसान’ हुआ. हालांकि अमेरिका ने किसी भी नुकसान से इनकार किया. उसने इस अटैक के बदले में ईरानी बंदरगाहों पर हमले का दावा किया है. ईरान ने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिका ने केश्म द्वीप और बंदर खमीर व सीरिक जैसे तटीय इलाकों में नागरिक क्षेत्रों पर एयरस्ट्राइक की.
अमेरिका ने हमले पर क्या कहा?
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा कि ईरान ने तीन अमेरिकी नेवी डिस्ट्रॉयर USS ट्रक्सटन, USS राफेल पेराल्टा और USS मेसन को निशाना बनाते हुए मिसाइल, ड्रोन और समुद्री बोट्स से हमला किया. लेकिन इन हमलों को नाकाम कर दिया गया. CENTCOM के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने जवाबी कार्रवाई में ईरान के उन ठिकानों को निशाना बनाया, जहां से ये हमले किए जा रहे थे, जिनमें मिसाइल और ड्रोन लॉन्च साइट्स शामिल थे. CENTCOM ने अपने बयान में कहा कि अमेरिका तनाव बढ़ाना नहीं चाहता, लेकिन अपनी सेना की सुरक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है. वहीं ईरान ने भी साफ चेतावनी दी कि अगर उस पर हमला हुआ तो वह ‘बिना किसी हिचकिचाहट के कड़ा जवाब’ देगा.
डोनाल्ड ट्रंप ने हमले पर क्या कहा?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक पोस्ट में कहा कि ईरान की ओर से घातक हमले के बाद भी तीनों जहाज सुरक्षित होर्मुज से निकल आए हैं. उन्होंने कहा कि तीन अमेरिकी डिस्ट्रॉयर होर्मुज से गुजरते समय हमले की चपेट में आए, लेकिन उन्हें कोई नुकसान नहीं हुआ. ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी सेना ने ईरानी हमलावरों को पूरी तरह नष्ट कर दिया.
डोनाल्ड ट्रंप ने इस झड़प के बाद ईरान को चेतावनी भी दी है कि अगर ईरान ने जल्द समझौता नहीं किया तो अमेरिका और ज्यादा ‘कड़ा और हिंसक’ जवाब देगा.
ट्रंप ने इस पूरे घटनाक्रम को कम करके दिखाने की कोशिश भी की. उन्होंने ABC न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में कहा, ‘यह सिर्फ एक छोटा सा झटका है’ और जोर दिया कि सीजफायर अभी भी लागू है. ट्रंप ने ईरानी बंदरगाहों पर हमले को ‘लव टैप’ नाम दिया.
ईरान ने शांति का किया दावा
ईरान के सरकारी मीडिया ने बाद में रिपोर्ट दी कि कुछ घंटों की गोलीबारी और हमलों के बाद होर्मुज स्ट्रेट के आसपास के द्वीपों और तटीय शहरों में स्थिति अब सामान्य हो गई है. यह टकराव ऐसे समय में हुआ है जब सीजफायर पर अमेरिका, ईरान के जवाब का इंतजार कर रहा था. अमेरिका ने एक प्रस्ताव दिया है, जिसमें लड़ाई रोकने की बात है, लेकिन ईरान के परमाणु कार्यक्रम जैसे विवादित मुद्दों को फिलहाल अलग रखा गया है. इस प्रस्ताव में तीन चरणों में समाधान की बात कही गई है, जिसमें युद्ध का औपचारिक अंत, होर्मुज संकट का हल और 30 दिनों के भीतर व्यापक समझौते पर बातचीत शामिल है.