यूपी लाइव न्यूज़ 24 उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने आज महर्षि यूनिवर्सिटी, लखनऊ के सातवें दीक्षोत्सव को संबोधित किया। उन्होंने उपाधि एवं पुरस्कार प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों को शुभकामनाएँ देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। राज्यपाल जी ने विद्यार्थियों को शोध एवं नवाचार के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि वे सही दिशा में कार्य करें, निरंतर सीखें और अपने ज्ञान एवं कौशल को विकसित करते हुए आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को अपनी क्षमताओं पर विश्वास रखना चाहिए और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर अत्यधिक निर्भर होने के बजाय अपनी बुद्धिमत्ता, विवेक और रचनात्मकता का उपयोग करना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से यह संकल्प लेने का आह्वान किया कि वे अपने ज्ञान का उपयोग किसी को भ्रमित करने के लिए नहीं, बल्कि समाज और देश के हित में करेंगे। सकारात्मक सोच के साथ परिवार, समाज और राष्ट्र के कल्याण के लिए कार्य करना ही सच्ची शिक्षा का उद्देश्य है।
राज्यपाल जी ने माता-पिता के सम्मान एवं सेवा को शिक्षा का महत्वपूर्ण संस्कार बताते हुए कहा कि माता-पिता अपने बच्चों के पालन-पोषण, शिक्षा और स्वास्थ्य पर अपना सर्वस्व समर्पित कर देते हैं। इसके बावजूद कई बार वृद्धावस्था में उन्हें आश्रमों में रहने के लिए विवश होना पड़ता है। उन्होंने कहा कि बच्चों का दायित्व है कि वे अपने माता-पिता का सम्मान करें, उनकी सेवा करें और उनके प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वहन करें। परिवार के सभी सदस्यों को आपसी सम्मान और सहयोग के साथ रहना चाहिए। अपने पूर्व अनुभवों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि जब वे महिला एवं बाल कल्याण मंत्री के रूप में कार्य कर रही थीं तब विधवा महिलाओं को आर्थिक सहायता देने तथा महिलाओं को संपत्ति के स्वामित्व और आवास संबंधी योजनाओं के माध्यम से सशक्त बनाने के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। इन पहलों से महिलाओं को आत्मबल और आत्मनिर्भरता प्राप्त करने में सहायता मिली।
राज्यपाल जी ने कहा कि भारत आज विकास के विभिन्न क्षेत्रों में निरंतर आगे बढ़ रहा है और विश्व की निगाहें भारत पर हैं। देश की प्रगति में सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के साथ-साथ नागरिकों का भी महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने भीतर निहित प्रतिभा और कौशल को पहचानने तथा उनका राष्ट्रहित में उपयोग करने का आह्वान किया। राष्ट्रीय सुरक्षा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में देश की तीनों सेनाओं की क्षमताओं को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य हुए हैं। ऑपरेशन सिंदूर ने भारत की सामरिक क्षमता और समन्वय को प्रदर्शित किया है। उन्होंने गुजरात में शिक्षा मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल का उल्लेख करते हुए बताया कि उन्हें राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय के निर्माण में सहयोग करने का अवसर मिला था। यह विश्वविद्यालय देश की सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। उन्होंने युवाओं को माननीय प्रधानमंत्री जी के आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प के संदेश से प्रेरणा लेने तथा चुनौतियों का सामना करते हुए आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। राज्यपाल जी ने कहा कि सामूहिक प्रयास, सकारात्मक सोच और दृढ़ इच्छाशक्ति से देश को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया जा सकता है।
राज्यपाल जी ने गुजरात के अपने कार्यकाल का उल्लेख करते हुए बताया कि उन्होंने निर्देश दिया था कि उनसे मिलने आने वाले लोग बुके के स्थान पर पोषण सामग्री लेकर आएँ, जिसका वितरण आंगनवाड़ी केंद्रों में किया जाता था, ताकि वहाँ पढ़ने वाले बच्चों को पोषण मिल सके। उन्होंने बताया कि जन भवन में आने वाले अतिथियों से भी गायों और बछड़ों के लिए आटा और गुड़ लाने को कहा जाता है। अतिथि अपने परिवार और बच्चों के साथ गायों को रोटी और गुड़ खिलाते हैं। इससे बच्चों में सेवा, करुणा और संस्कार की भावना विकसित होती है तथा उन्हें गाय के महत्व की जानकारी मिलती है।
राज्यपाल जी ने महर्षि यूनिवर्सिटी द्वारा जन भवन स्थित आदर्श माध्यमिक विद्यालय के विद्यार्थियों के लिए 400 टी-शर्ट उपलब्ध कराने पर आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस विद्यालय में वंचित परिवारों के बच्चे शिक्षा और संस्कार प्राप्त कर रहे हैं। विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों को विभिन्न प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है और पुरस्कार प्राप्त करने वाले बच्चों को उपहार स्वरूप शर्ट प्रदान की जाती है। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा विद्यालय के विद्यार्थियों तथा जन भवन में रहने वाली गायों और बछड़ों के लिए किए गए सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि वंचित परिवारों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना आवश्यक है और प्रत्येक बच्चे को शिक्षा का अवसर मिलना चाहिए।
राज्यपाल जी ने कहा कि प्रदेश के विश्वविद्यालय राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप विभिन्न क्षेत्रों में कार्य कर रहे हैं और प्रत्येक विश्वविद्यालय अपनी विशेषताओं के अनुसार शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के प्रयास कर रहा है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के 19 राज्य विश्वविद्यालयों ने नैक मूल्यांकन में ए-प्लस और ए-प्लस-प्लस ग्रेड प्राप्त किए हैं। इसके साथ ही विश्वविद्यालय टाइम्स हायर एजुकेशन वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग और राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क में भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। राज्यपाल जी ने कहा कि विश्वविद्यालयों में शोध एवं अनुसंधान की दिशा में भी निरंतर कार्य हो रहा है। उन्होंने शोध की गुणवत्ता बढ़ाने, नवाचार को प्रोत्साहित करने और उच्च शिक्षा को अधिक प्रभावी एवं रोजगारोन्मुख बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
राज्यपाल जी ने बताया कि प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालय पाँच-पाँच गाँव गोद लेकर वहाँ शिक्षा, स्वच्छता और पोषण से संबंधित कार्य कर रहे हैं। यह कार्यक्रम लगभग 200 गाँवों में संचालित हो रहा है, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। उन्होंने आंगनवाड़ी केंद्रों के सुदृढ़ीकरण की जानकारी देते हुए कहा कि निर्धारित 22 संसाधनों की सूची के अनुसार पिछले छह वर्षों में जनसहयोग से लगभग 75,000 आंगनवाड़ी केंद्रों को बेहतर बनाया गया है। इस कार्य पर जनसहयोग से लगभग 180 करोड़ रुपये व्यय किए गए हैं। इन केंद्रों में बच्चों को शिक्षा, संस्कार और विभिन्न गतिविधियों से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे उनकी उपस्थिति में वृद्धि हुई है।
राज्यपाल जी ने कहा कि गुजरात में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने जेंडर रेशियो में सुधार की दिशा में भी कार्य किया। उन्होंने कहा कि समाज की मानसिकता बदलने और बेटियों का सम्मान सुनिश्चित करने की आवश्यकता है। उन्होंने बाल गृहों में रह रही छोटी-छोटी बच्चियों का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा और संस्कार ग्रहण करने की उम्र में कई बार बच्चियाँ भ्रमित हो जाती हैं और उनका उत्पीड़न किया जाता है। बेटियों के साथ अन्याय करने वालों को माफ नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि अब ऐसी बच्चियों को सहयोग एवं संरक्षण प्रदान किया जा रहा है, जिससे उनमें आत्मबल विकसित हो रहा है और वे जीवन में आगे बढ़ रही हैं।
राज्यपाल जी ने बताया कि ऐसी भी बच्चियाँ हैं, जिनके माता-पिता दोनों जेल में हैं और वे बाल गृहों में अपना जीवन व्यतीत कर रही हैं। उन्होंने इस संबंध में समाज को सावधान रहने तथा बच्चों की सुरक्षा के प्रति संवेदनशील होने की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही, उन्होंने विद्यार्थियों को गलत कार्यों से दूर रहने और सही मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया।
राज्यपाल जी ने बताया कि प्रदेश के 12 जिलों में पॉक्सो अधिनियम से संबंधित मामलों के पीड़ित बच्चों को जन भवन की ओर सेे गोद लेकर शिक्षा और संस्कार से जोड़ने के लिए विभिन्न गतिविधियाँ संचालित की जा रही हैं। बच्चों को रामलला के दर्शन कराने के साथ-साथ वाटर पार्क भी ले जाया गया। उन्होंने बताया कि वे स्वयं वाटर पार्क जाकर बच्चों से मिलीं और बच्चों के चेहरों पर प्रसन्नता देखकर उन्हें बहुत खुशी हुई। जन भवन द्वारा ऐसे बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए अनेक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
राज्यपाल जी ने आगे बताया कि जनसहयोग से आदर्श माध्यमिक विद्यालय के बच्चों को यूनिफॉर्म उपलब्ध कराने के साथ-साथ योग एवं स्पोर्टस संबंधी अन्य आवश्यक सुविधाएं भी उपलब्ध करायी जा रहीं हैं तथा उनके व्यक्तित्व विकास पर भी ध्यान दिया जा रहा है। जन भवन के अधिकारियों द्वारा विद्यालय में विभिन्न शैक्षिक, सांस्कृतिक और रचनात्मक गतिविधियाँ आयोजित की जाती हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय के प्रतिनिधियों से जन भवन आकर विद्यालय की गतिविधियों को देखने का आह्वान किया। राज्यपाल जी ने महर्षि यूनिवर्सिटी में संचालित विभिन्न गतिविधियों की प्रशंसा करते हुए कहा कि शिक्षा के साथ सामाजिक सरोकारों को जोड़ने के ऐसे प्रयास सराहनीय हैं।
राज्यपाल जी ने महर्षि यूनिवर्सिटी में आयोजित विद्यार्थी परियोजना प्रदर्शनी का अवलोकन किया तथा विद्यार्थियों द्वारा विकसित विभिन्न तकनीकी एवं नवाचार-आधारित परियोजनाओं की सराहना की। प्रदर्शनी में विद्यार्थियों ने इंजीनियरिंग, हार्डवेयर, डिजिटल संचार, मीडिया, एनिमेशन, वैदिक विज्ञान, साइंस ऑफ कॉन्शसनेस (चेतना का विज्ञान), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तथा उद्यमिता से संबंधित परियोजनाएँ प्रस्तुत कीं। इनमें विश्वविद्यालय के कर्मचारियों के लिए विकसित सुरक्षित आंतरिक संचार मंच ‘महर्षि कनेक्ट’, सुरक्षा संबंधी परियोजना ‘सुरक्षा नेर’, विद्यार्थियों, शैक्षणिक संस्थानों एवं कंपनियों के बीच समन्वय स्थापित कर औद्योगिक भ्रमण को सुगम बनाने वाला डिजिटल मंच ‘विजिटब्रिज’ तथा विभिन्न जानकारियों को प्रदर्शित कर उन्हें विस्तार से समझाने के उद्देश्य से विकसित शैक्षिक रोबोट ‘ऋषि’ प्रमुख रहे। इसके अतिरिक्त, महर्षि इनक्यूबेशन एंड इनोवेशन फाउंडेशन के अंतर्गत नवाचार, स्टार्टअप एवं उद्यमिता से संबंधित परियोजनाएँ, भारतीय ज्ञान परंपरा एवं वैदिक विज्ञान से जुड़ी शैक्षणिक गतिविधियाँ तथा एनिमेशन, डिजिटल डिजाइन, दृश्य संचार और मल्टीमीडिया से संबंधित रचनात्मक परियोजनाएँ भी प्रदर्शित की गईं। राज्यपाल जी ने विद्यार्थियों से उनकी परियोजनाओं के उद्देश्य, कार्यप्रणाली और व्यावहारिक उपयोगिता के संबंध में जानकारी प्राप्त की तथा उनके विकास, सुधार और भविष्य में उपयोग की संभावनाओं को लेकर आवश्यक सुझाव एवं मार्गदर्शन प्रदान किया। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने नवाचारों को समाजोपयोगी बनाने तथा शोध एवं उद्यमिता के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
राज्यपाल जी ने विश्वविद्यालय में संचालित विभिन्न शैक्षणिक, रचनात्मक एवं नवाचार संबंधी गतिविधियों की प्रशंसा करते हुए शोध कार्यों को और अधिक बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित न रहकर शोध, नवाचार और व्यावहारिक प्रयोगों पर विशेष ध्यान देना चाहिए। विश्वविद्यालय में विद्यार्थी विभिन्न विषयों पर जो शोध कर रहे हैं, उनका लाभ समाज और देश को मिलना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने ज्ञान एवं कौशल का उपयोग जनहित में करते हुए ऐसे शोध करने के लिए प्रेरित किया, जो देश की आवश्यकताओं के अनुरूप हों तथा विकास की नई संभावनाएँ उत्पन्न करें।
राज्यपाल जी ने कहा कि सरकार शोध के क्षेत्र में निरंतर कार्य कर रही है। विद्यार्थियों को इन शोध कार्यों का सही उपयोग करते हुए आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि बिजली गिरने से होने वाली मौतों को रोकने, सुनामी एवं भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं तथा अंतरिक्ष के क्षेत्र में शोध कार्य किए जा रहे हैं। आने वाला समय अंतरिक्ष का है और सभी देश अंतरिक्ष के क्षेत्र में अपनी जगह बनाने के लिए प्रयासरत हैं।
राज्यपाल जी ने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में देश निरंतर सशक्त हो रहा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की जिम्मेदारी युवाओं पर है। विद्यार्थियों के पास ज्ञान, कौशल और मेहनत करने की क्षमता है तथा सरकार उन्हें आवश्यक संसाधन उपलब्ध करा रही है। उन्होंने युवाओं से देश के विकास के लिए कार्य करने तथा वंचित वर्ग के बच्चों के उत्थान के लिए योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सभी को साथ लेकर चलने और वंचित वर्ग को आत्मनिर्भर बनाने का संकल्प होना चाहिए।