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संस्थापक संपादक प्रवीण सैनी
लखनऊ।चंडीगढ़ में केन्द्र सरकार के साथ एसकेएम (एनपी) व केएमएम के नेताओं की सातवें दौर की वार्ता के बाद पंजाब सरकार द्वारा सभी शीर्ष नेताओं की गिरफ्तारी और फिर शंभू-खनौरी बार्डर पर पिछले एक साल से धरने पर बैठे किसानों को जबरन हटाने की कार्यवाही की अखिल भारतीय क्रांतिकारी किसान सभा कड़ी निन्दा करती है।
अखिल भारतीय क्रांतिकारी किसान सभा एआईकेकेएस के केन्द्रीय समन्वय समिति सदस्य एवं उत्तर प्रदेश राज्य प्रभारी श्री कन्हैया शाही ने कहा कि इस कार्यवाही से स्पष्ट है कि मोदी-शाह कीनेतृत्व वाली केन्द्र सरकार साम्राज्यवादी अमेरिका के साथ खुले व्यापार समझौते के तहत खेती को कारपोरेट शक्तियों को सौंपने के काम में और तेजी से आगे बढ़ रही है। स्पष्ट हो गया कि पंजाब की आप सरकार अब खुलेआम किसान विरोधी फासीवादी मोदी सरकार के साथ है।
उन्होंने कहा कि सरकार को किसानों के लिए दिल्ली जाने के लिए रास्ता देकर बंद हाइवे खोलने चाहिए थे, न कि किसानों के खिलाफ हिंसा और बुल्डोजर का प्रयोग करना था। दिल्ली आंदोलन स्थगित करते समय किसानों की मांगों पर केन्द्र सरकार के लिखित वादे के बाद से देशभर में किसान आंदोलन कर रहे हैं। एमएसपी की कानूनी गारंटी, कृषि विपणन पर जारी नई राष्ट्रीय नीति की वापसी, संपूर्ण कर्जा माफी आदि सभी किसानों की जायज मांगें हैं, जिनके लिए किसान सड़कों पर आंदोलन कर रहे हैं। जब तक ये मांगें पूरी नहीं होती देशभर में किसान सड़कों पर आंदोलन जारी रखेगा।
अखिल भारतीय क्रांतिकारी किसान सभा (एआईकेकेएस)पंजाब सरकार से मांग करती है कि गिरफ्तार किसान नेताओं को तत्काल रिहा किया जाए और किसानों की जायज मांगों के लिए आंदोलन करने का संवैधानिक अधिकार दिया जाए। एआईकेकेएस सभी किसानों, मेहनतकश कर्मचारियों -मजदूरो, छोटे दुकानदारों -व्यापारियों, छात्रों-नौजवानों से देश की खेती-किसानी और आजीविका बचाने के लिए संयुक्त संघर्ष में शामिल होने की अपील करती