अधजली खोपड़ी और कड़े के क्लू से पर्दाफाश, नंगाकर उलटे लटकाकर पीटा था दम भर

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यूपी लाइव न्यूज 24 उत्तर प्रदेश

ब्यूरो चीफ हेमराज मौर्या

बैतूल: जंगल में मिली एक जली खोपड़ी का मामला बैतूल पुलिस ने सुलझा दिया है. इस खोपड़ी के राज का पर्दाफाश करने में पुलिस को भले ही 4 महीने लग गए लेकिन मेहनत रंग लाई. क्लू मिलता गया और एक के बाद एक लगातार 7 आरोपी पुलिस की गिरफ्त में आ गए. रिमांड के बाद पुलिस पूछताछ में और भी कई खुलासे होने की उम्मीद है.
बता दें कि अर्जुनगोंदी के जंगल में दिसंबर 2024 में अज्ञात शख्स की जली खोपड़ी, पैर की हड्डी और शरीर के कुछ अवशेष सहित स्टील का कड़ा मिला था. इस मामले में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने 29 मार्च 2025 को 7 लोगों को गिरफ्तार किया है. आरोपियों ने पूछताछ के दौरान अपराध करना कबूल कर लिया है. मुख्य आरोपी ने बताया कि मारपीट का बदला देने के लिए युवक की हत्या कर शव को जला दिया था. फिलहाल, पुलिस आरोपियों को न्यायालय में पेश कर रिमांड पर लेगी. जिसके बाद पूरे मामले में और भी खुलासे हो सकते हैं.
एसपी निश्चल झारिया ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस घटना की पूरी जानकारी दी. उन्होंने बताया कि “10 दिसंबर 2024 को वन विभाग द्वारा थाना शाहपुर को सूचना दी गई कि अर्जुनगोंदी जंगल में जठानदेव मंदिर के पास एक नाले के ऊपर एक जली हुई मानव खोपड़ी पड़ी है. सूचना पर पुलिस टीम तत्काल घटनास्थल पर पहुंची और क्षेत्र को सुरक्षित किया. एसडीओपी शाहपुर मयंक तिवारी, सीन ऑफ क्राइम टीम प्रभारी निरीक्षक आबिद अंसारी और जिला वैज्ञानिक अधिकारी नर्मदापुरम ऋषिकेश यादव द्वारा थाना प्रभारी मुकेश ठाकुर की उपस्थिति में घटनास्थल का निरीक्षण किया गया.”

पुलिस ने मौके से बरामद किए अज्ञात मृतक के अवशेष

जांच के दौरान ये पाया कि अज्ञात मृतक के शव को टायर और लकड़ियों की सहायता से पूरी तरह जलाया गया था. घटनास्थल से एक जली हुई खोपड़ी, कुछ हड्डियों के अवशेष और एक स्टील का कड़ा मिला था. साक्ष्यों को वैज्ञानिक विधि से संकलित कर उनका फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी कराई गई तथा अज्ञात मृतक की पहचान के लिए मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई.

डीएनए से हुई मृतक की शिनाख्त

जांच के दौरान पता जला कि थाना कोतवाली बैतूल में 21 दिसंबर 2024 को रिंकेश चौहान निवासी कुंड बकाजन, थाना चिचोली की गुमशुदगी दर्ज की गई थी. जिसमें परिजनों ने रिंकेश की पहचान के लिए हाथ में स्टील का कड़ा पहनना बताया था. पुलिस ने मृतक के परिजन का रक्त नमूना लेकर मृतक की शिनाख्त पूर्ण किए जाने के लिए रिंकेश के परिजनों का डीएनए नमूने लेकर एफएसएल जांच के लिए भेजा. जांच रिपोर्ट में जली मिली खोपड़ी और मृतक रिंकेश चौहान के परिजनों के डीएनए का मिलान हो गया, जिससे शव की पुष्टि रिंकेश चौहान के रूप में हुई.

पुरानी रंजिश में हुई युवक की हत्या

थाना प्रभारी शाहपुर के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित कर मामले की जांच शुरू की गई. लगभग 4 महीने की गहन जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि बैतूल में करीब एक साल पहले रिंकेश ने अपने दोस्तों के साथ मिलकर आशीष परते को गोवंश मामले में पुलिस को सूचना देने पर जमकर पीटा था. जिसके बाद आशीष ने अपने दोस्तों के साथ मिलकर पिटाई का बदला लेने की योजना बनाई.

आरोपियों ने युवक को किया अगवा

30 नवंबर 2024 को रिंकेश चौहान न्यायालय पेशी के लिए बैतूल गया था. रिंकेश पेशी निपटाकर मुलताई मेला देखने गया, फिर झीटापाटी गांव में अपने दोस्त गब्बर के घर रुका. नितिन रिश्ते में आशीष परते का भतीजा लगता है. इसके बाद नितिन ने फोन से बताया कि रिंकेश झीटापाटी गांव में अपने दोस्त गब्बर के घर रुका है. इस सूचना के आधार पर मुख्य आरोपी आशीष परते ने अपने साथियों के साथ रिंकेश को अगवा कर लिया. इस दौरान आशीष के साथ नितिन, प्रदीप, मनीष, शिवा धुर्वे और मिंचू थे.
पीट-पीटकर युवक की हत्या

अगवा करने के बाद आशीष साथियों के साथ रिंकेश को पाढर में शराब की दुकान के पीछे टेकरी पर ले गए. जहां उसे दिन भर बंधक बनाकर रखा और नग्न कर बेरहमी से पीटा और जब रिंकेश की मौत हो गई, तो उसे अर्जुनगोंदी के जंगल में ले जाकर लकड़ी और टायरों पर रखकर डीजल डालकर जला दिया और सभी आरोपी मौके से फरार हो गए.

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