ब्राम्ह अनुभूति अखबार यूपी लाइव न्यूज 24 उत्तर प्रदेश
ब्यूरो चीफ हेमराज मौर्या
नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी के नेता व दिल्ली सरकार में पूर्व मंत्री सौरभ भारद्वाज ने रविवार को पार्टी मुख्यालय पर दिल्ली में नई भाजपा सरकार पर ‘फरिश्ते’ योजना को बंद करने का गंभीर आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि इस मानवीय योजना को खत्म करना न केवल निर्दयी निर्णय है, बल्कि हजारों सड़क दुर्घटना पीड़ितों के जीवन के लिए घातक साबित हो सकता है.
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि इस योजना की बदौलत 2017 से 2022 तक 10,000 से अधिक घायल लोगों की जान बचाई गई थी. उन्होंने आरोप लगाया कि पहले भाजपा के दबाव में अधिकारियों ने योजना का फंड रोकने की कोशिश की थी, फिर जब सुप्रीम कोर्ट ने मामले में दखल दिया तो उपराज्यपाल को नोटिस जारी किया गया. इसके बाद फंड जारी हुआ. अब जब दिल्ली में भाजपा की सरकार है तो उसने इस योजना को आधिकारिक रूप से बजट से बाहर कर इसे पूरी तरह समाप्त कर दिया है.
सड़क हादसों में बढ़ेगी मौतें: पूर्व स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सड़क हादसों में घायल व्यक्ति को बचाने के लिए पहला घंटा ‘गोल्डन ऑवर’ कहा जाता है, जो बेहद महत्वपूर्ण होता है. पहले लोग बिना किसी डर के घायलों को अस्पताल ले जाते थे, क्योंकि इलाज का खर्च सरकार उठाती थी. अब यह योजना बंद कर दी गई है, तो निजी अस्पताल इलाज के लिए पैसे मांगेंगे और कई मामलों में समय पर इलाज न मिलने से मौतें होंगी.
भाजपा पर तीखा हमला: सौरभ भारद्वाज ने भाजपा सरकार पर हमला बोलते हुए आगे कहा कि यह सरकार सिर्फ जनविरोधी नीतियां लागू कर रही है और मानवता से जुड़ी एक अहम योजना को खत्म कर दिया है. भाजपा सरकार बताए कि क्या सड़क पर घायल होने वाले लोगों के सीने पर यह लिखा होगा कि वे भाजपा के समर्थक हैं या किसी अन्य दल के? उन्होंने कहा कि इस योजना को खत्म करने वाले लोग राक्षसी प्रवृत्ति के हैं.
फैसले के खिलाफ सड़क पर उतरेगी आप: सौरभ भारद्वाज ने ऐलान किया कि आम आदमी पार्टी इस फैसले के खिलाफ सड़कों पर उतरेगी व कानूनी कार्रवाई भी करेगी. पार्टी इस योजना को बहाल करवाने के लिए हरसंभव प्रयास करेगी, जिससे दिल्ली की सड़कों पर दुर्घटनाग्रस्त होने वाले किसी भी व्यक्ति को जीवन बचाने का मौका मिल सके.
क्या थी ‘फरिश्ते’ योजना: दिल्ली सरकार ने 2017 में ‘फरिश्ते’ योजना की शुरुआत की थी, जिससे कोई भी व्यक्ति सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को नजदीकी निजी अस्पताल में भर्ती करा सकता था. उसका पूरा इलाज मुफ्त किया जाता था. इलाज का सारा खर्च दिल्ली सरकार द्वारा वहन किया जाता था. साथ ही घायल की मदद करने वाले व्यक्ति को ‘दिल्ली के फरिश्ते’ के रूप में सम्मानित भी किया जाता था.