यूपी लाइव न्यूज 24 उत्तर प्रदेश
सह संपादक कपिल गुप्ता
एक बार राजीव गांधी खुद अपनी कार चलाकर दिल्ली की सड़कों से गुजर रहे थे। तभी रास्ते में एक ट्रैफिक सिग्नल पर ‘लाल बत्ती’ हो गई। उनके सुरक्षा अधिकारियों ने चाहा कि वीआईपी प्रोटोकॉल का पालन करते हुए ट्रैफिक रुकवा दिया जाए ताकि प्रधानमंत्री का काफिला बिना रुके निकल सके।
जैसे ही सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें आगे बढ़ने का इशारा किया, राजीव गांधी ने तुरंत ब्रेक लगा दिए और गाड़ी रोक दी। जब अधिकारियों ने सुरक्षा का हवाला दिया, तो उन्होंने बड़ी सादगी से कहा
“अगर देश का प्रधानमंत्री ही कानून तोड़ेगा, तो हम आम जनता से अनुशासन की उम्मीद कैसे कर सकते हैं?
वे तब तक वहीं रुके रहे, जब तक सिग्नल हरा नहीं हो गया।
पद कितना भी बड़ा क्यों न हो, अनुशासन और नियम सबके लिए बराबर होते हैं। यही एक सच्चे लीडर की पहचान है।
यह सिर्फ एक किस्सा नहीं, उन लोगों के मुंह पर तमाचा है जो हाथ में पावर आते ही कानून को पैरों तले रौंद देते हैं। सादगी और कर्तव्यनिष्ठा का ऐसा उदाहरण शायद ही दोबारा देखने को मिले।
क्या आप भी मानते हैं कि आज के नेताओं को इस अनुशासन की जरूरत है?