भारत ज्ञान, विज्ञान और समृद्धि का विश्वगुरु था : विनय आर्य

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यूपी लाइव न्यूज़ 24 उत्तर प्रदेश

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पानीपत: 1 सितंबर ()
वैदिक परिवार पानीपत के तत्वावधान में आर्य कॉलेज के सभागार में छात्राओं के लिए संस्कारशाला एवं व्यक्तित्व विकास कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्राओं में भारतीय संस्कार, राष्ट्रभाव, आत्मविश्वास, व्यक्तित्व विकास, नारी सम्मान तथा सामाजिक एवं राष्ट्रीय दायित्वों के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना रहा। कार्यक्रम की अध्यक्षता हरियाणा महिला आयोग की सदस्या सुमन चौधरी ने की. कार्यक्रम को मुख्य महापौर कोमल सैनी एवं जिला शिक्षा अधिकारी राकेश बूरा ने भी सम्बोधित किया. कार्यक्रम में आर्य कॉलेज, आर्य गर्ल्स पब्लिक स्कूल, डी ए वी पब्लिक स्कूल हुडा तथा डी ए वी पुलिस पब्लिक स्कूल की छात्राओं ने भाग लिया.

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आर्य प्रतिनिधि सभा दिल्ली के महामंत्री विनय आर्य ने कहा कि भारत को विश्वगुरु केवल इसलिए नहीं कहा जाता था कि वह एक प्राचीन राष्ट्र था, बल्कि भारत ज्ञान, विज्ञान, शिक्षा, संस्कृति और समृद्धि का विश्व का प्रमुख केंद्र था। उन्होंने कहा कि हमारा देश केवल समृद्ध नहीं था, बल्कि समृद्धतम देशों में अग्रणी था और दुनिया के अनेक देशों के लोग भारत से ज्ञान-विज्ञान तथा जीवन जीने की श्रेष्ठ पद्धतियां सीखने आते थे।

विनय आर्य ने भारत को ‘सोने की चिड़िया’ कहे जाने के ऐतिहासिक संदर्भों का उल्लेख करते हुए छात्राओं को भारत की प्राचीन समृद्धि के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि भारत की संपन्नता और सांस्कृतिक वैभव के कारण विदेशी आक्रांताओं की दृष्टि भी भारत की ओर रही। उन्होंने सोमनाथ मंदिर पर हुए आक्रमणों का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत की अपार संपदा को लूटने के लिए महमूद गजनी ने बार-बार इस देश पर आक्रमण किए।

विनय आर्य ने रामायण के प्रसंगों के माध्यम से छात्राओं को त्याग, कर्तव्य, धैर्य और आज्ञापालन का महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम को जब पिता दशरथ ने वनवास का आदेश दिया तो उन्होंने बिना किसी विरोध के पिता की आज्ञा को सहर्ष स्वीकार किया और वन जाने के लिए तैयार हो गए।

उन्होंने लक्ष्मण के त्याग का उल्लेख करते हुए कहा कि लक्ष्मण भी अपने भाई श्रीराम के साथ वन चले गए और लंबे समय तक अपनी पत्नी उर्मिला से दूर रहे। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में केवल अधिकारों की बात नहीं की गई, बल्कि कर्तव्य और त्याग को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। यही कारण है कि हजारों वर्षों बाद भी भगवान श्रीराम भारतीय समाज के आदर्श बने हुए हैं।

उन्होंने छात्राओं से आह्वान किया कि वे केवल श्रीराम की पूजा ही न करें, बल्कि उनके आदर्शों, मर्यादा, कर्तव्यनिष्ठा और त्याग को अपने जीवन में उतारने का संकल्प लें.
महाभारत के प्रसंगों का उल्लेख करते हुए विनय आर्य ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने जीवन में धैर्य, नीति और संयम का परिचय दिया, लेकिन अन्याय की एक सीमा होती है। उन्होंने छात्राओं से कहा कि वर्तमान समय में केवल धैर्य रखना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर शौर्य, साहस और आत्मरक्षा की भावना भी होनी चाहिए।

उन्होंने छात्राओं का आह्वान करते हुए कहा—“अबला नहीं, सबला बनें।” बेटियों में आत्मविश्वास होना चाहिए और उन्हें किसी भी परिस्थिति का सामना साहस एवं विवेक के साथ करना चाहिए।

कार्यक्रम में हरियाणा महिला आयोग की सदस्य सुमन चौधरी ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि आज महिलाएं समाज के प्रत्येक क्षेत्र में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर कार्य कर रही हैं। सेना, विमानन, प्रशासन, शिक्षा, विज्ञान, खेल और अन्य क्षेत्रों में महिलाओं ने अपनी प्रतिभा एवं क्षमता का लोहा मनवाया है।

उन्होंने कहा कि बेटियों को स्वयं को किसी भी स्तर पर पुरुषों से कम नहीं आंकना चाहिए। उन्हें शिक्षा के साथ-साथ समाजसेवा, राष्ट्रसेवा और सामाजिक सरोकारों में भी बढ़-चढ़कर भाग लेना चाहिए।

चौधरी ने कहा कि जीवन का उद्देश्य केवल धन कमाना नहीं होना चाहिए। प्रत्येक व्यक्ति के भीतर राष्ट्र के प्रति प्रेम और जिम्मेदारी की भावना होनी चाहिए। उन्होंने छात्राओं को सचेत करते हुए कहा कि आज कुछ शक्तियां युवाओं को भ्रमित कर उन्हें राष्ट्र एवं समाज से दूर करने का प्रयास करती हैं। इसलिए युवाओं को किसी भी विचार को आंख मूंदकर स्वीकार करने के बजाय अपने विवेक से सही और गलत का निर्णय करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि व्यक्ति की उन्नति तभी सार्थक है, जब उसके साथ राष्ट्र की उन्नति भी जुड़ी हो।
पानीपत की महापौर कोमल सैनी ने छात्राओं से संवाद करते हुए कहा कि एक लड़की की सबसे अच्छी मित्र उसकी मां हो सकती है। उन्होंने छात्राओं से आह्वान किया कि वे अपनी मां के साथ मित्रवत संबंध रखें और अपने मन की बातें उनसे साझा करें।
उन्होंने कहा कि परिवार के साथ संवाद बनाए रखना जीवन में बहुत महत्वपूर्ण है। माता-पिता के अनुभव और मार्गदर्शन से बच्चे अनेक कठिनाइयों से बच सकते हैं। उन्होंने छात्राओं को मोबाइल फोन के बढ़ते उपयोग के प्रति सावधान करते हुए कहा कि मोबाइल आज के समय में आवश्यक साधन है, लेकिन उसका सदुपयोग किया जाए, दुरुपयोग नहीं।
उन्होंने छात्राओं से कहा कि मोबाइल पर अनावश्यक समय व्यतीत करने के बजाय परिवार, पढ़ाई, खेल, रचनात्मक गतिविधियों और सामाजिक कार्यों को समय देना चाहिए.
पानीपत के जिला शिक्षा अधिकारी श्री राकेश बूरा ने कहा कि वैदिक परिवार द्वारा आयोजित यह संस्कारशाला छात्राओं के लिए निश्चित रूप से उपयोगी एवं प्रेरणादायक है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनमें संस्कार, नैतिक मूल्य, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करना भी आवश्यक है.

कार्यक्रम का मंच संचालन करते हुए प्रवक्ता मोनिका आर्य ने भारतीय संस्कृति में नारी के सम्मान के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने मनुस्मृति के प्रसिद्ध वचन “यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः” का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी को सदैव सम्मान और गरिमा का स्थान दिया गया है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में मनुस्मृति को कई बार तोड़-मरोड़कर समाज के सामने प्रस्तुत किया जाता है। आवश्यकता इस बात की है कि किसी के द्वारा कही गई बातों के आधार पर धारणा बनाने के बजाय मूल ग्रंथों का स्वयं अध्ययन किया जाए और तथ्यों को समझा जाए।
धन्यवाद प्रस्ताव वैदिक परिवार के सचिव डॉ. राजबीर आर्य ने प्रस्तुत किया.

कार्यक्रम में मुख्य रूप से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत गोरक्षा प्रमुख महेंद्र कंसल,आर्य गर्ल्स पब्लिक स्कूल के प्रबंधक अरुण आर्य, आर्य कॉलेज की उप-प्राचार्या अनुराधा सिंह, डीएवी पुलिस पब्लिक स्कूल की प्राचार्या सुमिता अरोड़ा, वैदिक परिवार के अध्यक्ष डॉ. पवन बंसल, सचिव डॉ. राजबीर आर्य, राजीव सचदेवा, सतीश सैनी, अशोक अरोड़ा, आशीष दूहन, दलवीर आर्य, सुरेश रावल, सत्यनारायण गुप्ता, सीमा सचदेवा, गीता आर्य, निर्मल आर्या, शकुंतला आर्य, ममता गोयल, शशि अग्रवाल, सविता आर्य, सिवाह सरपंच रणदीप आर्य, ईश कुमार राणा, कपिल राणा, आर.डी. कल्याण, राम मोहन शर्मा, रतन शर्मा, अनूप सैनी, सुमित्रा दुहन, रामपाल दुहन, डॉ. आरुषि सैनी, शाइना सचदेवा आदि गणमान्य व्यक्ति मुख्य रूप से उपस्थित रहे।

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