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जानकीपुरम विस्तार स्थित दृष्टि सामाजिक संस्थान में बच्चों के साथ समय बिताकर उनकी जरूरतों, सपनों और रोजमर्रा की चुनौतियों को करीब से समझने का अवसर मिला डॉ राजेश्वर सिंह ने कहाकि
वर्ष 1990 से दृष्टि सामाजिक संस्थान का प्रयास केवल बच्चों को आश्रय देना नहीं, बल्कि उन्हें परिवार जैसा वातावरण, शिक्षा, कौशल, सम्मान और आत्मनिर्भर भविष्य देना है। संस्थापिका स्वर्गीय श्रीमती नीता बहादुर जी द्वारा शुरू किए गए इस सेवा कार्य को उनके पुत्र श्री अथर्व बहादुर, बहू श्रीमती शालू बहादुर एवं अध्यक्ष श्री धीरेश बहादुर निरंतर आगे बढ़ा रहे हैं। बच्चों की देखभाल, शिक्षा, प्रशिक्षण और रोजमर्रा की आवश्यकताओं के लिए जिस मेहनत, कर्मठता और संवेदनशीलता के साथ वे निरंतर कार्य कर रहे हैं, वह बेहद सराहनीय और प्रेरणादायक है।
यहां लगभग 265 निराश्रित एवं विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की परवरिश, भोजन, स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा, स्वच्छता, कौशल प्रशिक्षण और समग्र विकास का ध्यान रखा जाता है। घर से बिछड़े, बेसहारा या बिना किसी संरक्षक के मिले बच्चों को परिवार जैसा सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण देने का यह प्रयास बेहद सराहनीय है।
बच्चों से बातचीत के दौरान उनकी मासूमियत, उत्साह और सीखने की ललक को करीब से जाना। बच्चों को फल एवं चॉकलेट भेंट किए तथा उनकी देखभाल और रोजमर्रा की जिम्मेदारियों में समर्पित लगभग 150 स्टाफ सदस्यों को उपहार भेंट स्वरूप साड़ियाँ प्रदान कीं। करीब 143 सदस्यीय स्टाफ टीम, जिनमें लगभग 139 महिलाएँ हैं, बच्चों की देखभाल, भोजन, प्रशिक्षण और दैनिक आवश्यकताओं को संभाल रही है।
संस्थान में बच्चों को हैंडलूम, सिलाई-कढ़ाई, शर्ट, स्टॉल एवं शॉल निर्माण, आर्टिफिशियल ज्वेलरी, हस्तशिल्प, फूड मेकिंग, मेकअप एवं हेयर स्टाइलिंग जैसे विभिन्न कौशलों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। तेल एवं मसालों की प्रोसेसिंग और निर्माण की उत्पादन इकाई के माध्यम से बच्चों को व्यवहारिक प्रशिक्षण देकर जिम्मेदारी, कार्यकुशलता और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाया जा रहा है।
विधायक सरोजिनी नगर डॉ राजेश्वर सिंह ने बताया
बच्चों के ज्ञानवर्धन और सीखने के अनुभव को और बेहतर बनाने के लिए बड़ी प्रोजेक्शन स्क्रीन एवं साउंड सिस्टम उपलब्ध कराने का सहयोग किया जाएगा। साथ ही, ट्रस्ट की ओर से ₹20 लाख के सहयोग की घोषणा की। बच्चों के शैक्षणिक एवं मनोरंजक भ्रमण के लिए बस की सुविधा उपलब्ध कराने तथा 50-50 बच्चों के समूह में अयोध्या यात्रा कराने की भी घोषणा की।
इस सेवा कार्य को समझने के लिए संस्था में आकर बच्चों और उनके साथ दिन-रात मेहनत कर रही पूरी टीम से व्यक्तिगत रूप से जुड़ना जरूरी है। इतनी कम उम्र में इतने समर्पण और संवेदनशीलता के साथ किया जा रहा यह कार्य वास्तव में सराहनीय और प्रेरणादायक है।
बच्चों को सुविधाओं के साथ सबसे ज्यादा जरूरत इस एहसास की है कि वे अकेले नहीं हैं। हमारा साथ, स्नेह और अपनापन हमेशा उनके साथ रहेगा।