बचपन पर बोझ नहीं, संस्कार और समग्र विकास हो” — डॉ. राजेश्वर सिंह ने मुख्यमंत्री से किया आग्रह

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यूपी लाइव न्यूज 24 उत्तर प्रदेश

मुख्य संपादक प्रवीण सैनी लखनऊ

बढ़ते स्क्रीन टाइम और मोबाइल लत पर डॉ. राजेश्वर सिंह ने जताई चिंता, आउटडोर खेल व स्वस्थ दिनचर्या पर दिया जोर

लखनऊ सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने छोटे बच्चों पर बढ़ते शैक्षणिक दबाव और भारी स्कूल बैग की समस्या को गंभीर विषय बताते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर बच्चों के हित में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि 5 से 10 वर्ष तक के छोटे बच्चे प्रतिदिन अत्यधिक भारी स्कूल बैग ढोने को मजबूर हैं, जिससे उनकी रीढ़, शारीरिक विकास और मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। चिकित्सकों एवं बाल विशेषज्ञों ने भी लगातार इस विषय पर चिंता व्यक्त की है।

डॉ. सिंह ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्कूल बैग का वजन बच्चे के शरीर के वजन के लगभग 10 प्रतिशत से कम रखने की सिफारिश की जाती है। साथ ही राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 भी बच्चों के लिए तनावमुक्त, आनंददायक एवं समग्र शिक्षा व्यवस्था पर बल देती है। उन्होंने राज्य सरकार से स्कूल बैग के वजन को विनियमित करने, अनावश्यक पुस्तकों एवं होमवर्क को कम करने तथा 10 वर्ष तक के बच्चों के लिए शैक्षणिक भार का युक्तिकरण करने का आग्रह किया।

इसी क्रम में डॉ. राजेश्वर सिंह ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर बच्चों में बढ़ते स्क्रीन टाइम, मोबाइल फोन की लत और आउटडोर गतिविधियों में कमी को लेकर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि मोबाइल, टैबलेट और डिजिटल उपकरणों का अत्यधिक उपयोग बच्चों की आँखों, मानसिक स्वास्थ्य और जीवनशैली पर नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है। विभिन्न अध्ययनों के अनुसार वर्ष 2050 तक दुनिया की लगभग आधी आबादी मायोपिया (निकट दृष्टिदोष) से प्रभावित हो सकती है। उन्होंने अभिभावकों से 20-20-20 नियम अपनाने की अपील की, जिसके तहत हर 20 मिनट स्क्रीन देखने के बाद 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर देखना चाहिए।

डॉ. सिंह ने अभिभावकों और स्कूलों से बच्चों को आउटडोर खेल, प्राकृतिक धूप, रचनात्मक गतिविधियों और स्वस्थ दिनचर्या से जोड़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि “बचपन अत्यधिक प्रतिस्पर्धा, भारी बस्तों और स्क्रीन की सीमाओं में नहीं, बल्कि सीखने, खेलने और स्वस्थ वातावरण में खिलना चाहिए। स्वस्थ बचपन ही स्वस्थ समाज और मजबूत राष्ट्र की नींव है।”

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