हर पीढ़ी ने अपने नेता में वही खोजा, जिसकी उसके समय में सबसे अधिक कमी थी” — डॉ. राजेश्वर सिंह

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यूपी लाइव न्यूज़ 24 उत्तर प्रदेश

सरदार पटेल से राष्ट्रीय एकता, आंबेडकर से संविधान और शास्त्री से अनुशासन की प्रेरणा मिली

लखनऊ। भारत में युवाओं और नेतृत्व के बीच सौ वर्षों में बदलते संबंधों पर विचार व्यक्त करते हुए डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि प्रत्येक पीढ़ी ने अपने समय की सबसे बड़ी कमी के अनुरूप नेतृत्व चुना है। स्वतंत्रता से पहले सम्मान और स्वाधीनता की कमी थी, इसलिए युवा त्यागी और क्रांतिकारी नेतृत्व की ओर आकर्षित हुआ। आज सबसे बड़ी माँग गति, अवसर, मार्गदर्शन और दिखाई देने वाले परिणामों की है।

उन्होंने कहा कि तिलक के “स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है”, गांधी जी के “करो या मरो”, भगत सिंह के “इंक़लाब ज़िंदाबाद”, नेताजी सुभाष चंद्र बोस के बलिदान के आह्वान और बाबा साहेब आंबेडकर के “शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो” ने युवाओं को केवल प्रेरित नहीं किया, बल्कि उनसे सक्रिय राष्ट्रीय भागीदारी भी माँगी।

डॉ. सिंह ने कहा कि स्वतंत्र भारत का निर्माण किसी एक व्यक्ति का प्रयास नहीं, बल्कि अनेक महान राष्ट्र-निर्माताओं का सामूहिक पुरुषार्थ था। सरदार वल्लभभाई पटेल ने रियासतों के एकीकरण से भारत की राजनीतिक एकता सुनिश्चित की; डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने गणतांत्रिक मर्यादाओं को स्थापित किया; बाबा साहेब आंबेडकर ने संवैधानिक आधार दिया; और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने राष्ट्रीय एकता को राजनीतिक विमर्श के केंद्र में रखा। वैज्ञानिकों होमी भाभा और विक्रम साराभाई ने भारत की वैज्ञानिक तथा अंतरिक्ष क्षमता की आधारशिला रखी।

उन्होंने कहा कि 1962 के बाद युवा केवल स्वप्न नहीं, सुरक्षा और सामर्थ्य चाहता था। लाल बहादुर शास्त्री जी के “जय जवान, जय किसान” ने अनुशासन, सादगी और आत्मनिर्भरता को राष्ट्रीय आदर्श बनाया। बाद के दशकों में डॉ. राममनोहर लोहिया, जयप्रकाश नारायण और कांशीराम जी ने युवाओं को व्यवस्था परिवर्तन, सामाजिक न्याय और राजनीतिक प्रतिनिधित्व के लिए संगठित किया।

राजीव गांधी के कार्यकाल में मतदान की आयु 21 से घटाकर 18 वर्ष किए जाने से युवाओं की लोकतांत्रिक भागीदारी को नई शक्ति मिली। अटल बिहारी वाजपेयी जी ने “जय विज्ञान” जोड़कर विज्ञान और तकनीक को राष्ट्रीय सामर्थ्य से जोड़ा। आर्थिक सुधारों के बाद नारायण मूर्ति, सचिन तेंदुलकर और डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम जैसे उपलब्धिधारी भी युवाओं के बड़े आदर्श बने।

मोदी युग—लक्ष्य, गति और समय-सीमा

वर्तमान दौर का उल्लेख करते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने Make in India, Startup India, Skill India, आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत 2047 के माध्यम से युवा आकांक्षाओं को लक्ष्य, अवसर और समय-सीमा की भाषा दी है। उनकी युवा-अपील के प्रमुख आधार निर्णायक नेतृत्व, सीधा संवाद और परिणामोन्मुख कार्यशैली हैं।

उन्होंने कहा कि आज का 20 वर्षीय युवा 2047 में 41 वर्ष का होगा। इसलिए विकसित भारत का संकल्प उसके लिए केवल सरकारी नारा नहीं, बल्कि उसके अपने जीवन की समय-रेखा है।

आँकड़े प्रचलित धारणाओं को काटते हैं

डॉ. सिंह ने CSDS-लोकनीति अध्ययनों का उल्लेख करते हुए कहा कि राजनीति में युवाओं की रुचि 1996 के 37 प्रतिशत से बढ़कर 2016 में 51 प्रतिशत हो गई। मुख्य व्यवसाय के रूप में स्वयं को विद्यार्थी बताने वाले युवाओं का अनुपात 2007 के 13 प्रतिशत से बढ़कर 2016 में 32 प्रतिशत हुआ।

इसके साथ ही 65 प्रतिशत युवाओं द्वारा सरकारी नौकरी को प्राथमिकता देना और केवल 9 प्रतिशत द्वारा उद्यमिता चुनने की इच्छा व्यक्त करना बताता है कि स्टार्टअप की प्रभावशाली कहानी के बावजूद स्थिर रोजगार, शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा की आकांक्षा कहीं अधिक व्यापक है।

हर राज्य में युवा सलाहकार परिषद समय की माँग

डॉ. राजेश्वर सिंह ने केंद्र और सभी राज्य सरकारों से युवाओं की संस्थागत भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान करते हुए कहा कि प्रत्येक राज्य में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में State Youth Advisory Council गठित होनी चाहिए।

इस परिषद में छात्र-छात्राओं, युवा उद्यमियों, खिलाड़ियों, किसानों, महिलाओं, तकनीकी विशेषज्ञों, दिव्यांग युवाओं तथा ग्रामीण, आदिवासी और वंचित वर्गों का संतुलित प्रतिनिधित्व हो। राज्य परिषद के साथ जिला स्तरीय युवा परिषदें गठित की जाएँ, जिनके सुझाव नियमित रूप से राज्य सरकार तक पहुँचें। मुख्यमंत्री और युवा प्रतिनिधियों के बीच निश्चित अंतराल पर सीधा संवाद तथा परिषद की सिफारिशों पर सार्वजनिक कार्रवाई रिपोर्ट भी हो।

उन्होंने कहा कि शिक्षा, रोजगार, कौशल विकास, प्रतियोगी परीक्षाओं और पेपर लीक, मानसिक स्वास्थ्य, नशे की समस्या, खेल, स्टार्टअप, AI, सोशल मीडिया तथा डिजिटल सुरक्षा से संबंधित नीतियाँ केवल युवाओं के लिए नहीं, युवाओं की सलाह और भागीदारी से बननी चाहिए।

डॉ. सिंह ने कहा, “गांधी जी ने युवाओं से त्याग, राष्ट्र-निर्माताओं ने निर्माण, शास्त्री जी ने अनुशासन, जयप्रकाश नारायण ने परिवर्तन और आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विकसित भारत के निर्माण में युवा शक्ति की भागीदारी माँग रहे हैं। अब आवश्यकता है कि युवाओं को केवल लाभार्थी और मतदाता नहीं, नीति-निर्माण का समान भागीदार बनाया जाए।”

उन्होंने कहा, “आज का युवा अधीर नहीं है; उसके पास समय कम और सपने बड़े हैं। भारत की युवा शक्ति को सुनना केवल लोकतांत्रिक शिष्टाचार नहीं, विकसित भारत की अनिवार्य शर्त है।”

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