यूपी लाइव न्यूज 24 उत्तर प्रदेश
मुख्य संपादक प्रवीण सैनी लखनऊ
– उप्र में मंत्रिमंडल में केवल 6 रिक्तियाँ हैं, इससे ज़्यादा तो दूसरे दल से पाला बदल कर आए लोग हैं, क्या उन सभी को मंत्री पद से नवाज़ा जाएगा?
– क्या उनमें से सबसे कमज़ोर को चुना जाएगा जिससे कि उसकी कमज़ोरी कुछ कम हो जाए?
– एक समाज के कई विधायकों में से किसी एक को चुना जाएगा तो चुनने का आधार क्या होगा?
– अगर ऐसा हुआ तो बाक़ी दल-बदलुओं का क्या होगा?
– उनकी उपेक्षा व अपमान को क्या कुछ ले-देकर शांत करा जाएगा?
– या उन्हें भी ये अहसास करा दिया जाएगा कि भाजपा किसी की सगी नहीं है?
– बाक़ी छूटे हुए लोग क्या अपने को ठगा सा महसूस नहीं करेंगे?
– वो अपने चुनाव क्षेत्र में मुँह दिखाने लायक बचेंगे क्या?
– इसके अतिरिक्त प्रश्न ये भी है कि उनके अपने दल के जो लोग मंत्री बनने के इंतज़ार में सूखकर काँटा हो गये हैं, उन बेचारों का क्या होगा?
– जिन वर्तमान मंत्रियों के विभाग कम किये जाएंगे तो क्या इससे जनता के बीच ये संदेश नहीं जाएगा कि वो नाकाम रहे, इसलिए उनसे मंत्रालय छीन लिया गया है?
– ऐसे मंत्री तो बिना लड़े ही क्या अपना चुनाव हार नहीं जाएंगे?
– साथी दलों को प्रतीक्षा के स्थान पर और कुछ मिलेगा या फिर उनको ये कहकर उपेक्षित कर दिया जाएगा… तुम थे जिनके सहारे, वो हुए न तुम्हारे…
वो तो ठग हैं पुराने… तुम ये सच न जाने…
… और हाँ जनता ये भी पूछ रही है कि आख़िरी 9 महीनों में ये मंत्री क्या कर लेंगे जब 9 साल में ये सरकार कुछ न कर सकी। ये भी केवल वही करेंगे जो भाजपा सरकार ने किया है :
भ्रष्टाचार और अत्याचार!
पीडीए पर वार-ही-वार!
महंगाई-बेकारी की मार!
ये जीना कर देंगे दुश्वार!