साइकिल को ब्रांड बनाने की मोदी जी की कोशिश, सपा की दूरदर्शिता की जीत :अनीस मंसूरी

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यूपी लाइव न्यूज 24 उत्तर प्रदेश

मुख्य संपादक प्रवीण सैनी लखनऊ

लखनऊ समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव, पूर्व मंत्री और पसमांदा मुस्लिम समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनीस मंसूरी ने साइकिल को लेकर चल रही देशव्यापी चर्चाओं के बीच एक बड़ा राजनीतिक बयान जारी किया है। श्री मंसूरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा साइकिल को बढ़ावा देना दरअसल समाजवादी पार्टी की वैचारिक जीत और उसकी दूरदर्शिता पर मुहर है। उन्होंने गर्व से कहा कि जिस साइकिल को समाजवादी पार्टी ने दशकों पहले आम आदमी की जरूरत और संघर्ष का प्रतीक बनाया था, आज प्रधानमंत्री भी उसी ‘सपाई राह’ पर चलने को मजबूर है।

अनीस मंसूरी ने कहा कि समाजवादी पार्टी ने हमेशा से साइकिल को केवल एक ‘चुनाव चिन्ह’ नहीं, बल्कि आम आदमी की गरिमा और आत्मनिर्भरता के सशक्त माध्यम के रूप में प्रतिष्ठित किया है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि सालों तक जो लोग इसे छोटा समझते थे, आज वही इसे ‘फिट इंडिया’ और ‘ऊर्जा संरक्षण’ का नेशनल ब्रांड बता रहे हैं। यह साबित करता है कि जो रास्ता समाजवादियों ने सालों पहले चुना था, वही आज देश को बचाने का एकमात्र विकल्प है। साइकिल अब राजनीति के गलियारों से निकलकर देशहित और पर्यावरण सुधार का सबसे बड़ा संदेश बन चुकी है।

अनीस मंसूरी ने प्रधानमंत्री से मांग की कि यदि वे वास्तव में साइकिल को देशहित और पर्यावरण संरक्षण का माध्यम मानते हैं, तो उन्हें केवल प्रचार से आगे बढ़कर जनता को आर्थिक राहत देनी चाहिए। समाजवादी नेता ने मांग रखी कि:

​टैक्स मुक्त सवारी: केंद्र और राज्य सरकारें साइकिल, ई-बाइक और ई-स्कूटर पर से जीएसटी और आरटीओ फीस को तत्काल प्रभाव से शून्य करें। गरीब ​हितैषी परिवहन साधनों को खरीदने के लिए भारी सब्सिडी और विशेष छूट दी जाए।

​अब सपा की पहचान’ बनी ‘देश की जरूरत’
​श्री मंसूरी ने अपनी राजनैतिक फिलॉसफी साझा करते हुए कहा कि साइकिल अब किसी दल के दायरे से बाहर निकलकर राष्ट्रीय आवश्यकता बन गई है। उन्होंने कहा कि अगर आज देश का पैसा पेट्रोल-डीजल के बजाय बच रहा है और प्रदूषण कम हो रहा है, तो इसका श्रेय उस ‘साइकिल’ को जाता है जिसे समाजवादियों ने सींचा है।

​उन्होंने अंत में बेहद सधे हुए अंदाज में कहा, “साइकिल चलाना सिर्फ एक एक्सरसाइज नहीं, बल्कि देश के प्रति वफादारी और महंगाई के खिलाफ एक मौन क्रांति है। हम खुश हैं कि आज पूरा देश उसी रास्ते पर चलने की बात कर रहा है, जिसकी बुनियाद समाजवाद पर टिकी है। अब सरकार को चाहिए कि वह टैक्स कम करके साइकिल को हर गरीब के लिए सुलभ बनाए।

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