गौप्रतिष्ठा (गोरक्षार्थ धर्मयुद्ध) — जिला आगरा में जगद्गुरु शंकराचार्य का भव्य स्वागत

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यूपी लाइव न्यूज 24 उत्तर प्रदेश

मुख्य संपादक प्रवीण सैनी लखनऊ

‘परशुराम ने गौ रक्षा के लिए परशु उठाया — गौ माता के लिए राम बने परशुराम’

— *’यतो धर्मस्ततो जयः—एक ऋषि ने 17 अक्षौहिणी सेना को परास्त किया’—’भारत अब विश्व का सबसे बड़ा मांस विक्रेता — विश्वगुरु का देश आज कसाई देश कहलाता है’—’70 वर्षों में आपकी सरकार आज तक स्थापित नहीं हुई — सब पार्टियां आपका vote लेकर आपकी माता को बेचती रही हैं’*

जिला: आगरा, उत्तर प्रदेश |
मूल मन्त्र: “अहं हनं वृत्रं गविष्ठौ”

*”अधर्म में शक्ति है — परेशान करने की शक्ति। और परेशान कर रहे हैं। लेकिन हमें विजय का पूरा विश्वास है क्योंकि हम धर्म के पक्ष में हैं। बचाने वाला हमेशा मारने वाले से बड़ा होता है। गाय काट-काटकर बेचने वालों को कोई तकलीफ नहीं, लेकिन गाय बचाने वालों को तकलीफ दी जा रही है — इससे ही पता चलता है धर्म किसके पास है। और जहाँ धर्म है वहाँ ‘यतो धर्मस्ततो जयः’ — जीत सुनिश्चित है।”*
— *’परमाराध्य’ परमधर्माधीश उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर अनन्तश्रीविभूषित जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानन्द: सरस्वती ‘१००८’*

आगरा। ऐतिहासिक 81 दिवसीय ‘गौप्रतिष्ठा (गोरक्षार्थ धर्मयुद्ध)’ (3 मई – 24 जुलाई 2026) के क्रम में ‘परमाराध्य’ परमधर्माधीश उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर अनन्तश्रीविभूषित जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानन्द: सरस्वती ‘१००८’ को जिला आगरा में जगह-जगह भव्य स्वागत मिला। परशुराम भवन में आयोजित विशेष सभा सहित प्रत्येक स्थान पर उपस्थित जनसमुदाय ने वैदिक मन्त्र “अहं हनं वृत्रं गविष्ठौ” का सामूहिक उच्चारण करते हुए गौ रक्षा का संकल्प लिया।
‘परशुराम ने गौ रक्षा के लिए परशु उठाया — गौ माता के लिए राम बने परशुराम’
महाराजश्री ने भगवान परशुराम के नाम पर स्थापित भवन में उपस्थित जनसमुदाय को समझाया कि भगवान परशुराम ने परशु क्यों उठाया। ऋषि जमदग्नि का आश्रम गाय की सेवा के आशीर्वाद से धन-धान्य से परिपूर्ण था। राजा कार्तवीर्यो अर्जुन ने यह देखकर समझा कि इन विशेष गायों में सम्पत्ति का रहस्य है। जब ऋषि ने समझाया कि किसी भी गाय की भावपूर्ण सेवा करने से आशीर्वाद और सम्पत्ति मिलती है, राजा ने नहीं माना और जबरदस्ती गायों को ले जाने का आदेश दिया।
‘जब गायों की पीड़ा की आवाज़ ध्यान में लीन परशुराम जी तक पहुँची, वे दौड़े। उस समय वे राम थे, परशुराम नहीं। जब उन्होंने देखा कि शस्त्रबल से गाय को ले जाया जा रहा है — एक रूपान्तरण हुआ। गौ माता के लिए राम परशुराम बन गए। केवल परशु उठाकर फोटो नहीं खिंचवाई। लड़ाई लड़ी — राजा की 17 अक्षौहिणी सेना से — और जीते। क्योंकि वे धर्म के पक्ष में थे।’
‘यतो धर्मस्ततो जयः — एक ऋषि ने 17 अक्षौहिणी सेना को् परास्त किया’
महाराजश्री ने गीता के मूल सिद्धान्त का उद्धरण दिया: “यतो धर्मस्ततो जयः” — जहाँ धर्म है वहाँ जय है। ‘लोगों के मन में प्रश्न उठेगा: एक ऋषि ने 17 अक्षौहिणी सेना को कैसे हरा दिया? उत्तर संख्या में नहीं है। उत्तर इसमें है कि धर्म किसके पास है। अधर्म में शक्ति है — परेशान करने की शक्ति। धर्म में शक्ति है — विजय की। हम गौ माता की रक्षा के लिए खड़े हैं। हर कदम पर परेशान किया जा रहा है — यह आरोप, वह समस्या। करते रहो परेशान। लेकिन विजय हमारी होगी।’
उन्होंने यात्रा के सन्दर्भ में जोड़ा: ’24 जुलाई 2026 को लखनऊ में एक अक्षौहिणी सेना — 2,18,700 धर्म सैनिक। वेतन पर नहीं। कोई भी वेतन दे दो तो गाय काटने वाले भी आ जाएँगे। हमारी सेना भावना वालों की है — गाय के लिए, स्वतः-स्फूर्त, भीतर से आती पुकार से। ऐसी सेना को 17 अक्षौहिणी वाले भी नहीं हरा सकते।’
‘भारत अब विश्व का सबसे बड़ा मांस विक्रेता — विश्वगुरु का देश कसाई देश कहलाता है’
महाराजश्री ने एक मार्मिक आरोप लगाया: जो देश कभी विश्व गुरु था, आज विश्व का सबसे बड़ा बीफ निर्यातक है। ‘और इस देश के प्रधानमन्त्री ओमान जाते हैं और वहाँ के मुसलमान उपभोक्ताओं से कहते हैं: हमसे बीफ क्यों नहीं खरीदते? ओमानियों ने कहा: हम Halal मांस खाते हैं — कलमा पढ़ कर, धीरे-धीरे, एक मुसलमान के हाथ से काटा हुआ। प्रधानमन्त्री ने कह दिया: कोई बात नहीं, हम आपके तरीके से करा देते हैं। और अब भारत की भूमि पर इस्लामी विधि से, कलमा पढ़ कर, Halal प्रमाणित बीफ पैक होकर ओमान जा रहा है।’
उन्होंने उपस्थित जनसमुदाय से सीधा प्रश्न किया: ‘आप सब यहाँ बैठे हो — अगर आपके घर में घोर विपन्नता हो, एक रुपया भी न हो, घर में एक गाय हो और पड़ोसी कहे: गाय काट दो, हम पैसे देते हैं — तो आप में से कौन है जो काट देगा? भूखे मर जाओगे लेकिन नहीं काटोगे। तो फिर जो सरकार खुद को हिन्दू कहती है, वह बीफ निर्यात करके देश कैसे चला रही है? और जो यह कर सकते हैं — क्या वे सच में आपके लोग हैं?’
’78 वर्षों में आपकी सरकार आज तक स्थापित नहीं हुई’
महाराजश्री ने एक तीखा राजनीतिक सत्य उद्घाटित किया: ‘आज़ादी के 78 वर्ष बीत गए। आपकी सरकार — जो वास्तव में आपके मूल्यों की, आपकी माता की प्रतिनिधि हो — कभी स्थापित नहीं हुई। एक के बाद एक पार्टी आई, आपका vote लिया और आपकी माता का मांस विश्व को बेचता रहा। इनमें से कोई भी आपकी सरकार नहीं थी।’
उन्होंने आग्रह किया: ‘अब अपनी सरकार स्थापित करो। हमने हर पार्टी के दरवाज़े पर जाकर एक ही शर्त कही: संसद और विधानसभा में प्रस्ताव पारित करो कि गाय माता है। कोई पार्टी नहीं बोली। जो नहीं बोली, उसने अपना vote लेने का अधिकार खो दिया। जब तक कोई पार्टी यह घोषणा नहीं करती — अपना vote रोको। जब करे — पूरी शक्ति से दो।’
श्री राजेश शर्मा जी आगरा प्रतिनिधि नियुक्त
आगरा की सभा में श्री राजेश शर्मा जी आगे आए और उन्हें एक नए अभियान एवं अभिनव गौधाम निर्माण के लिए प्रतिनिधि नियुक्त किया गया। वे पूरे क्षेत्र में हर घर में जाएँगे, हर निवासी से ₹1 से ₹500 का एक नोट एकत्र करेंगे और उस राशि से गौधाम बनाएँगे। महाराजश्री ने कहा: ‘जमदग्नि का आश्रम गौ माता के आशीर्वाद से सम्पन्न था। आपका गौधाम भी आपके पूरे विधानसभा क्षेत्र को उसी आशीर्वाद से सम्पन्न करेगा।’
सामूहिक संकल्प एवं आह्वान — चक्रधारी मुद्रा
महाराजश्री ने उपस्थित जनसमुदाय से सामूहिक घोषणा करवाई:
“मैं घोषणा करता/करती हूँ कि गाय मेरी माता है। जो उन्हें पशु कहे या पशु कहने वालों से सम्पर्क रखे — आज से उनसे मेरा नाता टूटा। आने वाले चुनाव में मेरा vote केवल उस पार्टी या प्रत्याशी को जो संसद या विधानसभा में प्रस्ताव पारित करके गाय को माता घोषित करे।”
तत्पश्चात् चक्रधारी मुद्रा में वैदिक संकल्प “अहं हनं वृत्रं गविष्ठौ” का सामूहिक उच्चारण कराया गया। महाराजश्री ने स्मरण दिलाया: ‘एक घोषणा, एक vote, एक नोट — यही आपके धर्मयुद्ध के तीन अस्त्र हैं।’
24 जुलाई को लखनऊ में एक अक्षौहिणी सेना का महासंकल्प
3 मई 2026 को गोरखपुर से प्रारम्भ हुई गौप्रतिष्ठा यात्रा उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभाओं की परिक्रमा कर रही है। यदि 81 दिनों की यात्रा पूर्ण होने तक सरकार ने ठोस कदम नहीं उठाए, तो 24 जुलाई 2026 को लखनऊ में एक अक्षौहिणी सेना — 2,18,700 धर्म सैनिकों के साथ अगले चरण

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