लखनऊ जिन्होंने राम को ‘काल्पनिक’ कहा, वे आज अयोध्या पर राजनीति कर रहे हैं; सनातन समाज सब याद रखता है” — डॉ. राजेश्वर सिंह

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यूपी लाइव न्यूज 24 उत्तर प्रदेश

मुख्य संपादक प्रवीण सैनी लखनऊ

“श्रीराम मंदिर केवल एक मंदिर नहीं, सदियों के संघर्ष, बलिदान और आस्था की विजय का प्रतीक है” — डॉ. राजेश्वर सिंह

“अयोध्या राजनीति का विषय नहीं, राष्ट्र की आत्मा का विषय है; श्रीराम मंदिर सांस्कृतिक स्वाभिमान की अमर गाथा है” — डॉ. राजेश्वर सिंह

सरोजिनी नगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने अयोध्या और श्रीराम मंदिर को लेकर विपक्षी दलों द्वारा दिए जा रहे बयानों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि जिन लोगों ने दशकों तक राम मंदिर निर्माण का विरोध किया, करोड़ों हिंदुओं की आस्था का उपहास उड़ाया और प्रभु श्रीराम को “काल्पनिक” तक कहा, वे आज अयोध्या के नाम पर राजनीतिक सहानुभूति बटोरने का प्रयास कर रहे हैं।

डॉ. सिंह ने कहा कि देश और सनातन समाज यह नहीं भूला है कि किस प्रकार वर्षों तक राम जन्मभूमि के प्रश्न को वोट बैंक की राजनीति के कारण उलझाए रखा गया। उन्होंने कहा कि अयोध्या केवल एक शहर नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना, आध्यात्मिक विरासत और करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। श्रीराम मंदिर का निर्माण किसी राजनीतिक दल की उपलब्धि नहीं, बल्कि करोड़ों रामभक्तों के त्याग, संघर्ष, धैर्य और विश्वास की ऐतिहासिक विजय है।

उन्होंने कहा कि अयोध्या की धरती रामभक्तों के बलिदान, दशकों तक चले संघर्ष और उन असंख्य लोगों की तपस्या की साक्षी है, जिन्होंने अपने जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन को समर्पित किया। देश आज भी उन घटनाओं को याद करता है जब रामभक्तों की आस्था को राजनीतिक दृष्टि से देखा गया, आंदोलनकारियों की भावनाओं की उपेक्षा की गई और राम जन्मभूमि के प्रश्न को अनावश्यक रूप से लंबित रखा गया। ऐसे में वे लोग, जिन्होंने इस आंदोलन का विरोध किया या इसकी भावनाओं को समझने का प्रयास नहीं किया, आज स्वयं को अयोध्या का हितैषी बताने का नैतिक अधिकार खो चुके हैं।

डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि अयोध्या के विकास और श्रीराम मंदिर निर्माण के बाद पूरी दुनिया भारत की सांस्कृतिक शक्ति और सनातन परंपरा के वैभव को नए दृष्टिकोण से देख रही है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अयोध्या न केवल आस्था की वैश्विक राजधानी के रूप में उभरी है, बल्कि आधुनिक बुनियादी ढांचे, पर्यटन, निवेश, रोजगार और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का भी केंद्र बन रही है। आज अयोध्या में अभूतपूर्व विकास कार्य हो रहे हैं, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिली है और करोड़ों श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं प्राप्त हो रही हैं।

उन्होंने कहा कि श्रीराम मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि यह सत्य की असत्य पर, आस्था की उपेक्षा पर और धैर्य की निराशा पर विजय का प्रतीक है। यह मंदिर उन करोड़ों लोगों की भावनाओं का सम्मान है, जिनकी आस्था को लंबे समय तक राजनीतिक स्वार्थों के कारण अनदेखा किया गया। श्रीराम मंदिर का भव्य निर्माण भारत की सांस्कृतिक चेतना, राष्ट्रीय आत्मविश्वास और सभ्यतागत गौरव के पुनर्जागरण का प्रतीक बन चुका है।

डॉ. सिंह ने कहा कि अयोध्या को राजनीतिक अवसरवाद का मंच बनाने के बजाय सभी को उसकी गरिमा, पवित्रता और सांस्कृतिक महत्व का सम्मान करना चाहिए। प्रभु श्रीराम केवल एक धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि भारतीय जीवन मूल्यों, मर्यादा, न्याय, करुणा और लोककल्याण के शाश्वत प्रतीक हैं। उनके आदर्श आज भी राष्ट्र निर्माण का मार्ग प्रशस्त करते हैं और समाज को एकता, समरसता तथा कर्तव्यनिष्ठा का संदेश देते हैं।

डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि जो लोग कल तक राम मंदिर आंदोलन और रामभक्तों की भावनाओं के विरोध में खड़े थे, वे आज राजनीतिक परिस्थितियों के कारण अपनी भूमिका बदलने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन इतिहास और समाज दोनों सब कुछ याद रखते हैं। अयोध्या की पवित्र धरती संघर्ष, बलिदान, तपस्या और आस्था की उस यात्रा की साक्षी है, जिसने अंततः सत्य को विजय दिलाई।

अंत में डॉ. सिंह ने कहा, “अयोध्या राजनीति का विषय नहीं, राष्ट्र की आत्मा का विषय है। श्रीराम मंदिर करोड़ों भारतीयों की आस्था, संघर्ष और सांस्कृतिक स्वाभिमान की अमर गाथा है। यह केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि उस सनातन चेतना का प्रतीक है जिसने सदियों की प्रतीक्षा, संघर्ष और बलिदान के बाद सत्य की विजय का इतिहास रचा है।”

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