मंच पर विकास का दावा, जमीन पर बदहाली: मिल्कीपुर क्षेत्र में नेताओं के वादों और हकीकत में बड़ा फासला

Spread the love

यूपी लाइव न्यूज 24 उत्तर प्रदेश

उप संपादक संजय मिश्रा

अयोध्या

लोकतंत्र में चुनाव और जनसभाओं के दौरान नेताओं के मंच से दिए जाने वाले भाषणों और जमीनी हकीकत के बीच का अंतर हमेशा से एक बड़ा विमर्श रहा है। वर्तमान में अयोध्या जनपद का ग्रामीण क्षेत्र ‘मिल्कीपुर’ इसका सबसे सटीक उदाहरण बनता जा रहा है। एक तरफ जहाँ राजनीतिक मंचों से क्षेत्र के कायाकल्प और चौमुखी विकास के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, वहीं दूसरी तरफ जमीनी हकीकत से रूबरू होने पर स्थानीय जनता की समस्याओं का अंबार दिखाई देता है। *भाषणों में चमक, सड़कों पर कीचड़ और गड्ढे* स्थानीय ग्रामीणों और प्रबुद्ध जनों का कहना है कि नेताओं के दौरों और भाषणों में तो मिल्कीपुर को आदर्श क्षेत्र बनाने की बातें होती हैं, लेकिन सच यह है कि आज भी क्षेत्र की अंदरूनी सड़कें गड्ढों में तब्दील हैं। जलभराव, टूटी नालियाँ और बुनियादी ढांचों की कमी के कारण आम नागरिकों का जीना मुहाल हो चुका है। विकास योजनाओं की फाइलें तो सरकारी दफ्तरों में दौड़ रही हैं, लेकिन धरातल पर उनका असर शून्य नजर आता है। *नेताओं की उदासीनता से जनता में भारी आक्रोश* क्षेत्रीय जनता का आरोप है कि चुनाव नजदीक आते ही नेताओं और जनप्रतिनिधियों की गाड़ियां गाँव की धूल फांकने लगती हैं, लेकिन परिणाम आने के बाद जनता को उनके हाल पर छोड़ दिया जाता है। मिल्कीपुर क्षेत्र की बदहाली पर चर्चा करते हुए स्थानीय नागरिकों ने कहा:
“मंच से किए जाने वाले वादों और हमारे गाँव की वास्तविक स्थिति में ज़मीन-आसमान का फर्क है। मूलभूत सुविधाओं के लिए भी यहाँ की जनता तरस रही है, मगर कोई सुध लेने वाला नहीं है।” *मुख्य समस्याएं जो ध्यान आकर्षण चाहती हैं:* जर्जर सड़कें और मार्ग: मुख्य मार्गों से जुड़ने वाले संपर्क मार्ग बेहद दयनीय स्थिति में हैं।
ठप पड़ा विकास कार्य: ग्राम पंचायतों में बुनियादी विकास कार्य और जनसुविधाओं का अभाव। जनप्रतिनिधियों की बेरुखी: क्षेत्र की प्रमुख समस्याओं को लेकर स्थानीय स्तर पर कोई ठोस पैरवी न होना। मिल्कीपुर की यह स्थिति साफ बयां करती है कि केवल भाषणों और आश्वासनों से किसी क्षेत्र की तस्वीर नहीं बदली जा सकती। जब तक जनप्रतिनिधि वातानुकूलित गाड़ियों से उतरकर जमीन पर काम नहीं करेंगे, तब तक विकास का दावा मात्र एक चुनावी नारा बनकर रह जाएगा। शासन-प्रशासन और स्थानीय नेताओं को अब इस ओर गंभीर ध्यान देने की सख्त जरूरत है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *