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लखनऊ।उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कोटेदारों यानी राशन डीलरों के उत्पीड़न पर गंभीर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली से जुड़े कामों में कोटेदारों पर अनावश्यक दबाव, शिकायतों के नाम पर परेशान करना या शोषण करना स्वीकार नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को साफ निर्देश दिए कि गरीबों तक राशन पहुंचाने वाली इस व्यवस्था में पारदर्शिता और सम्मान दोनों बनाए रखें। कोटेदार सार्वजनिक वितरण प्रणाली की अहम कड़ी होते हैं। यही वे अधिकृत दुकान संचालक होते हैं, जिनके माध्यम से पात्र परिवारों तक गेहूं, चावल, चीनी और अन्य जरूरी वस्तुएं रियायती दरों पर पहुंचती हैं। गांव और शहरी इलाकों में कोटेदारों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि जरूरतमंद परिवारों की रोजमर्रा की खाद्य सुरक्षा काफी हद तक इसी व्यवस्था पर टिकी होती है।
बैठक में मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों और जिला पूर्ति अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि वे अपनी जिम्मेदारियों का ईमानदारी से निर्वहन करें। उन्होंने कहा कि अगर किसी अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार की पुष्टि होती है, तो उसे तत्काल निलंबित किया जाए। साथ ही, ऐसे मामलों में खुली विजिलेंस जांच कराई जाए और जरूरत पड़ने पर विधिक व विभागीय कार्रवाई भी की जाए।योगी आदित्यनाथ ने यह संदेश भी दिया कि कोटेदारों और लाभार्थियों, दोनों के हितों की रक्षा प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राशन व्यवस्था में किसी भी तरह की लापरवाही, भ्रष्टाचार या उत्पीड़न को सरकार बर्दाश्त नहीं करेगी। प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि गरीबों को समय पर और बिना बाधा उनका हक मिले। यह निर्देश ऐसे समय में आए हैं जब सार्वजनिक वितरण प्रणाली को लेकर शिकायतें और विवाद समय-समय पर सामने आते रहे हैं। मुख्यमंत्री के इस रुख को राज्य में राशन व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी, अनुशासित और जवाबदेह बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।