यूपी लाइव न्यूज़ 24 उत्तर प्रदेश
सह संपादक कपिल गुप्ता
हर्रायपुर कौशाम्बी मूरतगंज से पल्हना घाट जाने वाला प्रमुख मार्ग इन दिनों बदहाली की मार झेल रहा है। सड़क पर जगह-जगह नहीं बल्कि हजारों की संख्या में गड्ढे हो गए हैं। कई स्थानों पर गड्ढे इतने गहरे और बड़े हो चुके हैं कि बाइक का आधा पहिया तक उसमें समा जाता है। ऐसे में राहगीरों को हर समय दुर्घटना का डर सताता रहता है।इस मार्ग से प्रतिदिन हजारों छात्र-छात्राओं ग्रामीणों और राहगीरों का आवागमन होता है। इसके अलावा पल्हना घाट पर गंगा स्नान के लिए जाने वाले श्रद्धालुओं की भी बड़ी संख्या रहती है। किसी व्यक्ति की मौत होने के बाद अंतिम संस्कार से जुड़ी मिट्टी आदि लेकर भी लोग इसी मार्ग से पल्हना घाट पहुंचते हैं। इसके बावजूद सड़क की हालत पर जिम्मेदार विभाग द्वारा ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
सड़क मरम्मत के नाम पर लोक निर्माण विभाग ने खजाने से रकम तो निकाल ली लेकिन सड़क का निर्माण मरम्मत गुणवत्तापूर्ण नहीं हुआ है जिससे रकम निकालने के बाद भी लीपा पोती हो गई और कुछ दिन में फिर सड़क खराब हो गई घटिया निर्माण करने वाले ठेकेदार और अधिकारियों के कारनामों की जांच कराए जाने और मुकदमा दर्ज करके ठेकेदार और अधिकारियों की गिरफ्तारी कराए जाने की मांग आम जनता ने की है स्थानीय लोगों का आरोप है कि सड़क की बदहाली को लेकर कई बार जिम्मेदार अधिकारियों को अवगत कराया गया, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। सड़क पर बने गड्ढे राहगीरों के लिए मौत को दावत दे रहे हैं। रात के समय स्थिति और भी खतरनाक हो जाती है,क्योंकि गड्ढे दूर से दिखाई नहीं देते और दोपहिया वाहन चालक अचानक उनमें फंसकर दुर्घटना का शिकार हो सकते हैं एक तरफ सरकार ग्रामीण और प्रमुख मार्गों को बेहतर बनाने तथा सुरक्षित यातायात की बात करती है,वहीं दूसरी तरफ मूरतगंज-पल्हना घाट मार्ग की हालत जिम्मेदार विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि क्या किसी बड़े हादसे या जनहानि के बाद ही पीडब्ल्यूडी विभाग के अधिकारियों की नींद खुलेगी ग्रामीणों ने जिलाधिकारी और लोक निर्माण विभाग के उच्चाधिकारियों से मामले का संज्ञान लेकर सड़क का स्थलीय निरीक्षण कराने तथा गड्ढों को भरवाकर मार्ग की मरम्मत कराने की मांग की है,ताकि किसी अनहोनी से पहले लोगों की जान बचाई जा सके।अब देखना यह है कि पीडब्ल्यूडी विभाग के जिम्मेदार अधिकारी सड़क की बदहाली पर कब तक आंखें मूंदे रहते हैं और कब इस जानलेवा मार्ग की सुध लेते हैं।