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नेपाल आपदा: डॉ. राजेश्वर सिंह ने भारतीय पीड़ित परिवारों हेतु ₹11 लाख की सहायता की घोषणा की; सभी राष्ट्रीयताओं के लिए सहायता डेस्क और भारत–नेपाल हिमालयी आपदा लचीलापन साझेदारी का आह्वान “हिमालय ने अपनी चेतावनी दे दी है। अब यह हम पर है कि हमने उसे सुना है या नहीं।”
लखनऊ, 28 अगस्त 2026 — नेपाल के रसुवा–नुवाकोट क्षेत्र में आई भीषण आपदा पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए सरोजिनी नगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने भारतीय पीड़ितों के परिवारों हेतु ₹11 लाख की प्रारंभिक सहायता राशि, सभी राष्ट्रीयताओं के लिए सहायता एवं परिवार समन्वय डेस्क तथा भारत–नेपाल के बीच दीर्घकालिक हिमालयी जलवायु एवं आपदा लचीलापन साझेदारी का प्रस्ताव रखा है।
गुरुवार सुबह नेपाली अधिकारियों द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार 165 शव बरामद किए जा चुके थे और 826 लोग लापता बताए गए थे। इनमें नेपाली नागरिकों के साथ सुरक्षाकर्मी, पर्यटक और बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। आंकड़े खोज एवं बचाव अभियान के साथ लगातार बदल रहे हैं।
डॉ. सिंह ने कहा: “हर उस परिवार से, जो अपने प्रियजन के फोन की प्रतीक्षा कर रहा है—आपकी यह चिंता केवल आपकी नहीं है। आपदा की घड़ी में कोई विदेशी नहीं होता; केवल वे होते हैं जो संकट में हैं और वे जो उनकी मदद कर सकते हैं।”
उन्होंने नेपाल सेना, नेपाल पुलिस, सशस्त्र पुलिस बल, चिकित्सा दलों, हेलीकॉप्टर कर्मियों और स्वयंसेवकों को नमन करते हुए भारत सरकार की त्वरित मानवीय प्रतिक्रिया की सराहना की।
“इस समय बयान से पहले बचाव, अटकल से पहले सत्यापित सूचना और राष्ट्रीयता से पहले मानवता होनी चाहिए।”
भारतीय पीड़ित परिवारों के लिए ₹11 लाख
Environment Warriors की ओर से इस आपदा में जान गंवाने वाले अथवा लापता भारतीय नागरिकों के परिवारों हेतु ₹11 लाख की प्रारंभिक सहायता राशि उपलब्ध कराई जाएगी। सक्षम प्राधिकरणों के समन्वय से सत्यापित निकटतम परिजनों तक सहायता पहुंचाई जाएगी।
डॉ. सिंह ने कहा:“कोई भी राशि ऐसी क्षति का उत्तर नहीं हो सकती। यह शोक का मूल्य नहीं, केवल इस बात का प्रतीक है कि ये परिवार अकेले नहीं हैं।”
सभी राष्ट्रीयताओं के लिए सहायता डेस्क
डॉ. सिंह ने अपने सरोजिनी नगर कार्यालय में सहायता एवं परिवार समन्वय डेस्क स्थापित करने का निर्देश दिया है। यह डेस्क राष्ट्रीयता के भेद के बिना परिवारों की सत्यापित जानकारी दर्ज करने तथा आवश्यकता के अनुसार उसे विदेश मंत्रालय, काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास एवं संबंधित राजनयिक मिशनों तक पहुंचाने में सहयोग करेगी।
“सहायता राशि भारतीय नागरिकों के परिवारों के लिए है, लेकिन सहायता डेस्क सबके लिए है। बाढ़ में बहती नदी पासपोर्ट नहीं पूछती; करुणा को भी नहीं पूछना चाहिए।”
हिमालय की चेतावनी
प्रारंभिक वैज्ञानिक आकलनों के अनुसार आपदा की शुरुआत उच्च हिमालयी क्षेत्र में बड़े बर्फ-शिला पतन से हुई हो सकती है। ICIMOD के अनुसार त्रिशूली नदी में एक स्थान पर जलस्तर लगभग 30 मिनट में नौ मीटर तक बढ़ा।
डॉ. सिंह ने कहा: “तीस मिनट में नौ मीटर—ऐसी आपदा में केवल वही चेतावनी जीवन बचा सकती है जो स्वचालित हो और सीमाओं को मिनटों में पार कर सके।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि इस विशिष्ट घटना को केवल जलवायु परिवर्तन का परिणाम बताना वैज्ञानिक रूप से जल्दबाजी होगी, लेकिन तेजी से गर्म होता हिमालय ग्लेशियरों, परमाफ्रॉस्ट, चट्टानी ढलानों और हिमनदीय झीलों की स्थिरता को प्रभावित कर रहा है।
“हिमालय हमारे पौत्रों से नहीं, हमसे बात कर रहा है।”
नेट ज़ीरो हिमालय की सुरक्षा से जुड़ा प्रश्न
डॉ. सिंह ने कहा कि आपदा प्रबंधन और जलवायु कार्रवाई को अलग-अलग नहीं देखा जा सकता।
“पूर्व चेतावनी हमें बचने के मिनट देती है; Net Zero उस मूल जोखिम को कम करने का प्रयास है जो आने वाले दशकों में ऐसी घटनाओं को अधिक गंभीर बना सकता है। इसलिए Net Zero केवल पर्यावरण का नारा नहीं, दीर्घकालिक आपदा सुरक्षा की रणनीति भी है।”
उन्होंने कहा कि स्वच्छ ऊर्जा, ऊर्जा दक्षता, हरित परिवहन, जल एवं अपशिष्ट प्रबंधन और प्राकृतिक पारिस्थितिकी का संरक्षण विकास रोकने का नहीं, बल्कि विकास को सुरक्षित और टिकाऊ बनाने का मार्ग है।
सरोजिनी नगर का पांच सूत्रीय संकल्प
Environment Warriors एवं Net Zero Sarojini Nagar अभियान की ओर से डॉ. सिंह ने पांच संकल्प रखे:
1. वृक्षारोपण नहीं, वृक्ष संरक्षण — सफलता का माप तीन वर्ष बाद जीवित वृक्षों की संख्या होगी।
2. तालाब, नाले और प्राकृतिक जलधाराओं का संरक्षण।
3. प्राकृतिक जल-निकासी मार्गों पर अतिक्रमण एवं अवैज्ञानिक निर्माण का विरोध।
4. Net Zero Sarojini Nagar को घर, विद्यालय और संस्थान तक पहुंचाना।
5. हिमालयी पारिस्थितिक सुरक्षा और सीमापार पूर्व चेतावनी का विषय विधानसभा में उठाना।
“जिस संकल्प की कोई कीमत न हो, वह संकल्प नहीं होता। इसे मापा जाए और इसके लिए मुझसे जवाब मांगा जाए।”
भारत–नेपाल हिमालयी आपदा लचीलापन साझेदारी
डॉ. सिंह ने कहा कि हिमालय राजनीतिक सीमाओं को नहीं पहचानता और भारत–नेपाल केवल सीमा ही नहीं, बल्कि नदियां, वन, परिवार, तीर्थमार्ग, संस्कृति और साझा पर्यावरणीय भविष्य भी साझा करते हैं।
उन्होंने भारत–नेपाल हिमालयी जलवायु एवं आपदा लचीलापन साझेदारी का प्रस्ताव रखते हुए तीन प्राथमिकताएं सुझाईं:
सीमापार पूर्व चेतावनी — खतरे की सत्यापित सूचना घंटों नहीं, मिनटों में सीमा पार पहुंचे।
साझा निगरानी एवं डेटा — ग्लेशियर, हिमनदीय झील, अस्थिर ढलानों और नदी प्रवाह की उपग्रह एवं सेंसर आधारित निगरानी तथा त्वरित डेटा साझाकरण।
जोखिम-संवेदी विकास — उच्च जोखिम वाली हिमालयी घाटियों में खतरा मानचित्रण, नदी सुरक्षा क्षेत्र, ढलान संरक्षण और वन पुनर्स्थापन।
उन्होंने इसके लिए एक स्पष्ट लक्ष्य प्रस्तावित किया:
“2030 तक प्रत्येक चिन्हित उच्च-जोखिम सीमापार हिमनदीय झील, अस्थिर बर्फीली संरचना और प्राथमिकता वाली ढलान को मानचित्रित कर सतत निगरानी एवं स्वचालित क्षेत्रीय पूर्व चेतावनी तंत्र से जोड़ा जाए।” पहले बचाव। फिर लचीलापन।
डॉ. सिंह ने कहा: “आज पहली जिम्मेदारी है—लापता लोगों को खोजना, फंसे लोगों को बचाना, घायलों का उपचार करना और शोकाकुल परिवारों के साथ खड़ा होना। बाकी हर बात—मेरी बात भी—उनके मिलने तक प्रतीक्षा कर सकती है।”
डॉ. राजेश्वर सिंह
विधायक, सरोजिनी नगर विधानसभा क्षेत्र (170), उत्तर प्रदेश
अंबिका मिश्रा
डायरेक्टर, अंबालिका इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी
कोऑर्डिनेटर, environment warrior
सिद्धार्थ हरीश
श्री पीतांबरा बगलामुखी सिद्ध पीठ उत्तराखंड ट्रस्ट
डेटा नोट: हताहत एवं लापता लोगों के आंकड़े 27 अगस्त 2026 की सुबह नेपाली अधिकारियों द्वारा जारी सूचना पर आधारित हैं। खोज एवं बचाव अभियान जारी होने के कारण आंकड़े परिवर्तनशील हैं। मीडिया संबंधी पूछताछ तथा किसी भी राष्ट्रीयता के लापता या फंसे व्यक्ति के परिवारों हेतु। सहायता हिंदी एवं अंग्रेजी में उपलब्ध।
संपर्क:
निखिल शर्मा
एडवोकेट : सुप्रीम कोर्ट
मोबाइल: 9717932608
Er. पीयूष मिश्रा | Environment Warrior टीम
मोबाइल / व्हाट्सऐप: +91 87870 09309
भारतीय दूतावास, काठमांडू — आपातकालीन सहायता
+977 985 131 6807 | +977 970 910 7500