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“सड़कें कुछ वर्षों के लिए बनती हैं, विद्यालय पीढ़ियों और राष्ट्र का निर्माण करते हैं” – डॉ. राजेश्वर सिंह
लखनऊ 11 सितंबर 2026
डॉ. राजेश्वर सिंह के लिए शिक्षा केवल एक जनप्रतिनिधि का दायित्व नहीं, बल्कि जीवन का संकल्प है। उनका निरंतर प्रयास है कि गरीबी, संसाधनों की कमी अथवा भौगोलिक दूरी किसी भी बच्चे की प्रतिभा और सपनों के मार्ग में बाधा न बने। कॉलेज का कार्यक्रम हो, ध्वजारोहण समारोह हो या किसी शोकाकुल परिवार को सांत्वना देने के लिए सुदूर गांव की यात्रा – वे हर अवसर पर शिक्षण संस्थानों को सशक्त बनाने और मेधावी विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने का माध्यम खोज लेते हैं।
31 अगस्त को अवध गर्ल्स डिग्री कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम के दौरान डॉ. राजेश्वर सिंह ने कॉलेज को सीएसआर के माध्यम से 5 स्मार्ट क्लासरूम उपलब्ध कराने की पहल की। उन्होंने कहा कि बेटियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, डिजिटल कौशल और वित्तीय साक्षरता से सशक्त बनाना आत्मनिर्भर एवं विकसित भारत के निर्माण की अनिवार्य शर्त है। आधुनिक तकनीक से सुसज्जित स्मार्ट क्लासरूम छात्राओं को बेहतर शैक्षिक संसाधन उपलब्ध कराने के साथ उनके सीखने के अनुभव को भी नई दिशा देंगे।
जनसेवा के प्रति उनकी संवेदनशीलता लोगों के सबसे कठिन समय में भी दिखाई देती है। स्वर्गीय प्रियंका सिंह के असामयिक निधन की जानकारी मिलने पर डॉ. सिंह ने उनके पति एवं पत्रकार श्री प्रभात सिंह से मुलाकात की। जब उन्हें ज्ञात हुआ कि स्वर्गीय प्रियंका सिंह गांव के बच्चों के लिए कक्षा पांच तक विद्यालय संचालित करती थीं, तो उन्होंने उनकी स्मृति में विद्यालय में अतिरिक्त कक्षों के निर्माण के लिए तत्काल विधायक निधि से ₹10 लाख की सहायता की घोषणा की। इससे शिक्षा के प्रति स्वर्गीय प्रियंका सिंह का संकल्प आगे बढ़ेगा और उनकी स्मृति पीढ़ियों तक बच्चों के उज्ज्वल भविष्य में जीवित रहेगी।
इसी प्रकार, सरोजनीनगर के एक अत्यंत सुदूर गांव में श्री राम रईस रावत के निधन पर शोक संवेदना व्यक्त करने पहुंचे डॉ. सिंह की दृष्टि वहां संचालित एक छोटे विद्यालय पर पड़ी। यह विद्यालय सीमित संसाधनों और झोपड़ियों से आरंभ होकर एक छोटे भवन तक पहुंचा था। श्री रावत के पुत्र श्री श्रवण कुमार रावत द्वारा पूरे समर्पण से विद्यालय संचालित किए जाने की जानकारी मिलने पर डॉ. सिंह ने अतिरिक्त कक्षों के निर्माण के लिए तत्काल विधायक निधि से ₹10 लाख देने की घोषणा की।
इस प्रकार, शिक्षा के क्षेत्र में आधारभूत सुविधाओं से लेकर आधुनिक डिजिटल संसाधनों तक, डॉ. राजेश्वर सिंह की पहल निरंतर विस्तार ले रही है। दोनों विद्यालयों को विधायक निधि से ₹10-₹10 लाख की सहायता प्रदान की जा रही है, जबकि अवध गर्ल्स डिग्री कॉलेज को सीएसआर के माध्यम से 5 स्मार्ट क्लासरूम उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इन प्रयासों का उद्देश्य विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षिक वातावरण, आधुनिक सुविधाएं और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप सीखने के अवसर उपलब्ध कराना है।
डॉ. राजेश्वर सिंह का मानना है कि समय पर मिला प्रोत्साहन किसी बच्चे के पूरे जीवन की दिशा बदल सकता है। एक ध्वजारोहण कार्यक्रम में उन्होंने गांव के मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित कराया तथा छह प्रतिभाशाली बच्चों को साइकिलें प्रदान कीं। वहीं, के.आर. मंगलम स्कूल के विद्यार्थियों से संवाद के दौरान जब एक छात्रा ने बताया कि उसने 85 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किए हैं और वह नीट की तैयारी करना चाहती है, तो डॉ. सिंह ने उसी क्षण उसे लैपटॉप उपहार में दिया।
ये केवल कुछ व्यक्तिगत उदाहरण नहीं, बल्कि सरोजनीनगर में निरंतर आगे बढ़ रहे व्यापक शैक्षिक अभियान का हिस्सा हैं। अब तक करीब 2,000 मेधावी विद्यार्थियों को लैपटॉप, कंप्यूटर और साइकिल प्रदान कर सम्मानित एवं प्रोत्साहित किया जा चुका है। इसके साथ ही 70 से अधिक विद्यालयों में स्मार्ट क्लास और डिजिटल लाइब्रेरी स्थापित कर हजारों बच्चों को आधुनिक एवं तकनीक आधारित शिक्षा से जोड़ा गया है।
अपनी प्राथमिकताओं को स्पष्ट करते हुए डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा:
“सड़कें कुछ वर्षों के लिए बनती हैं, लेकिन विद्यालय पीढ़ियों का निर्माण करते हैं और राष्ट्र की दिशा बदलते हैं। सड़कें स्थानों को जोड़ती हैं, जबकि शिक्षा बच्चों को अवसरों से और देश को उसके उज्ज्वल भविष्य से जोड़ती है। इसीलिए मेरी प्राथमिकताएं बिल्कुल स्पष्ट हैं – अधिकतम संभव संसाधन विद्यालयों, डिजिटल शिक्षा और बच्चों के भविष्य पर खर्च किए जाने चाहिए।”
उन्होंने आगे कहा:
“हमारे द्वारा निर्मित प्रत्येक कक्षा, उपलब्ध कराया गया प्रत्येक कंप्यूटर और प्रोत्साहित किया गया प्रत्येक मेधावी बच्चा भारत के भविष्य में किया गया निवेश है। मेरा संकल्प है कि संसाधनों के अभाव में किसी भी प्रतिभाशाली बच्चे का सपना अधूरा न रहे।”
डॉ. राजेश्वर सिंह का ध्येय स्पष्ट है – हर विद्यालय सशक्त बने, हर प्रतिभा को प्रोत्साहन मिले और शहर के प्रतिष्ठित कॉलेज से लेकर सुदूर गांव के छोटे विद्यालय तक, प्रत्येक बच्चे को सीखने, आगे बढ़ने और अपने सपने साकार करने का समान अवसर प्राप्त हो।