यूपी लाइव न्यूज 24 उत्तर प्रदेश
सह संपादक कपिल गुप्ता
ओबरा डी व अनपरा ई परियोजनाएं उत्पादन निगम को सौंपी जाएं
लखनऊ विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के पदाधिकारियों ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025–26 में उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड ने लगभग 81% डीम्ड प्लांट लोड फैक्टर (PLF) हासिल कर पिछले 7 वर्षों का नया कीर्तिमान स्थापित किया है। यह उपलब्धि सीमित संसाधनों के बावजूद सरकारी क्षेत्र की दक्षता, प्रतिबद्धता और तकनीकी क्षमता का सशक्त प्रमाण है। संघर्ष समिति ने उत्पादन निगम के बिजली कर्मचारियों,संविदा कर्मियों, जूनियर इंजीनियरों और अभियंताओं को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी है।
संघर्ष समिति ने कहा कि इस शानदार प्रदर्शन के आधार पर 3 वर्ष पूर्व एन टी पी सी के साथ ज्वाइंट वेंचर में दी गई 2×800 मेगावाट अनपरा ई एवं 2×800 मेगावाट ओबरा डी परियोजनाएं अब पुनः उत्पादन निगम को सौंपी जानी चाहिए, ताकि इन्हें रिकॉर्ड समय में पूरा कर प्रदेश को सस्ती बिजली उपलब्ध कराई जा सके।
संघर्ष समिति ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025–26 में उत्पादन निगम की विभिन्न तापीय परियोजनाओं ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। प्रमुख आंकड़े इस प्रकार हैं:
अनपरा ए परियोजना – 80.39%
अनपरा बी परियोजना – 87.45%
अनपरा डी परियोजना – 88.93%
ओबरा बी परियोजना – 60.53%
ओबरा सी परियोजना – 65.27%
हरदुआगंज परियोजना – 92.17%
पारीछा परियोजना – 88.31%
जवाहरपुर परियोजना – 82.60%
पनकी परियोजना – 78.43%
इन सभी परियोजनाओं के उत्कृष्ट प्रदर्शन के परिणामस्वरूप कुल मिलाकर लगभग 81% डीम्ड पीएलएफ प्राप्त हुआ, जो अपने आप में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
संघर्ष समिति ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों, विशेषकर खाड़ी क्षेत्र में तनाव के कारण गैस आधारित उत्पादन पर अनिश्चितता और संभावित ऊर्जा संकट के बीच, उत्पादन निगम का यह प्रदर्शन अत्यंत सराहनीय और रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
संघर्ष समिति ने आगे कहा कि आगामी गर्मियों में उत्तर प्रदेश में बिजली की मांग 36,000 मेगावाट तक पहुंचने की संभावना है। ऐसे समय में उत्पादन निगम के सभी बिजलीघर और इंजीनियर पूरी क्षमता के साथ बिजली उत्पादन के लिए प्रतिबद्ध हैं और निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने का संकल्प लेते हैं।
संघर्ष समिति ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि: ओबरा डी एवं अनपरा ई परियोजनाओं के ज्वाइंट वेंचर निर्णय पर पुनर्विचार किया जाए और इन परियोजनाओं को पुनः उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड को सौंपा जाए ताकि इन्हें शीघ्र पूर्ण कर प्रदेश को सस्ती और विश्वसनीय बिजली उपलब्ध कराई जा सके।
संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया कि सरकारी क्षेत्र की सिद्ध क्षमता को नजरअंदाज कर निजी या ज्वाइंट वेंचर मॉडल थोपना न तो आर्थिक दृष्टि से उचित है और न ही जनहित में।