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मुख्य संपादक प्रवीण सैनी लखनऊ
डॉ. राजेश्वर सिंह का फोरेंसिक विज्ञान को संबल: यूपी एस आई एफ एस के विकास एवं संसाधन विस्तार के लिए विधायक निधि से पच्चीस लाख घोषणा की है
ड्रोन लैब, डीएनए लैब का किया अवलोकन, वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया
डॉ. राजेश्वर सिंह की पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता: कॉलेज परिसर में कराया वृक्षारोपण
सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस , औरांव, दरोगा खेड़ा, लखनऊ में आयोजित “ क्राइम सीन मैनेजमेंट कोर्स के समापन में मुख्य अतिथि के रूप में सहभागिता की। इस अवसर पर उन्होंने प्रशिक्षुओं, अधिकारियों एवं विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि फोरेंसिक विज्ञान आधुनिक अपराध जांच एवं न्याय व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी बन चुका है तथा वैज्ञानिक साक्ष्य ही निष्पक्ष और प्रभावी न्याय की सबसे मजबूत नींव हैं।
कार्यक्रम के दौरान डॉ. राजेश्वर सिंह ने संस्थान परिसर में वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल एक अभियान नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी जिम्मेदारी है। इसके पश्चात उन्होंने अत्याधुनिक ड्रोन लैब एवं डीएनए लैब का भ्रमण कर फोरेंसिक विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में हो रहे नवाचारों का अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीकों के माध्यम से अपराध अनुसंधान एवं न्याय व्यवस्था को और अधिक प्रभावी, पारदर्शी एवं विश्वसनीय बनाया जा सकता है।
अपने संबोधन में डॉ. राजेश्वर सिंह ने संस्थान के संस्थापक निदेशक डॉ. जी. के. गोस्वामी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि अल्प समय में UPSIFS ने फोरेंसिक शिक्षा, अनुसंधान एवं प्रशिक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह संस्थान आने वाले समय में देश ही नहीं बल्कि विश्व के अग्रणी फॉरेंसिक संस्थानों में अपना स्थान बनाएगा।
उन्होंने प्रशिक्षुओं को संबोधित करते हुए कहा कि “आज के ये बच्चे ही कल के फॉरेंसिक विशेषज्ञ और न्याय व्यवस्था की सबसे मजबूत कड़ी बनेंगे।” उन्होंने कहा कि देश को ऐसे प्रशिक्षित, संवेदनशील और तकनीकी रूप से दक्ष युवाओं की आवश्यकता है जो वैज्ञानिक जांच के माध्यम से न्याय व्यवस्था को और अधिक सशक्त बना सकें।
डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि वर्तमान समय में अपराधों का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। डिजिटल अरेस्ट, साइबर फ्रॉड, ऑनलाइन वित्तीय अपराध, डेटा चोरी तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित अपराध कानून प्रवर्तन एजेंसियों के सामने नई चुनौतियां प्रस्तुत कर रहे हैं। ऐसे में डिजिटल फॉरेंसिक्स एवं डिजिटल साक्षरता भविष्य की अनिवार्य आवश्यकता बन चुके हैं।
उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक जांच न केवल अपराधियों को दंडित करने में सहायक होती है, बल्कि निर्दोष लोगों को न्याय दिलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। डीएनए फिंगरप्रिंटिंग, डिजिटल फॉरेंसिक्स, साइबर इंटेलिजेंस तथा वित्तीय फॉरेंसिक्स जैसी आधुनिक तकनीकों ने अपराध जांच की दिशा और प्रभावशीलता दोनों को नया आयाम दिया है।
फोरेंसिक शिक्षा, अनुसंधान एवं तकनीकी नवाचार को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से डॉ. राजेश्वर सिंह ने संस्थान के विकास, आधुनिकीकरण एवं अत्याधुनिक संसाधनों के विस्तार हेतु विधायक निधि से ₹25 लाख की सहायता प्रदान किए जाने की घोषणा की। उन्होंने संस्थान को वैश्विक स्तर की सुविधाओं से सुसज्जित करने तथा इसे विश्व के शीर्ष फॉरेंसिक संस्थानों में स्थापित करने के लिए हरसंभव सहयोग का आश्वासन भी दिया।
इस अवसर पर संस्थान के संस्थापक निदेशक डॉ. जी. के. गोस्वामी, आई.जी./अपर निदेशक श्री राजीव मल्होत्रा (IPS), डी.आई.जी. श्री हेमराज मीणा (IPS), उप निदेशक (प्रशासन) श्री जितेन्द्र कुमार श्रीवास्तव, श्री धीराजीत मुखर्जी, श्री अतुल यादव, श्री शंकरजी सिंह, श्री राजेश चौहान, श्री के. एन. सिंह सहित संस्थान के वरिष्ठ अधिकारी, प्रशिक्षु एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में पार्षद प्रतिनिधि श्री लवकुश रावत, पूर्व प्रधान श्री पवन सिंह तथा श्री अभिषेक सिंह भी उपस्थित रहे।
डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि ज्ञान, तकनीक, अनुसंधान और पर्यावरण संरक्षण के समन्वय से ही सुरक्षित, सक्षम और विकसित भारत का निर्माण संभव है। UPSIFS जैसे संस्थान भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए देश को प्रशिक्षित मानव संसाधन और वैज्ञानिक क्षमता प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे