गविष्ठि (गौ रक्षार्थ धर्मयुद्ध) – जिला मैनपुरी में जगद्गुरु शंकराचार्य जी का भव्य स्वागत

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यूपी लाइव न्यूज 24 उत्तर प्रदेश

मुख्य संपादक प्रवीण सैनी लखनऊ

*’शंकराचार्य शासकों के शासक हैं — संसद् के किसी कानून ने यह पद समाप्त नहीं किया’ — ‘असली बनाम नकली हिन्दू — काशी का थर्मामीटर परीक्षण’* —
*’कश्मीर के मुसलमानों ने गाय की रक्षा करने वाली रणबीर दंड संहिता बहाल करने की गुहार लगाई’—’आज देश का मुसलमान वो बात कह रहा है जो तथाकथित हिन्दू सम्राट नहीं कह पा रहा’—’अखिलेश ने दिल का बड़प्पन दिखाया—एकनाथ शिंदे ने हिम्मत’—’75 करोड़ सनातनी हिन्दुओं की कोई राजनीतिक आवाज़ नहीं’*
जिला: मैनपुरी, उत्तर प्रदेश |
मूल मन्त्र: “अहं हनं वृत्रं गविष्ठौ”

*”आज देश का मुसलमान वो बात कह रहा है जो तथाकथित हिन्दू सम्राट नहीं कह पा रहा। मुस्लिम बंधु मैनपुरी में हमारे पास आए और कहा : प्रधानमंत्री जी तक यह बात पहुंचाएं — गाय को जल्द से जल्द राष्ट्र-माता घोषित करें और जो भगवा वस्त्र पहनकर, गोरक्षपीठ के महंत होकर बैठे हैं — उनकी जीभ अटक रही है।”—’परमाराध्य’ परमधर्मधीश उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर अनन्तश्रीविभूषित जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानन्द: सरस्वती ‘१००८’*

मैनपुरी। ऐतिहासिक 81 दिवसीय ‘गविष्ठि (गौ रक्षार्थ धर्मयुद्ध)’ (3 मई – 24 जुलाई 2026) के क्रम में ‘परमाराध्य’ परमधर्मधीश उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर अनन्तश्रीविभूषित जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानन्द: सरस्वती ‘१००८’ को जिला मैनपुरी में जगह-जगह भव्य स्वागत मिला। प्रत्येक स्थान पर उपस्थित जनसमुदाय ने वैदिक मंत्र “अहं हनं वृत्रं गविष्ठौ” का सामूहिक उच्चारण करते हुए गौ रक्षा का संकल्प लिया।
‘शंकराचार्य शासकों के शासक हैं — संसद् के किसी कानून ने यह पद समाप्त नहीं किया’
महाराजश्री ने सनातन धर्म के तीन स्तरीय शासन की गहरी व्याख्या की — जो प्रायः समाज नहीं जानता। किसी भी समाज का लगभग 85% भाग वह है जो सही-गलत बताने मात्र से मान जाता है। 10% के लिए राजा — राज्यसत्ता — की जरूरत पड़ती है। शेष 4-5% न गुरु को मानता है न राजा को — उनका शासन यमराज करते हैं। ‘गुरु समाज के सबसे बड़े भाग पर शासन करता है। राजा का कानून केवल 10% तक पहुंचता है। धर्मदण्ड के बिना राजा भी समाज नहीं संभाल सकता।’
उन्होंने समझाया कि वे राजचिह्न — सिंहासन, राजदंड — क्यों धारण करते हैं: ‘शंकराचार्य केवल सन्यासी नहीं हैं। केवल मठाधीश नहीं हैं। वे सनातन धर्म के सर्वोच्च शासक हैं — पूरे विश्व के धार्मिक जीवन का संचालन करने के लिए नियुक्त। अंग्रेजों ने राजाओं को समाप्त किया — लेकिन संसद के किसी कानून ने शंकराचार्य के पद और उनके अधिकारों को नहीं बदला। भारत को आज भी शंकराचार्य का मार्गदर्शन मानना है और इसीलिए जो लोग राजनीतिक और धार्मिक सत्ता एक में मिलाना चाहते हैं, उन्हें पहले हमें हटाना होगा — क्योंकि जब तक हम हैं, उनका धर्मदण्ड का दावा नहीं चलेगा।’
‘असली बनाम नकली हिन्दू — काशी का थर्मामीटर परीक्षण’
महाराजश्री ने उस धारणा को दूर किया कि दो भगवाधारी आपस में लड़ रहे हैं। ‘एक जैसी दिखने वाली दो चीजें, दोनों असली नहीं हो सकतीं। एक असली है, एक नकली। हमने थर्मामीटर लगाया: काशी गए, 40 दिन दिए। कहा: गाय को राज्य माता घोषित करो। 40 दिन बीते। कोई घोषणा नहीं। थर्मामीटर का परिणाम स्पष्ट: नकली। हमारा थर्मामीटर ? जहाँ चाहे लगाओ — असली, असली, असली।’
उन्होंने कहा: ‘मुख्यमंत्री शंकराचार्य कभी नहीं बन सकते — चाहे जितनी कोशिश करें — क्योंकि उनका अधिकार बाहर से आता है। शंकराचार्य मुख्यमंत्री बनें? हम जो पहले से हैं उसका एक अंश क्यों बनें? हम पूरे विश्व के गुरु हैं। CM एक देश के 30 में से एक प्रदेश का मुखिया है।’
‘कश्मीर के मुसलमानों ने गाय की रक्षा करने वाली रणबीर दंड संहिता बहाल करने की गुहार लगाई’
महाराजश्री ने पिछली भारत यात्रा का एक मार्मिक प्रसंग सुनाया। कश्मीर में एक बुजुर्ग मुसलमान ने उनसे मुलाकात की और कहा: ‘हमारे यहाँ रणबीर दंड संहिता लागू थी — कश्मीर के मूल राजा का बनाया कानून — जिसमें गाय की हत्या पर 10 साल कठोर कारावास और एक किलो मांस रखने पर एक साल की सजा थी। इस कानून के कारण हम कश्मीरी मुसलमान गाय नहीं खाते थे। हमारे बच्चों की यह आदत नहीं थी। अब इस सरकार ने धारा 370 हटाने के साथ रणबीर दंड संहिता भी हटा दी। अब कश्मीर में गाय काटना आसान है — कोई कानून नहीं। हमारे बच्चों में यह नई आदत पड़ रही हैं और हम नहीं चाहते। शंकराचार्य जी, इसे बहाल करवाइए।’
महाराजश्री ने कहा: ‘एक मुसलमान बुजुर्ग आँखों में आँसू लेकर एक हिन्दू राजा के कानून को बहाल करवाने की गुहार लगा रहा है। यही भारत की असली जमीनी सच्चाई है — जिसे तथाकथित हिन्दू रक्षकों ने ढक दिया है।’
मैनपुरी में मुस्लिम बंधुओं का प्रतिनिधिमंडल — ‘गाय को राष्ट्र माता घोषित करें’
मैनपुरी की सभा में मुस्लिम बंधुओं का एक प्रतिनिधिमंडल — जिसमें मदीन इलाही, मोहम्मद खालिद, रऊफ कुरैशी, श्याम खान, मोहम्मद एजाज, मुजाहिद मंसूरी, अंसारी, नियाज खान, परवेज खान, इकरार अली, नौशाद मोहम्मद और अजहर खान शामिल थे — महाराजश्री से मिला। उनकी माँग: ‘प्रधानमंत्री जी तक यह बात पहुंचाएं — गाय को जल्द से जल्द राष्ट्र-माता घोषित करें।’
महाराजश्री ने कहा: ‘आज देश का मुसलमान वो बात कह रहा है जो तथाकथित हिन्दू सम्राट नहीं कह पा रहा। जो भगवा पहनता है, गोरक्षपीठ का महंत है — उसकी जीभ अटकती है। और ये मुस्लिम बंधु, जिन पर कोई दायित्व नहीं — वे आगे आकर यह माँग करते हैं। जिन्होंने इस बक़रीद लाखों गायें बचाईं — उन्हें पशुबुद्धि कहना किस हिन्दुत्व का प्रमाण है? हिन्दुत्व की असली कसौटी भाषा नहीं है — कसौटी यह है: क्या आप कह सकते हैं कि गाय मेरी माता है? जो कह सकते हैं, वे हिन्दू। जो नहीं कह सकते — चाहे कोई भी वस्त्र पहनें, चाहे कोई भी दावा करें — वे नहीं हैं।’
‘UP = United Province — ठीक उसी तरह अंग्रेज़ की दी हुई पशु संज्ञा भी हम लिए बैठे हैं’
महाराजश्री ने एक तीखा भाषा वैज्ञानिक अवलोकन किया: उत्तर प्रदेश कोई प्राचीन नाम नहीं है। यह अंग्रेज़ों का United Province है। ‘अंग्रेज़ चले गए लेकिन UP छोड़ गए — हमने United को उत्तर और Province को प्रदेश कर लिया। ठीक उसी तरह अंग्रेज़ों ने गाय को पशु सूची में डाला — हमने वह भी रखा। 77 वर्ष की आज़ादी — और किसी ने नहीं सोचा कि इसे बदल दें। कम से कम जब नए CM बने तो किसी दिन पशु सूची में गाय का नाम देखकर एक असली हिन्दू का दिल जलता। वह जलन कभी नहीं हुई।’
’75 करोड़ सनातनी हिन्दुओं की कोई राजनीतिक आवाज़ नहीं — सत्य सनातन की राजनीति शुरू होनी चाहिए’
महाराजश्री ने एक मूलभूत राजनीतिक सच्चाई उजागर की: भाजपा के अध्यक्ष ने एक बार 10 करोड़ सदस्यों की घोषणा की। समर्थकों को जोड़ें तो शायद 25 करोड़। ‘लेकिन भारत में 100 करोड़ हिन्दू हैं। अगर 25 करोड़ भाजपा के हैं — तो 75 करोड़ कौन हैं? वे सच्चे सनातनी हिन्दू हैं जो धर्म के अनुसार चुपचाप जीवन जीते हैं, राजनीतिक नारेबाजी नहीं करते। उनका कोई नेता नहीं। कोई पार्टी नहीं। वे सबसे बड़ा वर्ग हैं — और वे बेआवाज़ हैं। इसी बेआवाज़ी का फायदा उठाकर 25% राजनीतिक हिन्दू पूरे हिन्दू समाज के प्रतिनिधि बन जाते हैं। इसलिए सत्य सनातन की राजनीति शुरू होनी चाहिए।’
‘अखिलेश ने दिल का बड़प्पन दिखाया — एकनाथ शिंदे ने हिम्मत’
महाराजश्री ने कन्नौज प्रसंग का उल्लेख किया — जहाँ प्रशासन ने आयोजक को धमकी दी और महाराजश्री को सड़क पर पूरी रात बितानी पड़ी। अगले दिन सवेरे अखिलेश यादव ने अपना प्रतिनिधि भेजकर माफी मांगी — उस अन्याय के लिए जो उन्होंने किया ही नहीं था। ‘जिसकी गलती नहीं, उसने माफी मांगी। यही बड़ा दिल है।’ उन्होंने कहा: ‘आज भारत में मुझे दो नेता दिखते हैं: एकनाथ शिंदे — जिन्होंने गठबंधन की अनिच्छा के बावजूद गौ राज्य माता घोषित करने की हिम्मत दिखाई और अखिलेश यादव — जो गलती होने पर उसे स्वीकार करने का साहस रखते हैं। दोनों गुण दुर्लभ हैं।’
श्री राजू यादव जी मैनपुरी विधानसभा प्रतिनिधि नियुक्त — एक नोट अभियान
मैनपुरी की सभा में श्री राजू यादव जी आगे आए और उपस्थित जनसमुदाय के समर्थन से उन्हें विधानसभा में अभिनव गौधाम स्थापना के लिए एक नोट अभियान का प्रतिनिधि नियुक्त किया गया। महाराजश्री ने कहा: ‘हर निवासी — बच्चा, बूढ़ा, नारी — ₹1 से ₹500 का एक नोट निकाले। उस राशि से गौधाम बनेगा, जहाँ गौ माता सज-धजकर, प्रसन्न होकर विराजमान हों और रोम-रोम से आशीर्वाद दें। हमने उन्हें चित्रों में ही सजा देखा है — गौधाम इसे वास्तविक बनाएगा।’
सामूहिक संकल्प — तीन आह्वान — चक्रधारी मुद्रा
महाराजश्री ने उपस्थित जनसमुदाय से सामूहिक घोषणा करवाई:
“मैं आज सार्वजनिक रूप से घोषणा करता/करती हूँ कि गाय मेरे लिए पशु नहीं — माता है। जो उन्हें पशु कहे, चोट पहुँचाए या साथ दे — आज से उससे मेरा सम्बन्ध टूटा। आने वाले चुनाव में एक vote, एक नोट और एक घोषणा — केवल उस पार्टी या प्रत्याशी के लिए जो माता घोषित करके आए।”
तत्पश्चात: चक्रधारी मुद्रा में वैदिक संकल्प “अहं हनं वृत्रं गविष्ठौ” का सामूहिक उच्चारण कराया गया। महाराजश्री ने स्मरण दिलाया: ‘एक चोट, एक वोट, एक नोट — यही इस यात्रा का आह्वान है।’
24 जुलाई को लखनऊ में एक अक्षौहिणी सेना का महासंकल्प
3 मई 2026 को गोरखपुर से प्रारम्भ हुई गविष्ठि यात्रा उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभाओं की परिक्रमा कर रही है। यदि 81 दिनों की यात्रा पूर्ण होने तक सरकार ने ठोस कदम नहीं उठाए, तो 24 जुलाई 2026 को लखनऊ में एक अक्षौहिणी सेना — 2,18,700 धर्म सैनिकों के साथ अगले चरण की घोषणा की जाएगी।

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