डॉ. राजेश्वर सिंह ने फोरेंसिक विज्ञान को बताया न्याय व्यवस्था की रीढ़, विद्यार्थियों को दिलाया “सत्य के प्रहरी” बनने का संकल्प

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यूपी लाइव न्यूज़ 24उत्तर प्रदेश

मुख्य संपादक प्रवीण सैनी

सत्यमेव जयते के मूल भाव को आत्मसात करते हुए माननीय विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने आज UPSIFS, औरावां-दरोगा खेड़ा-बंथरा में आयोजित “नवारंभ 2026” के उद्घाटन समारोह में विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि फोरेंसिक विज्ञान विधि विज्ञान और मानवीय विवेक का संगम है। माननीय विधायक ने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे केवल विद्यार्थी नहीं बल्कि न्याय के वैज्ञानिक बनकर उभरें।

इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में श्री असीम अरुण जी, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) समाज कल्याण विभाग उत्तर प्रदेश, डॉ. जी.के. गोस्वामी, संस्थापक निदेशक (UPSIFS), के.एम.एस. सुंदरम (आईएएस), प्रमुख सचिव – श्रम विभाग उत्तर प्रदेश शासन, एवं प्रो. अमरपाल सिंह, कुलपति डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (RMLNLU) लखनऊ के अतिरिक्त अपर निदेशक, उप निदेशकगण, संकाय सदस्य, प्रशासनिक अधिकारीगण, अभिभावकगण एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

डॉ. राजेश्वर सिंह ने फ्रांसीसी अपराधशास्त्री एडमंड लोकार्ड के सिद्धांत “प्रत्येक संपर्क एक चिह्न छोड़ता है” का उल्लेख करते हुए कहा कि डीएनए प्रोफाइलिंग (सर एलेक जेफ्रीज़ 1984, त्रुटि दर एक अरब में एक से भी कम), फिंगरप्रिंट विज्ञान (विश्व का प्रथम फिंगरप्रिंट ब्यूरो कलकत्ता 1897, अज़ीज़ुल हक एवं हेम चंद्र बोस द्वारा स्थापित), बैलिस्टिक्स, विष विज्ञान (GC-MS, HPLC तकनीक) तथा साइबर फोरेंसिक — ये सभी न्याय व्यवस्था के अपरिहार्य स्तंभ हैं। भारतीय न्याय संहिता (BNS) के अंतर्गत सात वर्ष या उससे अधिक की सजा वाले अपराधों में फोरेंसिक परीक्षण अनिवार्य किए जाने के पश्चात देशभर में लगभग 6 लाख तथा उत्तर प्रदेश में लगभग 72,000 से 90,000 प्रकरणों में फोरेंसिक परीक्षण अनिवार्य रूप से अपेक्षित होगा, जो इस क्षेत्र के प्रशिक्षित युवाओं की व्यापक मांग को दर्शाता है।

गृह मंत्रालय के C-14 पोर्टल पर वर्ष 2024 से 2026 के मध्य लगभग 53 लाख साइबर धोखाधड़ी संबंधी शिकायतें दर्ज हुईं, जिनमें से लगभग 1.8 लाख प्राथमिकी (FIR) में परिवर्तित हुईं तथा इनसे जुड़ी कुल राशि लगभग ₹56,000 करोड़ आंकी गई। भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए बताया गया कि 30 जून 2026 तक 32.80 लाख शिकायतों में ₹11,158 करोड़ की धनराशि बचाई गई है। संदिग्ध रजिस्ट्री (Suspect Registry) के माध्यम से 18.43 लाख संदिग्ध पहचानकर्ताओं एवं 24.67 लाख म्यूल बैंक खातों के आधार पर ₹8,031.56 करोड़ की धोखाधड़ी वाले लेनदेन अवरुद्ध किए गए हैं। I4C-समर्थित कार्रवाई से 16,840 गिरफ्तारियां हुई हैं।

देशभर में केवल 7 केंद्रीय डिजिटल फोरेंसिक प्रयोगशालाएं एवं 24 राज्य फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाएं (FSL) कार्यरत हैं, तथा 3,211 स्वीकृत FSL पदों में से 40% रिक्त पड़े हैं। जून 2026 में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने डिजिटल फोरेंसिक को राष्ट्रीय प्राथमिकता घोषित किया है। नवीनतम NCRB रिपोर्ट “Crime in India 2024” (मई 2026 में प्रकाशित) के अनुसार भारत में वर्ष 2024 में कुल 58.86 लाख संज्ञेय आपराधिक मामले दर्ज हुए, जो वर्ष 2023 के 62.42 लाख मामलों की तुलना में लगभग 6% की गिरावट दर्शाते हैं। इनमें से अनुमानतः 8-10% अर्थात 4.5-6 लाख मामले सात वर्ष या अधिक सजा वाले अपराधों से संबंधित हैं।

डॉ. राजेश्वर सिंह ने विद्यार्थियों से चार मूल अपेक्षाएं व्यक्त कीं — सर्वोपरि सत्यनिष्ठा, चरित्र के रूप में शुद्धता एवं सटीकता, निरंतर अध्ययन की प्रवृत्ति, तथा जिनकी सेवा में वे कार्यरत हैं — पीड़ित परिवार, शिकायतकर्ता एवं अभियुक्त — उनका सदैव स्मरण। उन्होंने स्मरण कराया कि फोरेंसिक रिपोर्ट पर हस्ताक्षर किसी प्रकरण की दिशा एवं न्याय की गति को सदैव के लिए बदल सकते हैं, अतः व्यावसायिकता में किसी भी प्रकार की शिथिलता अस्वीकार्य है।

इस अवसर पर एक विशेष घोषणा करते हुए बताया गया कि पिता स्वर्गीय श्री आर.बी. सिंह की स्मृति में प्रत्येक वर्ष संस्थान के सर्वश्रेष्ठ विद्यार्थी को ₹1,00,000 की नकद पुरस्कार राशि प्रदान की जाएगी, जो आगामी बैच से ही प्रारंभ होगी।

समारोह के समापन पर डॉ. गोस्वामी एवं उनकी संपूर्ण टीम को इस उत्कृष्ट संस्थान की स्थापना हेतु बधाई दी गई तथा सरोजनी नगर विधायक के रूप में संस्थान को पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया ।

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