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प्रदेश में आधुनिक फॉरेंसिक विज्ञान एवं तकनीकी अनुसंधान को प्रोत्साहित करने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की डॉ. राजेश्वर सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सराहना
लखनऊ। सरोजनीनगर स्थित उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस (UPSIFS) में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘टेक संगम 2026’ में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), क्वांटम तकनीक, साइबर फॉरेंसिक और डिजिटल साक्ष्यों के भविष्य पर व्यापक विमर्श हुआ। सम्मेलन के दौरान पुस्तक ‘AI in Construction’ का विमोचन किया गया, ‘The Light of Bharat’ कृति भेंट की गई तथा ‘LEXQ लैब’ की आधारशिला रखी गई।
माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने डीपफेक, पहचान की चोरी और डिजिटल साक्ष्यों से जुड़ी चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि इनसे निपटने के लिए विश्वसनीय तकनीकी व्यवस्था और वैज्ञानिक जाँच की मजबूत प्रणाली आवश्यक है। उन्होंने समयबद्ध न्याय सुनिश्चित करने में फॉरेंसिक विज्ञान की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया।
उत्तर प्रदेश में फॉरेंसिक सुविधाओं के विस्तार का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2017 में प्रदेश में केवल एक फॉरेंसिक लैब थी, जबकि अब 12 क्षेत्रीय फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाएँ तैयार हो चुकी हैं और शेष 6 प्रयोगशालाओं का निर्माण अंतिम चरण में है। यह विस्तार अपराधों की वैज्ञानिक जाँच और न्यायिक प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
सरोजनीनगर के विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के आयोजन और प्रदेश में आधुनिक फॉरेंसिक विज्ञान एवं तकनीकी अनुसंधान को प्रोत्साहित करने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरोजनीनगर में विश्वस्तरीय संस्थान और अंतरराष्ट्रीय संवाद का आयोजन क्षेत्र के लिए गौरव का विषय है। ऐसे प्रयास उत्तर प्रदेश को वैज्ञानिक अनुसंधान, तकनीकी नवाचार और आधुनिक अपराध जाँच के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने में सहायक होंगे।
डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता और आधुनिक तकनीक का वास्तविक उद्देश्य मानव कल्याण, नागरिक अधिकारों की रक्षा और न्याय व्यवस्था को अधिक सुलभ बनाना होना चाहिए। AI निर्णय प्रक्रिया को गति देने और डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, लेकिन तकनीक के उपयोग में मानवीय विवेक, जवाबदेही और संवेदनशीलता बनाए रखना आवश्यक है। डीपफेक, पहचान की चोरी और साइबर अपराधों जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए सुरक्षित एवं विश्वसनीय डिजिटल व्यवस्था विकसित करना समय की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि आधुनिक फॉरेंसिक सुविधाएँ जाँच एजेंसियों की क्षमता बढ़ाने, डिजिटल साक्ष्यों का वैज्ञानिक विश्लेषण करने और न्यायिक प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने में योगदान दे सकती हैं।
डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि सरोजनीनगर स्थित उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक एवं वैज्ञानिक संस्थान है। ‘टेक संगम 2026’ जैसे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों, नीति-निर्माताओं और शोधकर्ताओं को एक साझा मंच प्रदान करते हैं। इससे नए विचारों, अनुसंधान और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा मिलने की संभावनाएँ मजबूत होती हैं।
उन्होंने कहा कि सरोजनीनगर में इस स्तर के अंतरराष्ट्रीय संवाद का आयोजन पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है। ऐसे प्रयास युवाओं के लिए विज्ञान, तकनीक और अनुसंधान के नए अवसरों का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं।
तेजी से बढ़ते साइबर अपराधों का उल्लेख करते हुए डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि डिजिटल युग में अपराधों का स्वरूप लगातार बदल रहा है। ऐसे में साइबर फॉरेंसिक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और आधुनिक तकनीकी उपकरणों के माध्यम से डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण तथा अपराधों की जाँच अधिक प्रभावी बनाई जा सकती है।
I4C के आँकड़ों के अनुसार, नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज शिकायतें वर्ष 2021 में 2.63 लाख से बढ़कर वर्ष 2025 में 24.03 लाख हो गईं, जबकि रिपोर्ट की गई साइबर धोखाधड़ी की राशि 551 करोड़ रुपये से बढ़कर 22,495 करोड़ रुपये तक पहुँच गई। ये आँकड़े साइबर सुरक्षा, डिजिटल जागरूकता और तकनीकी जाँच क्षमताओं को मजबूत करने की आवश्यकता को रेखांकित करते हैं।
कार्यक्रम में संजय प्रसाद, अपर मुख्य सचिव (गृह), उत्तर प्रदेश शासन; राजीव कृष्ण, पुलिस महानिदेशक, उत्तर प्रदेश; संजय सचदेवा, महानिदेशक, रक्षा साइबर एजेंसी, भारत सरकार; प्रो. अभय करंदीकर, सदस्य, नीति आयोग, भारत सरकार; डॉ. तनुजा सिंह, अध्यक्ष, इंडियानापोलिस विश्वविद्यालय, अमेरिका; तथा डॉ. जी.के. गोस्वामी, निदेशक, UPSIFS, लखनऊ सहित अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
डॉ. राजेश्वर सिंह ने विश्वास व्यक्त किया कि विज्ञान, क्वांटम तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता का विवेकपूर्ण उपयोग न्याय व्यवस्था के आधुनिकीकरण, नागरिकों की सुरक्षा और प्रदेश के तकनीकी विकास को नई दिशा देगा। उन्होंने कहा कि सरोजनीनगर में ऐसे संस्थानों और अंतरराष्ट्रीय संवादों का आयोजन क्षेत्र को ज्ञान, अनुसंधान और नवाचार के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में सार्थक कदम है।