यूपी लाइव न्यूज़ 24 उत्तर प्रदेश
आज की बैठक महत्वपूर्ण है। फिर से कांग्रेस के कंधों पर अंग्रेजी राज की तरह ही भारत के लोकतंत्र और संविधान को बचाने की ऐतिहासिक जिम्मेवारी खड़ी है। अंग्रेजों से हमने वोट का हक छीनकर लिया था। आज उसी हक को बचाने के लिए फिर लड़ना पड़ रहा है।
हमारे पुरखों ने जिस मजबूत लोकतंत्र की नींव अपने त्याग और बलिदानों से रखी थी, लोकतंत्र की उस नींव को मोदी सरकार ने 12 वर्षों में षड्यंत्रकारी तरीके से खोखला कर दिया है।
साजिश के साथ लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाये जा रहे हैं और मुख्य चुनाव आयुक्त मोदी सरकार की कठपुतली बन गया है। यह भारतीय लोकतंत्र की उस सोच और भावना के विपरीत है, जिसके तहत यह तय किया गया कि हर योग्य नागरिक का वोट सुरक्षित हो और हर वोट की निष्पक्ष गिनती हो।
बाबा साहेब डॉ. अंबेडकर जी ने 15 जून 1949 को संविधान सभा में कहा था —
-कोई भी व्यक्ति, जिसे हमारे संविधान के हिसाब से वोटर लिस्ट में शामिल किया जाना चाहिए, उसे किसी लोकल गवर्मेन्ट के prejudice या किसी officer की whim पर बाहर नहीं किया जाना चाहिए।”
बाबा साहेब ने कहा था, किसी अफसर की मर्जी से नाम नहीं कटेगा। आज अफसर बीजेपी और मोदी सरकार के इशारे पर मनमर्जी से नाम काट रहे हैं।
पंडित जवाहरलाल नेहरू जी और बाबा साहेब जानते थे कि बिना लोकतांत्रिक हिस्सेदारी के गरीब और वंचित लोगों की कोई सुनवाई नहीं होगी। इसीलिए उन्होंने भारत के हर वयस्क नागरिक को वोट का अधिकार देने की जबरदस्त पैरवी की थी।
संविधान सभा में हुई बहस में डॉ. अंबेडकर ने मताधिकार को लोकतंत्र की सर्वाधिक मौलिक चीज कहा था।
लेकिन आज इसका उल्टा हो रहा है। रक्षक ही भक्षक बन गया है। संविधान ने जिसे पूरी ताकत दी, जनता के वोट का चौकीदार बनाया, वही वोटों का लुटेरा बन बैठा है। जिस मुख्य चुनाव आयुक्त पर उसके अपने साथी भरोसा न करें, उस पर देश कैसे भरोसा कर सकता है?
दिसम्बर 1988 में इसी देश के प्रधानमंत्री स्व० राजीव गांधी जी ने युवाओं को अधिकार दिलाने के लिए मताधिकार की उम्र 21 वर्ष से घटाकर 18 कर दी थी और एक प्रधानमंत्री मोदी जी हैं, जो GenZ से इतना नाराज हैं कि उन्होंने साजिशन युवाओं को मताधिकार से बेदखल करने की योजना बना डाली। चुपचाप Form 6 के नियमों में बदलाव करवा दिया। यह पूरी तरह से गैरकानूनी है।
नौकरी तो दी नहीं, अब वोट का अधिकार भी नहीं देना चाहते हैं। नौजवान सवाल पूछेगा, उखाड़ फेंकेगा, इसका डर मन में बैठ गया है। लेकिन ये हक कोई खैरात में नहीं मिला है, लाखों लोगों ने इसके लिए कुर्बानियां दी हैं। मोदी-शाह जैसे लोग चाहे जितने भी षड्यंत्र कर लें, कांग्रेस उन्हें सफल नहीं होने देगी। ये लोकतंत्र, ये वोट का हक, ये हमारी विरासत है, जो खून-पसीने से सींची है। कोई तानाशाह उसे बर्बाद कर दे, ये हम होने नहीं देंगे।
हमारी लड़ाई किसी दल, संस्था या व्यक्तियों के खिलाफ नहीं बल्कि भारत के मतदाताओं के अधिकारों, संविधान और भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था को बचाने को लेकर है।
इस मौके पर मैं राहुल गांधी जी को बधाई देना चाहूंगा क्योंकि उन्होंने सबसे पहले जिन-जिन बातों को उठाया, वे प्रामाणिक रूप से सही साबित हुए हैं। ये बात देश के लोग मान रहे हैं।
राहुल गांधी जी ने महादेवपुरा, अलंद और हरियाणा-महाराष्ट्र के मामले में दस्तावेजों के साथ मतदाता आंकड़ों के आधार पर गंभीर सवाल उठाए था। डुप्लीकेट मतदाताओं, doubtful addresses, एक ही address पर बड़ी संख्या में मतदाताओं और Form-6 से जुड़ी Entry को लेकर उन्होंने जो तथ्य रखे थे, उस दिशा में चुनाव आयोग ने थोड़ी भी गंभीरता दिखाई होती तो आज वो कठघरे में नहीं होते और उनकी विश्वसनीयता बची रहती।
मैं उन सभी कार्यकर्ताओं को भी बधाई देना चाहता हूं, जिन्होंने श्री राहुल गांधी जी की एक आवाज पर ही ब्लॉक, जिला और राज्य स्तर पर विरोध प्रदर्शन किए।
साथियों, कांग्रेस ने इस देश की संस्थाओं को बनाया, उन्हें स्वतंत्र और अधिकार संपन्न बनाया, पर बहुत दुख के साथ कहना पड़्ता है कि आज वो सत्ता के आगे सिर झुकाए खड़ी है। BJP-RSS ये काम पूरी योजना के तहत कर रही है।
हमारे सवाल इन संस्थाओं को कमजोर करने के इरादे से नहीं होते, हम तो चाहते हैं कि चुनाव आयोग इतना मजबूत और विश्वसनीय हो कि सत्ता पक्ष और विपक्ष – दोनों उसके निर्णयों पर समान भरोसा करें।
चुनाव आयोग की स्वतंत्रता लोकतंत्र की सुरक्षा की पहली शर्तों में से एक है। लेकिन क्या ये पूछना गलत है कि SIR का फैसला किसने लिया?
क्या ये पूछना गलत है कि दो चुनाव आयुक्तों को Internal Portal से बाहर क्यों रखा गया? क्या कुछ गोपनीय चल रहा था?
इसलिए कांग्रेस पार्टी की 5 स्पष्ट मांग हैं:
1. मतदाता सूची में होने वाले हर बड़े बदलाव का पूरा डेटा सार्वजनिक हो।
2. जिन वोटरों के नाम हटाए गए हैं, उन्हें पूरी सूचना और अपील का अवसर मिले।
3. राजनीतिक दलों को मतदाता सूची और उससे संबंधित आवश्यक डेटा simple format में समय पर उपलब्ध हो।
4. जहां गंभीर विसंगतियों के प्रमाण सामने आएं, वहां स्वतंत्र और समयबद्ध जांच हो।
5. चुनाव प्रक्रिया से जुड़े महत्वपूर्ण डेटा और निर्णयों में खुद ऐसी पारदर्शिता हो कि किसी पक्ष को यह कहने का अवसर न मिले कि जानकारी छिपाई जा रही है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत के मतदाताओं को यह भरोसा होना चाहिए कि उनका वोट सुरक्षित है।
हम इस मुद्दे को किसी चुनाव को केवल जीतने या हारने की लड़ाई के रूप में नहीं देखते। चुनाव तो आते-जाते रहते हैं, सरकारें आती-जाती हैं, लेकिन लोकतंत्र और संविधान स्थायी हैं। यही भारतीय Democracy की बुनियाद है।
हमें हर नागरिक से कहना है कि लोकतंत्र में सबसे शक्तिशाली व्यक्ति एक आम वोटर है, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या सत्ता में बैठा नेता नहीं।
आज CWC से हमें एक स्पष्ट संकल्प लेना चाहिए—
मतदाता सूची पारदर्शी हो, चुनाव प्रक्रिया निष्पक्ष हो, संस्थाएं स्वतंत्र हों और हर योग्य नागरिक का वोट सुरक्षित हो।
यही संविधान की भावना है। यही लोकतंत्र की आत्मा है और कांग्रेस इस लोकतांत्रिक जिम्मेदारी से कभी पीछे नहीं हटेगी। यह सुनिश्चित करने के लिए हमें जो भी करना होगा- सड़क से संसद तक हमें करना चाहिए।
इतिहास गवाह है कि इसी प्रधानमंत्री ने 10 साल पहले “नोटबंदी” का फैसला करके हिंदुस्तान की अर्थव्यवस्था को नेस्तनाबूद कर दिया थ और 10 साल बाद “वोटबंदी” की साजिश करके हमारे मजबूत लोकतंत्र को खत्म कर रहे हैं।
इनकी सभी कु-नीतियों की सबसे अधिक मार गरीबों को पड़ती है। नोटबंदी में गरीब लाइन में खड़ा था। वोटबंदी में गरीब लाइन से ही बाहर कर दिया गया। मैं जानता हूं कि गरीब के पास एक ही ताकत है, उसका वोट, उसे हम किसी हाल में छिनने नहीं देंगे।
गरीब, दलित, वंचित और शोषित वर्ग का सबसे बड़ा हथियार वोट होता है, इसलिए मोदी जी इस अधिकार को छीनना चाहते हैं, पर हम ऐसा नहीं होने देंगे।
चुनाव आयोग के दो आयुक्तों ने ख़ुद CEC की गतिविधियों को मनमाना और अनुचित बताया। अब पूरे देश को मालूम है कि उनकी लगातार कोशिश सत्तापक्ष को फ़ायदा पहुंचाने की रही है।
ऐसे में उन्हें अपने पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है और उन्हें तत्काल पद से हटाया जाना चाहिए। इसके साथ ही जिनके दबाव में उन्होंने ऐसा आचरण किया है – प्रधानमंत्री जी को खुद नैतिकता के आधार पर इस्तीफा देना चाहिए।
हमारे सामने पांच राज्यों के चुनाव हैं, इसलिए किसी मतदाता का हक न मारा जाए, ये देखना जरूरी है। हमें सुनिश्चित करना होगा कि हर व्यक्ति का वोट सुरक्षित हो, चुनाव निष्पक्ष हों, जिससे आम जनता का विश्वास भारत की चुनाव प्रक्रिया में बनी रहे। तभी भारत का भविष्य सुरक्षित रहेगा, लोकतंत्र फलता-फूलता रहेगा।