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मुख्य संपादक प्रवीण सैनी लखनऊ
“विकास + मूल्य + ज्ञान + तकनीक + फिटनेस: विकसित भारत के लिए तैयार करनी होगी राष्ट्रप्रथम पीढ़ी” — डॉ. राजेश्वर सिंह
“बच्चों को बेहतर इंसान और जिम्मेदार नागरिक बनाना माता-पिता, विद्यालयों और पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी” — डॉ. राजेश्वर सिंह
लखनऊ। सरोजनी नगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत आज आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, मजबूत अर्थव्यवस्था, अत्याधुनिक तकनीक, डिजिटल क्रांति और नवाचार के क्षेत्र में अभूतपूर्व गति से आगे बढ़ रहा है। विकसित भारत के इस संकल्प को स्थायी और सशक्त बनाने के लिए देश के नागरिकों, विशेषकर नई पीढ़ी, को संस्कारवान, सक्षम, स्वस्थ और राष्ट्रप्रथम सोच से युक्त बनाना भी उतना ही आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि बच्चों में ईमानदारी, अनुशासन, करुणा, राष्ट्रभक्ति, कर्तव्यबोध और दूसरों के प्रति सम्मान जैसे मूल्यों का विकास करना केवल माता-पिता या विद्यालयों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक और पूरे समाज का सामूहिक दायित्व है। मूल्य आधारित शिक्षा किसी भी समाज का सबसे बड़ा निवेश है, क्योंकि आधुनिक विकास और मजबूत चरित्र एक-दूसरे के पूरक हैं।
इतिहास का उल्लेख करते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि लगभग 25 करोड़ की आबादी वाले भारत पर करीब डेढ़ लाख ब्रिटिश अधिकारी और सैनिक लगभग 200 वर्षों तक शासन कर सके। उन्होंने कहा कि इसके पीछे केवल उनकी सामरिक शक्ति ही नहीं, बल्कि हमारी आंतरिक विभाजन की स्थिति, एकता की कमी और राष्ट्रहित को सर्वोपरि न रख पाना भी महत्वपूर्ण कारण रहे। इतिहास का यह अध्याय हमें राष्ट्रीय एकता, सामाजिक समरसता और राष्ट्रप्रथम सोच के महत्व की सीख देता है।
डॉ. सिंह ने कहा कि नई पीढ़ी को मूल्य + ज्ञान + तकनीक + फिटनेस का मजबूत आधार देना समय की आवश्यकता है। स्मार्ट क्लास, डिजिटल लाइब्रेरी, AI जागरूकता, डिजिटल साक्षरता, साइबर सुरक्षा और खेलों के माध्यम से बच्चों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करते हुए सक्षम, स्वस्थ, आत्मविश्वासी और जिम्मेदार नागरिक बनाना होगा।
सरोजनी नगर में संचालित पहलों का उल्लेख करते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि वर्तमान में 15 RBS डिजिटल एम्पावरमेंट सेंटर युवाओं को डिजिटल साक्षरता और तकनीकी कौशल से सशक्त बना रहे हैं। इन केंद्रों से अब तक 1,001 विद्यार्थी प्रशिक्षण पूर्ण कर चुके हैं, जबकि 481 विद्यार्थी वर्तमान में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने मेहनती और प्रतिभाशाली बच्चों को प्रोत्साहित करने पर भी जोर दिया, ताकि वे समाज के लिए रोल मॉडल बन सकें।
डॉ. सिंह ने कहा कि खेल केवल पदक नहीं देते, बल्कि अनुशासन, टीमवर्क, नेतृत्व, दृढ़ता और आत्मविश्वास भी सिखाते हैं। इसी सोच के साथ सरोजनीनगर स्पोर्ट्स लीग युवाओं को स्वस्थ, आत्मविश्वासी और नशामुक्त जीवन की दिशा देने वाला जनआंदोलन बन रही है। लीग के 9 संस्करणों में अब तक 10,000 से अधिक युवा प्रतिभाग कर चुके हैं, 1,500 से अधिक स्पोर्ट्स किट वितरित की गई हैं और ₹11 लाख से अधिक की पुरस्कार राशि प्रदान की गई है।
डॉ. सिंह ने कहा, “विकसित भारत का निर्माण आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, मजबूत अर्थव्यवस्था और तकनीकी प्रगति के साथ-साथ सशक्त मानव संसाधन और मजबूत चरित्र से होगा। यदि हमें कल एक और बेहतर भारत चाहिए, तो आज हमें मिलकर सक्षम, संस्कारवान और राष्ट्रप्रथम नागरिक तैयार करने होंगे। राष्ट्र निर्माण की सबसे बड़ी शक्ति हमारे नागरिकों का चरित्र और उनकी क्षमता है।”