यूपी लाइव न्यूज़ 24 उत्तर प्रदेश
कौशाम्बी शिक्षा केवल अक्षरों को पहचान लेने और संख्याओं को गिन लेने का नाम नहीं है; शिक्षा तो उस उजास का नाम है,जो बालमन के भीतर जिज्ञासा का दीप जलाती है और उसे अपने आसपास की दुनिया को समझने का साहस देती है। इसी भावभूमि को केंद्र में रखते हुए सिराथू एवं कड़ा ब्लॉक में आयोजित एफ एल एन प्रशिक्षण में शिक्षकों ने बुनियादी साक्षरता एवं संख्या ज्ञान को बच्चों के लिए सहज, सरल,सरस और आनंददायी बनाने की दिशा में सार्थक मंथन किया।प्रशिक्षण में डॉ.ओम प्रकाश सिंह,सदस्य स्टेट रिसोर्स ग्रुप,उत्तर प्रदेश ने शिक्षकों का मार्गदर्शन करते हुए कहा कि प्रारंभिक शिक्षा बच्चे के जीवन की वह पहली सीढ़ी है,जिस पर उसके भविष्य का पूरा भवन खड़ा होता है। यदि इस सीढ़ी की नींव मजबूत,सहज और आनंदपूर्ण होगी,तो सीखने की यात्रा भी उतनी ही आत्मविश्वास पूर्ण और उज्ज्वल होगी।प्रशिक्षण कक्ष में संदर्शिका और कार्य पुस्तिका केवल पुस्तकीय सामग्री नहीं रह गईं,बल्कि वे शिक्षकों के हाथों में सीखने के जीवंत उपकरण बन उठीं।‘वीणा ने भाषा के सुरों को बालमन से जोड़ा तो गणित मेला ने संख्याओं की दुनिया को खेल और गतिविधियों की रंगीन दुनिया में बदल दिया। वहीं संतूर और ‘हमारा अद्भुत संसार ने बच्चों को अपने परिवेश,प्रकृति और जीवन के विविध अनुभवों से जोड़ने की संभावनाओं को सामने रखा।प्रशिक्षण के दौरान यह अनुभूति भी गहरी हुई कि बच्चा तब सबसे अधिक सीखता है,जब सीखना उसके लिए बोझ नहीं बल्कि आनंद बन जाता है। गतिविधियों में छिपा गणित,कहानियों में छिपी भाषा खेलों में छिपा तर्क और आसपास के परिवेश में छिपा विज्ञान-यही एफ एल एन की वास्तविक शक्ति है।एस आर जी डॉ.ओम प्रकाश सिंह ने शिक्षकों को प्रेरित करते हुए कहा कि कक्षा की चारदीवारी को सीखने की सीमा न बनने दें। बच्चे का घर विद्यालय आँगन खेत बाजार प्रकृति और उसका पूरा परिवेश-सब उसकी पाठशाला हैं। शिक्षक का दायित्व इन जीवन अनुभवों को सीखने की प्रक्रिया से जोड़ना है।प्रशिक्षण में शिक्षकों की सक्रिय सहभागिता ने वातावरण को जीवंत बना दिया। कहीं गतिविधियों के माध्यम से गणित को समझने की कोशिश थी,तो कहीं भाषा को अभिव्यक्ति से जोड़ने का प्रयास। प्रश्न संवाद,प्रयोग और अनुभव के बीच सीखने की एक नई तस्वीर आकार ले रही थी।यह प्रशिक्षण केवल प्रशिक्षण नहीं,बल्कि बालमन को समझने और शिक्षा को उसके अनुरूप ढालने की एक साझा यात्रा बन गया।अंततः यही संकल्प उभरा कि हर बच्चा पढ़े,हर बच्चा समझे,हर बच्चा गिने और हर बच्चा बढ़े।सीखना बने आनंद की उड़ान,संदर्शिका से सशक्त हो हिंदुस्तान