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– शिवरी प्रोसेसिंग साइट का निरीक्षण कर बायोरेमेडिएशन, फ्रेश वेस्ट और लिगेसी वेस्ट के वैज्ञानिक निस्तारण की ली जानकारी
लखनऊ ठोस कचरा प्रबंधन के क्षेत्र में लखनऊ नगर निगम द्वारा अपनाई जा रही व्यवस्थाओं और तकनीकों का अध्ययन करने के लिए कोलकाता नगर निगम की टीम बुधवार को लखनऊ पहुंची। टीम ने शहर में ठोस कचरा प्रबंधन से जुड़ी विभिन्न व्यवस्थाओं का स्थलीय निरीक्षण किया।
कोलकाता नगर निगम की टीम में सुश्री सुभाषिनी ई., आईएएस, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, KMC (SHARP) तथा श्री देबाशीष हलदार, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर (सिविल), SWM विभाग, कोलकाता नगर निगम शामिल हैं। अध्ययन भ्रमण का उद्देश्य लखनऊ नगर निगम द्वारा ठोस कचरा प्रबंधन के क्षेत्र में अपनाई जा रही बेहतर कार्यप्रणालियों, विशेष रूप से शिवरी प्लांट में बायोरेमेडिएशन और कचरा प्रसंस्करण की व्यवस्था को समझना है।
*शिवरी प्रोसेसिंग साइट का किया निरीक्षण*
कोलकाता नगर निगम की टीम ने शिवरी स्थित प्रोसेसिंग साइट का दौरा किया। इस दौरान टीम ने लिगेसी वेस्ट के बायोरेमेडिएशन, फ्रेश वेस्ट के प्रसंस्करण तथा कचरे से निकलने वाले बाय-प्रोडक्ट के वैज्ञानिक निस्तारण की प्रक्रिया को देखा। अधिकारियों ने मौके पर संचालित विभिन्न गतिविधियों की जानकारी भी टीम को दी।
*2550 मीट्रिक टन प्रतिदिन फ्रेश वेस्ट के निस्तारण की क्षमता*
लखनऊ नगर निगम द्वारा शहर से प्रतिदिन निकलने वाले फ्रेश वेस्ट के वैज्ञानिक निस्तारण के लिए कुल तीन प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित की गई हैं। इन तीनों यूनिटों की कुल क्षमता 2550 मीट्रिक टन प्रतिदिन है। इनके माध्यम से शहर से प्रतिदिन निकलने वाले फ्रेश वेस्ट का शत-प्रतिशत वैज्ञानिक निस्तारण किया जा रहा है।
फ्रेश वेस्ट की प्रोसेसिंग के दौरान निकलने वाले सभी बाय-प्रोडक्ट का भी वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण सुनिश्चित किया जा रहा है। इस पूरी व्यवस्था की जानकारी कोलकाता नगर निगम की टीम ने मौके पर ली।
*18.49 लाख मीट्रिक टन लिगेसी वेस्ट का वैज्ञानिक निस्तारण*
नगर निगम द्वारा लिगेसी वेस्ट के वैज्ञानिक निस्तारण में भी महत्वपूर्ण प्रगति की गई है। अनुबंधित 18.49 लाख मीट्रिक टन लिगेसी वेस्ट का वैज्ञानिक निस्तारण किया जा चुका है। इसके साथ ही अब तक करीब 3 लाख 45 हजार मीट्रिक टन आरडीएफ (Refuse Derived Fuel) का निस्तारण किया गया है।
लिगेसी वेस्ट के प्रसंस्करण से निकलने वाले अन्य बाय-प्रोडक्ट का भी वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण सुनिश्चित किया जा रहा है। कोलकाता की टीम ने इस पूरी प्रक्रिया को समझा और लखनऊ में अपनाई जा रही कार्यप्रणाली का अध्ययन किया।
*कंपोस्ट को ग्रैन्यूल फॉर्म में किया जा रहा तैयार*
फ्रेश वेस्ट से तैयार होने वाले कंपोस्ट को ग्रैन्यूल फॉर्म में परिवर्तित किया जा रहा है। वर्तमान मांग के अनुरूप इसके उपयोग को सुनिश्चित करने की व्यवस्था भी की गई है। इससे कचरे के वैज्ञानिक प्रसंस्करण के साथ-साथ उससे तैयार होने वाले उत्पादों के उपयोग को भी बढ़ावा मिल रहा है।
*सीएनडी वेस्ट कलेक्शन पॉइंट और इलेक्ट्रिक वाहनों की व्यवस्था भी देखी*
अध्ययन भ्रमण के दौरान कोलकाता नगर निगम की टीम ने शहर में सीएनडी वेस्ट कलेक्शन पॉइंट्स का भी निरीक्षण किया। इसके साथ ही वार्ड में संचालित इलेक्ट्रिक वाहनों एवं चार्जिंग स्टेशन की व्यवस्था को भी देखा। टीम ने कचरा संग्रहण से लेकर परिवहन और प्रसंस्करण तक की व्यवस्थाओं की जानकारी प्राप्त की।
*दोनों नगर निगमों के बीच तकनीकी अनुभवों का आदान-प्रदान*
इस अध्ययन भ्रमण के दौरान लखनऊ और कोलकाता नगर निगम के अधिकारियों के बीच ठोस कचरा प्रबंधन की आधुनिक तकनीकों, कचरा प्रसंस्करण, बायोरेमेडिएशन, आरडीएफ, कंपोस्ट तथा बाय-प्रोडक्ट के वैज्ञानिक निस्तारण से जुड़े अनुभवों का आदान-प्रदान किया जा रहा है। कोलकाता नगर निगम की टीम द्वारा लखनऊ में अपनाई जा रही व्यवस्थाओं का अध्ययन भविष्य में दोनों नगर निगमों के बीच बेहतर कार्यप्रणालियों को साझा करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।