यूपी लाइव न्यूज़ 24 उत्तर प्रदेश
सह संपादक कपिल गुप्ता
बुंदेली लोकपरंपरा जीवंत करने की दिशा में सार्थक कदम माना जा रहा है पूरा आयोजन
कोंच शरद पूर्णिमा के अवसर पर रविवार देर रात बुंदेलखंड की सदियों पुरानी लोकपरंपराओं को जीवंत बनाए रखने के सफल प्रयास में कोंच नगर में टेसू की बारात धूमधाम से निकाली गई। पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ आयोजित इस कार्यक्रम में बच्चों, युवाओं और नगरवासियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। डीजे की धुन पर टेसू के पारंपरिक गीतों के बीच निकली बारात ने नगर का माहौल उत्सवमय बना दिया। बारात में शामिल लोग नाचते-गाते हुए नगर के प्रमुख मार्गों से गुजरे। इसी के साथ टेसू-झिंझिया का विवाह विधि विधान के साथ संपन्न हुआ।
टेसू की बारात का आयोजन कस्बे के भगत सिंह नगर की सभासद खुशबू के प्रतिनिधि आवेश जाटव के आवास से किया गया। यहां से बारात डीजे की धुन के साथ रवाना हुई और नगर के प्रमुख मार्गों से होकर निकली। बारात में दर्जनों बच्चे और युवक पारंपरिक वेशभूषा में बाराती बनकर शामिल हुए। टेसू के गीतों पर नाचते-गाते बारातियों का उत्साह देखते ही बन रहा था। इस दौरान लोकपरंपरा से जुड़े गीतों और रीति-रिवाजों के माध्यम से बुंदेलखंड की सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिली। बच्चों और युवाओं ने पूरे जोश के साथ इस पारंपरिक आयोजन में भाग लिया। बारात निकलने के बाद रात्रि में पारंपरिक रीति-रिवाजों और विधि-विधान के साथ टेसू और झिंझिया का विवाह संपन्न कराया गया। इस मौके पर एडवोकेट नवल किशोर जाटव, विनोद सोनी, अतुल शर्मा, सलमा बाई सहित सैकड़ों बाराती मौजूद रहे। बुंदेली संस्कृति एवं लोककला संवर्द्धन संस्थान के डॉ. वीरेंद्र त्रिपाठी का कहना है कि टेसू की बारात जैसी परंपराएं बुंदेलखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति की पहचान हैं। ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक रीति-रिवाजों से परिचित होने का अवसर मिलता है। साथ ही, ये कार्यक्रम समाज में आपसी भाईचारे, सामाजिक एकता और मेलजोल को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।