यूपी लाइव न्यूज़ 24 उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान बड़ी संख्या में फॉर्म-7 जमा कर मतदाताओं के नाम हटाने की कथित कोशिश का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को शिकायतों की जांच कर उचित कार्रवाई करने और रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने याचिकाकर्ताओं से उन मामलों का पूरा ब्योरा चुनाव आयोग को देने को कहा, जिनमें कथित गड़बड़ियों की शिकायतों का अभी तक निपटारा नहीं हुआ है।
पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल हैं।
सुनवाई के दौरान आरोप लगाया गया कि यूपी के एक विधानसभा क्षेत्र में एक खास समुदाय के मतदाताओं के नाम हटाने के लिए 32 फॉर्म-7 जमा किए गए।
कुछ फॉर्म पर बूथ लेवल ऑफिसर के हस्ताक्षर होने का भी दावा किया गया।
याचिकाकर्ताओं ने चुनाव आयोग के हलफनामे में दी गई जानकारी में अंतर होने की बात भी कही।
चुनाव आयोग ने अदालत को बताया कि बड़ी संख्या में फॉर्म-7 जरूर जमा हुए थे, लेकिन अधिकारियों की जांच में उन्हें गलत पाया गया।
इन आवेदनों के आधार पर किसी भी मतदाता का नाम वोटर लिस्ट से नहीं हटाया गया।
आयोग ने कहा कि किसी शिकायत में तथ्य पाए जाने पर संबंधित पक्ष औपचारिक शिकायत कर सकता है, जिसके बाद मामले की जांच की जाएगी।