यूपी लाइव न्यूज़ 24 उत्तर प्रदेश
प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने आज सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के अवसर पर जन भवन के मुख्य लॉन में स्थापित सरदार पटेल की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस अवसर पर उन्होंने ‘रन फॉर यूनिटी’ (एकता दौड़) रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। रैली में जन भवन के अधिकारियों, कर्मचारियों, सुरक्षा कर्मियों, लखनऊ स्थित विभिन्न विश्वविद्यालयों के छात्र-छात्राओं तथा स्कूली बच्चों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया।
भारत माता की जय व वंदे मातरम् के उद्घोष के साथ रैली जन भवन के गेट संख्या-02 से प्रारंभ होकर डीएसओ चौराहा, हजरतगंज (अटल चौक) चौराहा, लालबाग चौराहा, जय हिंद चौराहा लालबाग, नूरमंजिल अस्पताल चौराहा, इमाथामसन स्कूल के सामने से होते हुए आईटीएमएस कार्यालय के सामने, रॉयल होटल (बापू भवन) चौराहा तथा सिसेंडी तिराहा से होकर जन भवन के गेट संख्या-08 से परिसर में प्रवेश कर संपन्न हुई।
रैली को रवाना करने से पूर्व अपने संबोधन में राज्यपाल जी ने सरदार वल्लभभाई पटेल के जीवन, व्यक्तित्व एवं राष्ट्र निर्माण में उनके अतुलनीय योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि खेड़ा और बारडोली सत्याग्रह आंदोलनों में सरदार पटेल की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही। किसानों ने अन्यायपूर्ण लगान व्यवस्था के विरुद्ध संगठित होकर आंदोलन किया। किसानों के हितों के लिए उनके अदम्य नेतृत्व और संघर्षशील व्यक्तित्व से प्रभावित होकर उन्हें ‘सरदार’ की उपाधि प्रदान की गई। इसी संघर्ष के दौरान उनका महात्मा गांधी जी के साथ जुड़ाव और अधिक प्रगाढ़ हुआ।
राज्यपाल जी ने कहा कि स्वतंत्रता के पश्चात देशी रियासतों का एकीकरण कर सरदार पटेल ने भारत की राजनीतिक एकता और अखंडता को सुदृढ़ आधार प्रदान किया। उन्होंने जम्मू-कश्मीर से जुड़ी समस्या का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्तमान में माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में इस दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व एवं दृढ़ इच्छाशक्ति की सराहना करते हुए कहा कि नेतृत्व किसे कहते हैं, यह माननीय प्रधानमंत्री जी ने अपने कार्यों से प्रदर्शित किया है।
गुजरात में स्थापित ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ का उल्लेख करते हुए राज्यपाल जी ने कहा कि सरदार पटेल की विश्व की विशाल प्रतिमा का निर्माण केवल एक स्मारक का निर्माण नहीं, बल्कि राष्ट्रीय एकता, जनसहभागिता और सामूहिक संकल्प का प्रतीक है। इसके निर्माण में देश के गांव-गांव से मिट्टी एकत्र की गई तथा किसानों ने भी सक्रिय सहभागिता की। प्रतिमा की नींव में देश के विभिन्न गांवों की मिट्टी का समावेश भारत की सामूहिक चेतना और एकात्मता को अभिव्यक्त करता है। उन्होंने बताया कि प्रतिमा के निर्माण में प्रयुक्त लोहे के संग्रहण से लेकर निर्माण कार्यों तक स्थानीय लोगों और आदिवासी समुदाय की सहभागिता रही तथा उन्हें रोजगार के अवसर भी प्राप्त हुए। क्षेत्र में पर्यटन, आधारभूत सुविधाओं और हरियाली का व्यापक विकास हुआ है।
उन्होंने कहा कि यदि यह देखना हो कि सीमित शिक्षा प्राप्त करने वाले सामान्यजन भी किस प्रकार अपनी मेहनत, कौशल और समर्पण से राष्ट्र निर्माण में योगदान दे सकते हैं, तो स्टैच्यू ऑफ यूनिटी क्षेत्र का भ्रमण अवश्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि कभी बंजर रही भूमि को हरित एवं विकसित क्षेत्र में परिवर्तित करना माननीय प्रधानमंत्री जी की दूरदर्शी सोच और विकास की प्रतिबद्धता का उदाहरण है।
राज्यपाल जी ने देश की सीमाओं की रक्षा करते हुए अपने प्राणों का बलिदान देने वाले वीर सैनिकों तथा देश की सुरक्षा और व्यवस्था में सतत योगदान देने वाले सेनानायकों के प्रति सम्मान व्यक्त करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्र के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले वीर जवानों के साथ-साथ उनके परिवारों का भी सम्मान और गौरव किया जाना चाहिए। राष्ट्र के प्रति उनके त्याग, समर्पण और सेवाभाव को सदैव स्मरण रखना हम सभी का दायित्व है।
‘रन फॉर यूनिटी’ के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए राज्यपाल जी ने कहा कि किसी भी कार्यक्रम में सहभागिता करने से पूर्व उसके उद्देश्य और महत्व को समझना आवश्यक है। ‘रन फॉर यूनिटी’ केवल दौड़ नहीं, बल्कि देश की एकता, अखंडता और राष्ट्रीय एकजुटता के संकल्प को सुदृढ़ करने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि वास्तविक कर्मयोगी वे हैं, जो वर्षा, गर्मी और प्रतिकूल परिस्थितियों की परवाह किए बिना अपने दायित्वों का निर्वहन करते हैं। ऐसे लोगों में निरंतर कार्य करने से ही सामर्थ्य और आत्मविश्वास का विकास होता है। प्रत्येक नागरिक के मन में देश के लिए जीने, देश के लिए कार्य करने और आवश्यकता पड़ने पर सर्वोच्च बलिदान देने का भाव होना चाहिए।
राज्यपाल जी ने कहा कि देश के विभाजन के समय उत्पन्न परिस्थितियों और उसके परिणामों को समझना तथा यह जानना आवश्यक है कि एक राष्ट्र का विकास किन प्रयासों और संकल्पों से संभव होता है। हमें इतिहास से सीख लेते हुए राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखना चाहिए। देश के लिए प्रत्येक कार्य पूर्ण निष्ठा, समर्पण और श्रद्धाभाव से किया जाना चाहिए। उन्होंने कार्यक्रम में प्रतिभाग करने वाले सभी अधिकारियों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों एवं बच्चों को बधाई देते हुए राष्ट्रीय एकता और अखंडता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता बनाए रखने का आह्वान किया।