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रामरथ से करतारपुर साहिब और अब भजन सम्राट कन्हैया मित्तल की आग्रह पर खाटू श्याम धाम तक पहुंचा धार्मिक सेवा का संकल्प
लखनऊ। बाबा खाटू श्याम जी के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था और भावनाओं को सम्मान देते हुए सरोजनीनगर में धार्मिक सेवा की एक नई पहल का शुभारंभ हुआ। गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर सरोजनीनगर के सेक्टर K-950, आशियाना स्थित आवास से 73 श्रद्धालुओं की ‘श्याम रथ यात्रा’ को श्री खाटू श्याम जी धाम, राजस्थान के लिए रवाना किया गया। श्रद्धालुओं की सुविधा और यात्रा को सुगम बनाने के लिए खाटू श्याम जी धाम तक यात्रा से जुड़ी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं।
22 अप्रैल 2026 को आयोजित ‘धर्म उत्सव’ के अवसर पर आदरणीय श्री कन्हैया मित्तल जी द्वारा रखे गए आग्रह को संकल्प के रूप में लिया गया था। आज इस संकल्प को साकार करने का अवसर मिला। यात्रा के संबंध में श्री कन्हैया मित्तल जी का फोन भी आया, जिसमें उन्होंने श्रद्धालुओं की यात्रा और बाबा श्याम के प्रति अपनी भावनाएं साझा कीं। श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं, ताकि वे सुगमता से बाबा खाटू श्याम जी के दर्शन कर सकें। यह केवल एक यात्रा का शुभारंभ नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं की आस्था, भावनाओं और विश्वास के सम्मान के प्रति सेवा-संकल्प की पूर्ति है।
डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि सरोजनीनगर में धार्मिक यात्राओं के माध्यम से अधिक से अधिक परिवारों को तीर्थ और आध्यात्मिक स्थलों से जोड़ने का प्रयास निरंतर किया जा रहा है। पिछले चार वर्षों में रामरथ श्रवण यात्रा के माध्यम से 8,500 से अधिक परिवारों को प्रभु श्रीराम के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। सिख समाज के श्रद्धालुओं के लिए करतारपुर साहिब यात्रा भी सफलतापूर्वक संपन्न हुई है। अब बाबा खाटू श्याम जी के भक्तों के लिए ‘श्याम रथ यात्रा’ का शुभारंभ हुआ है। प्रयास रहेगा कि सभी के सहयोग से हर दो महीने में ऐसी धार्मिक यात्राएं निरंतर आयोजित होती रहें, जिससे सरोजनीनगर के अधिक से अधिक परिवार तीर्थों के दर्शन और आध्यात्मिक अनुभव से जुड़ सकें।
बाबा खाटू श्याम जी की महिमा और उनकी मान्यता सनातन परंपरा में विशेष स्थान रखती है। मान्यता है कि महाभारत काल में वीर बर्बरीक ने सदैव कमजोर और हारने वाले पक्ष का साथ देने का प्रण लिया था। वे इतने पराक्रमी थे कि जिस पक्ष की ओर से युद्ध करते, विजय उसी की होती। महाभारत के युद्ध को संतुलित बनाए रखने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने उनसे उनका शीश दान में मांगा। बर्बरीक जी ने अपना शीश भगवान श्रीकृष्ण को अर्पित कर दिया। उनकी भक्ति, त्याग और संकल्प से प्रसन्न होकर भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें वरदान दिया कि कलियुग में वे ‘श्याम’ नाम से पूजे जाएंगे और हारे हुए एवं जरूरतमंद लोगों के सहारा बनेंगे। इसी कारण बाबा खाटू श्याम जी को ‘हारे का सहारा’ कहा जाता है।
डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि तीर्थ यात्रा केवल किसी स्थान तक पहुंचने का माध्यम नहीं, बल्कि अपने भीतर सकारात्मक परिवर्तन लाने की यात्रा है। दर्शन के बाद विचारों में सकारात्मकता आए, आचरण बेहतर हो और चरित्र में परिवर्तन दिखाई दे, तभी यात्रा वास्तव में तीर्थ यात्रा बनती है। आज इस पवित्र यात्रा के माध्यम से सरोजनीनगर के श्रद्धालु बाबा खाटू श्याम जी के दर्शन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करेंगे।
साथ ही, आगामी नवंबर माह में आदरणीय श्री कन्हैया मित्तल जी के कार्यक्रम का आयोजन सरोजनीनगर में कराने का प्रयास भी किया जाएगा, जिसमें बाबा श्याम के भक्तों और श्याम परिवार से जुड़े सभी साथियों की सहभागिता रहेगी।
सनातन संस्कृति की रक्षा, उसका संवर्धन और उसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना हम सभी का दायित्व है। इसी संकल्प के साथ सरोजनीनगर में अब तक 300 से अधिक मंदिरों का पुनरोद्धार, जीर्णोद्धार एवं सौंदर्यीकरण कराया गया है। लक्ष्य है कि सरोजनीनगर का प्रत्येक मंदिर भव्य, दिव्य और सुंदर बने तथा वहां स्वच्छता, रंग-रोगन, हैंडपंप, बैठने की व्यवस्था और श्रद्धालुओं के लिए शेड जैसी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हों।
इस सेवा अभियान में आदरणीय अवस्थी जी, वरिष्ठ पदाधिकारियों, मंडल अध्यक्षों, पार्षदगण, कार्यकर्ताओं, मातृशक्ति और युवा साथियों का निरंतर सहयोग मिल रहा है। सभी के सहयोग से यह सेवा कार्य तब तक आगे बढ़ता रहेगा, जब तक सरोजनीनगर के सभी मंदिरों को बेहतर स्वरूप प्रदान करने का संकल्प पूरा नहीं हो जाता।
गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर प्रार्थना है कि भगवान श्री गणेश जी की कृपा से श्याम रथ यात्रा निर्विघ्न, मंगलमय और सफल हो, सभी श्रद्धालुओं को बाबा खाटू श्याम जी के मंगलमय दर्शन और आशीर्वाद प्राप्त हों तथा उनके माध्यम से सरोजनीनगर के प्रत्येक परिवार तक सुख, शांति एवं समृद्धि पहुंचे।
हारे का सहारा, बाबा श्याम हमारा।
जय श्री श्याम।