यूपी लाइव न्यूज़ 24 उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने आज लखनऊ के कैसरबाग स्थित सफेद बारादरी में संस्था ‘ग्रामश्री’ एवं ‘क्राफ्टरूट्स’ द्वारा 30 अक्टूबर से 03 नवम्बर, 2026 तक आयोजित हस्तशिल्प प्रदर्शनी का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। इस अवसर पर राजकीय बाल गृह, सिंधीखेड़ा की बालिकाओं द्वारा स्वयं निर्मित उत्पादों का स्टॉल भी लगाया गया।
इस अवसर पर अपने संबोधन में राज्यपाल जी ने कहा कि यह प्रदर्शनी गत 23 अक्टूबर को कानपुर में पांच दिवसीय आयोजन के रूप में प्रारंभ हुई थी और वहां से लखनऊ में इतने कम समय में प्रदर्शनी की सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित कर इसे भव्य स्वरूप प्रदान किया गया है। इसके लिए उन्होंने आयोजकों एवं सभी सहयोगियों की सराहना करते हुए उन्हें धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि परिस्थितियां कैसी भी हों, अपने कार्य के प्रति समर्पण और निरंतर प्रयास बनाए रखना चाहिए।
राज्यपाल जी ने विश्वविद्यालयों के उपस्थित कुलपतियों एवं शिक्षकों से कहा कि वे अपने विद्यार्थियों को ऐसी प्रदर्शनियों का भ्रमण कराएं, ताकि वे शिल्पकारों की कार्यकुशलता, रचनात्मकता और कला की बारीकियों को समझ सकें। उन्होंने बताया कि राज्य विश्वविद्यालयों द्वारा लगभग 12 कलाकारों को डी.लिट. की उपाधि प्रदान की गई है। कुलपतियों ने भी कलाकारों को विश्वविद्यालय में आमंत्रित कर विद्यार्थियों को उनके अनुभव एवं हुनर से परिचित कराने की इच्छा व्यक्त की है।
राज्यपाल जी ने कहा कि प्राविधिक विश्वविद्यालय अपने विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक एवं कंप्यूटर के माध्यम से पारंपरिक कलाओं से जोड़ सकते हैं। विद्यार्थी शिल्पकारों के उत्पादों एवं डिजाइनों का अध्ययन कर नए डिजाइन तैयार करना सीखें तथा कलाकारों के साथ मिलकर कार्य करें। इच्छुक विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के लिए एक-एक घंटे के प्रशिक्षण सत्र भी आयोजित किए जा सकते हैं। इससे पारंपरिक शिल्प को आधुनिक तकनीक से जोड़ने और नए अवसर विकसित करने में सहायता मिलेगी।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी एवं मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी निरंतर आत्मनिर्भरता का संदेश देते हैं। ऐसी प्रदर्शनियां आत्मनिर्भर बनने और स्वरोजगार को प्रोत्साहित करने का प्रभावी माध्यम हैं। विद्यालयों के बच्चों को भी यहां लाकर कलाकारों से संवाद कराया जाना चाहिए, ताकि वे जान सकें कि किस प्रकार सामान्य एवं स्थानीय संसाधनों से सुंदर और उपयोगी कलात्मक वस्तुएं तैयार की जा सकती हैं। नदियों में मिलने वाले विभिन्न प्रकार के पत्थरों एवं आसपास उपलब्ध अन्य सामग्रियों से भी अनेक आकर्षक वस्तुएं बनाई जा सकती हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों को इन कलाओं से जोड़कर उनकी रचनात्मकता को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
राज्यपाल जी ने अपने गुजरात के अनुभव साझा करते हुए बताया कि वर्ष 2003 में वे गुजरात प्रदेश महिला मोर्चा की अध्यक्ष थीं। उस समय श्री लालकृष्ण आडवाणी जी उपाध्यक्ष थे और तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी भी कार्यक्रम में उपस्थित थे। कार्यक्रम के समापन अवसर पर श्री लालकृष्ण आडवाणी जी ने महिलाओं को घर-परिवार की जिम्मेदारियों के साथ अपनी रचनात्मक एवं कलात्मक प्रतिभा को भी विकसित करने के लिए प्रेरित किया था। उन्होंने कहा था कि महिलाओं में अनेक प्रकार की कलाएं एवं हुनर होते हैं, जिन्हें सामने लाने की आवश्यकता है।
राज्यपाल जी ने बताया कि इस प्रेरणा से उन्होंने पार्टी कार्यालय में महिलाओं की बैठक आयोजित की और उन्हें अपनी प्रतिभा को संगठित स्वरूप देने के लिए प्रोत्साहित किया। महिलाओं ने स्वयं आर्थिक सहयोग एकत्र कर संस्था के पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी की। तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने इस संस्था को ‘ग्रामश्री’ नाम दिया। उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य महिलाओं के हुनर को पहचान दिलाना, उन्हें मंच उपलब्ध कराना तथा उनके उत्पादों को बाजार से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाना था।
राज्यपाल जी ने वर्ष 2001 में गुजरात के कच्छ में आए भूकंप का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2002 में मुख्यमंत्री बनने के बाद श्री नरेंद्र मोदी जी ने भूकंप प्रभावित कच्छ एवं भुज क्षेत्र के पुनर्निर्माण और विकास के लिए अनेक योजनाएं प्रारंभ कीं। वहां के लोगों ने कठिन परिस्थितियों में भी परिश्रम, संकल्प और एक-दूसरे के सहयोग से अपने क्षेत्र को फिर से विकसित किया। आज कच्छ और भुज में आए बदलाव इसके उदाहरण हैं।
राज्यपाल जी ने प्रदर्शनी में आए कारीगरों के स्वास्थ्य का ध्यान रखने पर भी बल दिया। उन्होंने किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय की कुलपति से कहा कि संस्था के साथ आए शिल्पकारों एवं कारीगरों का स्वास्थ्य परीक्षण कराया जाए। आवश्यकता पड़ने पर उन्हें चिकित्सकीय परामर्श एवं दवाएं उपलब्ध कराई जाएं।
राज्यपाल जी ने अपनी पुस्तक ‘चुनौतियां मुझे पसंद हैं’ का उल्लेख करते हुए बताया कि पुस्तक की बिक्री से प्राप्त धनराशि बच्चों की शिक्षा पर व्यय करने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि जो बालिकाएं आगे चलकर डॉक्टर, इंजीनियर अथवा अन्य क्षेत्रों में उच्च शिक्षा प्राप्त करना चाहती हैं, वे आवेदन प्रस्तुत कर सकती हैं। उनकी शिक्षा में सहयोग प्रदान किया जाएगा।
इस अवसर पर राज्यपाल जी ने प्रदर्शनी में देश के विभिन्न राज्यों से आए शिल्पकारों एवं कारीगरों द्वारा तैयार किए गए हस्तशिल्प उत्पादों, पारंपरिक कलाकृतियों और विविध शिल्प विधाओं का विस्तृत अवलोकन किया। उन्होंने स्टोन वर्क, काष्ठ कला, धातु शिल्प, धातु से निर्मित प्रतिमाओं, पारंपरिक शॉल, साड़ियों, वस्त्रों, आभूषणों एवं श्रृंगार सामग्री सहित विभिन्न उत्पादों के स्टॉलों पर जाकर कारीगरों से संवाद किया। उन्होंने उत्पादों को तैयार करने में प्रयुक्त तकनीक, कच्चे माल, पारंपरिक डिजाइनों, कलात्मक विशेषताओं तथा उनसे जुड़ी सांस्कृतिक विरासत के संबंध में जानकारी प्राप्त की। कारीगरों ने भी अपने उत्पादों की विशेषताओं एवं निर्माण प्रक्रिया से उन्हें अवगत कराया। राज्यपाल जी ने शिल्पकारों के उत्कृष्ट कौशल, रचनात्मकता और पारंपरिक कलाओं को संरक्षित रखने के प्रयासों की सराहना करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया।
प्रदर्शनी में उपस्थित हस्तशिल्प कारीगरों ने संस्था के साथ जुड़कर कार्य करने, संस्था से प्राप्त सहयोग, विभिन्न कलाओं में मातृशक्ति की भागीदारी तथा विलुप्तप्राय शिल्प विधाओं को पुनर्जीवित करने के प्रयासों से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि क्राफ्टरूट्स के माध्यम से उन्हें अपनी कला को प्रोत्साहित करने, उत्पादों को बेहतर मंच उपलब्ध कराने तथा अपने क्षेत्र के विशिष्ट उत्पादों एवं उनकी विशेषताओं को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने का अवसर मिला है। इस अवसर पर कारीगरों ने हस्तनिर्मित कपड़े की मालाएं पहनाकर एवं अपने उत्पाद भेंट कर अतिथियों का स्वागत भी किया।
उल्लेखनीय है कि प्रदर्शनी में देश के 22 राज्यों के 90 से अधिक शिल्पकार एवं कारीगर भाग ले रहे हैं। प्रदर्शनी में 90 से अधिक प्रकार की हस्तकलाओं एवं शिल्प उत्पादों के स्टॉल लगाए गए हैं। प्रदर्शनी प्रतिदिन प्रातः 10 बजे से रात्रि 9 बजे तक आमजन के लिए खुली रहेगी।
इस अवसर पर उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष श्रीमती अपर्णा यादव, विशेष कार्याधिकारी श्री राज्यपाल (अपर मुख्य सचिव स्तर) डॉ. सुधीर महादेव बोबडे, क्राफ्टरूट्स संस्था की अध्यक्ष श्रीमती अनारबेन पटेल, समाजसेवी श्री राजेश दयाल, विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपतिगण एवं शिक्षकगण सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।