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“कट्टरपंथ पर मौन महिलाओं के अधिकारों के साथ विश्वासघात; कांग्रेस-सपा बेटियों को वोटबैंक से ऊपर रखें”: डॉ. राजेश्वर सिंह
लखनऊ। सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी द्वारा स्कूलों में बुर्के और नकाब पर प्रतिबंध के प्रस्ताव का स्वागत करते हुए कहा कि शिक्षा संस्थानों में समान नियम, महिला गरिमा और सामाजिक समानता को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
डॉ. सिंह ने कहा कि दुनिया कट्टरपंथ के दुष्परिणामों को देख रही है। अफगानिस्तान में लगभग 24 लाख बच्चियाँ माध्यमिक शिक्षा से वंचित हैं और महिलाओं के विश्वविद्यालय जाने पर प्रतिबंध है। पाकिस्तान में जबरन धर्मांतरण, बाल-विवाह, तथाकथित ‘ऑनर किलिंग’ और चरमपंथी हिंसा जैसी चुनौतियाँ महिलाओं के अधिकारों के लिए गंभीर चिंता हैं। वहीं बांग्लादेश में बाल-विवाह, महिलाओं के विरुद्ध हिंसा तथा धार्मिक अल्पसंख्यकों की महिलाओं की सुरक्षा को लेकर लगातार चिंताएँ सामने आती रही हैं।
उन्होंने कहा, “कट्टरपंथ पर मौन रहना उदारवाद नहीं, बल्कि महिलाओं के अधिकारों के प्रति विश्वासघात है।” महिला अधिकार, शिक्षा और समानता किसी भी राजनीतिक सुविधा से ऊपर होने चाहिए।
डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि “कांग्रेस-सपा को तय करना होगा—महिला समानता या वोटबैंक की राजनीति।” उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों को बेटियों के अधिकारों और गरिमा को किसी भी राजनीतिक हित से ऊपर रखना चाहिए।
उन्होंने भारत में सभी शिक्षण संस्थानों के लिए समान एवं धर्मनिरपेक्ष नियमों की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि निर्धारित यूनिफॉर्म का पालन अनिवार्य होना चाहिए और चिकित्सकीय आवश्यकता को छोड़कर कक्षा में चेहरा ढकने की अनुमति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, स्वतंत्र सोच और समान नागरिकता की भावना विकसित करना है।
डॉ. सिंह ने कहा, “हमारा विज़न ऐसा भारत है जहाँ प्रत्येक बेटी स्वतंत्रता और आत्मविश्वास के साथ पढ़े और उसकी पहचान उसकी प्रतिभा से हो—पर्दे, पाबंदियों या कट्टरपंथ से नहीं।”
उन्होंने कहा कि “कट्टरपंथ पर मौन महिलाओं के अधिकारों के साथ विश्वासघात है; कांग्रेस-सपा को बेटियों को वोटबैंक से ऊपर रखना होगा।” उन्होंने राजनीतिक दलों से महिला अधिकारों और समानता जैसे विषयों पर स्पष्ट नीति अपनाने तथा वोटबैंक की राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्रहित को प्राथमिकता देने का आह्वान किया।
डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा, “तुष्टीकरण अगली पीढ़ी को संकट देता है; स्पष्ट नीति उसे सुरक्षित भविष्य देती है। राष्ट्रहित सर्वोपरि—एक देश, समान नियम!”